पड़ोस की भाभी सेक्स की चाह-3

पड़ोस की भाभी सेक्स की चाह-3


मेरी इस सेक्स कहानी के पिछले भाग
पड़ोस की भाभी सेक्स की चाह-2
में आपने जाना कि मैंने भाभी की पैंटी थोड़ी खींच दी थी. मेरे सामने उनकी चिकनी चुत लंड के लपलप कर रही थी.

अब आगे पढ़े कि मैंने कैसे पड़ोसन को चोदा:

मैं- शशि … तुम बहुत मस्त हो … यार … कसम से मैं तो मर ही गया.
भाभी- उन्हह … मार ही डालोगे क्या संजय … मैं कांप रही हूँ … मुझे ऐसा लग रहा है … जैसे ये सब आज मैं पहली बार कर रही हूँ … लव यू संजय … आह खा जाओ मुझे आज.

मैंने धीरे से भाभी की पैंटी उतारना शुरू कर दी. भाभी ने खुद अपने चूतड़ उठाकर मेरी मदद की. मैंने भाभी की पैंटी उतार दी और उनकी चूत पर अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.

भाभी- हाईईईई संजय … तुम तो पागल कर दोगे यार … कितना मस्त सेक्स करते हो … रजत ने तो कभी इतना मज़ा नहीं दिया मुझे … आह.
मैं- शशि मेरी जान … चिंता ना करो, मैं तुम्हें जिंदगी के ऐसे मज़े दूंगा कि हमेशा याद रखोगी.

भाभी- हां संजय … ऐसे ही मेरे साथ रहना. अकेलापन मुझे खा जाता है यार … मैंने भी यही सोचा था कि मैं अकेलेपन को क्यों खा जाने दूं … अपनी जवानी तुम्हें ना खिला दूं. हाईईईई संजय … लव यू जान.

मैंने भाभी की चूत को बहुत चूसा और धीरे से उनका गाउन पूरी तरह से उनके बदन से अलग कर दिया. भाभी का मस्त यौवन अब एक ब्रा में क़ैद था. मैंने धीरे से उन्हें उठाया और सीने से लगा कर भाभी की ब्रा का हुक खोल दिया. ब्रा ने चूचों को आजादी दे दी थी.

अब भाभी मेरे सामने एकदम नंगी पड़ी थीं. उन्हीं के बिस्तर में आज मैं भाभी को चोदने वाला था. मैंने सोचा कि उस दिन भाभी मुझसे कप को साफ़ करके चाय पिलाने को कह रही थीं … आज देखो अपने बिस्तर में मेरे सामने एकदम नंगी हैं और आज ये मेरे लौड़े का पानी भी पियेंगी. मैं दिल ही दिल में बहुत खुश हो रहा था.

मैंने भाभी के मम्मों को चूसना शुरू किया. गजब के टाइट मम्मे थे. बेबी होने के बावजूद एकदम कसे हुए थे. उनमें दूध भी आ रहा था.

मैं- शशि, लगता है रजत ने कभी तुम्हारे जिस्म को चूसा ही नहीं है.
भाभी- हां यार, उसमें ताक़त तो है पर कभी मेरी मुनिया को चूसता ही नहीं है, बस सीधा पेल कर सेक्स करने लगता है. आह तुम तो गजब कर रहे हो संजू … आह लगता है तुमको बहुत अनुभव है … कहां से सीखा?
मैं- अन्तर्वासना वेबसाइट से सब पता चल जाता है जानेमन.

मैंने भाभी के मम्मों को चूसा और उनके दूध का भी मजा लिया. फिर मैंने उन्हें उल्टा लिटा दिया. अब भाभी के मस्त मोटे मोटे नंगे चूतड़ मेरे सामने थे. जिनके मैं सपने देखता था, आज वो नंगे मेरे सामने थे. मैंने भाभी के चूतड़ों पर अपना गाल फिराया और उन्हें चूसना शुरू कर दिया. इससे तो भाभी बिल्कुल पागल हो गयी थीं.

भाभी- आह संजू तूने मुझे तो पूरा नंगा कर दिया और अपना एक भी कपड़ा नहीं उतारा … ये तो ग़लत है यार.
मैंने भाभी से कहा कि तुम्हें रोका किसने है जान.

मेरी बात सुनकर भाभी उठीं और मेरी टी-शर्ट को उतार दिया, साथ ही बनियान को भी उतार दिया. फिर मुझे झटके से धक्का बिस्तर पर देकर लिटा दिया और मेरी छाती पर चूमने लगीं.

भाभी- उम्म्हा … मुझे मर्द की छाती पर बाल बहुत पसंद है संजय … रजत के कम हैं, तुम्हारे तो बहुत हैं. आह मुझे इनमें उंगलियां फिरा कर बड़ा मज़ा आता है.

मैं आराम से लेट गया और बाजी भाभी ने अपने हाथ में ले ली. वो अपने गालों को मेरी छाती पर फिराने लगीं. मैं आंख बंद करके भाभी की कोमलता को फील करने लगा.

फिर भाभी धीरे धीरे मेरे पेट की तरफ जाने लगीं. मैं तो मदहोश हो गया था. वो एकदम पागलों की तरह मेरे पेट पर चूम रही थीं. मुझे एहसास हुआ कि ये तो बहुत प्यासी हैं, भाभी को लंड की बहुत ज़रूरत है. वैसे भी भाभी की अभी सिर्फ़ 27 साल की उम्र थी. हालांकि वो लंड का मज़ा चख चुकी थीं. लेकिन बिना लंड के इतने इतने दिन तक कैसे रहती होंगी.

मेरे साथ भाभी ने विश्वास करने में 6 महीने लगा दिए थे. मुझे पूरा आईडिया लग चुका था कि अगर मैं भाभी के साथ अच्छे से रहूँगा, इनका और फैमिली का ध्यान रखूंगा, तो ये मुझे जिंदगी का मज़ा देती रहेंगी और खुद भी मज़ा लेती रहेंगी.

भाभी मुझे पेट पर मदहोशी से चूम रही थीं. फिर धीरे से उन्होंने अपने होंठों को नीचे की तरफ सरकाया. मैं कंपकंपाने लगा था क्योंकि इससे नीचे तो मेरा पज़ामा था. मैंने धीरे से आंखें खोलकर भाभी को देखा. वो मस्ती से आंखें बंद करके बस मुझे चूमे जा रही थीं, असली मज़ा ले रही थीं.

तभी भाभी ने मुझे देखा, तो मुस्कुराने लगीं- प्लीज़ यार संजय … तुम अपनी आंखें बंद रखो … ऐसे मत देखो, मुझे शर्म आती है. बस मुझे फील करने दो.
मैं- हाईईईई ठीक है जानेमन … जो मान चाहे, वो करो … तुम बस खुश रहा करो.

भाभी ने धीरे से मेरे पज़ामे और अंडरवियर को एक साथ नीचे सरका दिया. मेरे लंड पर हल्के हल्के बाल थे.

भाभी- साफ़ नहीं किया तुमने?
मैं- अरे, मुझे उम्मीद थोड़ी ही थी कि आज ही मेरी किस्मत खुल जाएगी. आगे से ध्यान रखूंगा.
भाभी- हां, मुझे एकदम साफ़ पसंद है.

फिर भाभी ने धीरे से मेरे पज़ामे और अंडरवियर को नीचे सरका दिया. मेरा लंड पूरा टाइट था और चड्डी में अटक रहा था. भाभी ने अपने कोमल हाथों से लंड को पकड़ा और बाहर निकाल लिया. आह उसके हाथों का स्पर्श पाकर लंड और टाइट हो गया.

भाभी- हाईई … संजय, तुम्हारा तो बहुत मस्त है यार … रजत का भी अच्छा है पर तुम्हारा ज़्यादा अच्छा है.

बस इतना कहा भाभी ने और लंड को हाथों में लेकर ऊपर-नीचे करने लगीं. फिर भाभी ने धीरे से लंड को अपने मुँह में ले लिया और प्यार से चूसने लगीं.

मैं तो उस टाइम बिल्कुल पागल हो गया था.

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद भाभी ने कहा- संजय, अब रहा नहीं जा रहा … प्लीज़ ऊपर आ जाओ ना.

मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया और धीरे से उनकी मस्त चूत में अपने लंड का टोपा लगा दिया. भाभी की चुत एकदम चिकनी हो गयी थी. मेरा लंड आराम से अन्दर जाने लगा.

आह गर्म गर्म सा लगा. उस टाइम तो मुझे जन्नत का मज़ा आ रहा था. हम दोनों आंखें बंद करके एक दूसरे के शरीर का मज़ा ले रहे थे.

भाभी मेरे लंड की मोटाई को अपनी चुत में फील कर रही थीं और मैं उनकी चूत की गहराई को माप रहा था. हम दोनों आंखें बंद करके एक दूसरे का मज़ा ले रहे थे.

मैं धीरे धीरे लंड को आगे पीछे कर रहा था, दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था.

भाभी- आह संजय, तुम तो गजब हो यार, इतना मस्त मज़ा तो मैंने दो साल की शादी में कभी फील नहीं किया … आह सच में सेक्स का अपना मज़ा है यार … बस साथी मस्त होना चाहिए. तुम्हारा लंड भी गजब का है संजय … मेरे अन्दर तक जा रहा है … आह गर्म गर्म और बड़ा मजेदार लग रहा है यार. संजय तुम तो गजब का चोदते हो यार … मैं तो तुम्हारी दीवानी हो गयी हूँ. मुझे तो ऐसा लग रहा है कि असली मज़ा तो आज ही आया है संजय. तुम्हारा बदन भी बड़ा जोरदार है यार … मजबूत बांहें हैं, मस्त छाती है. उस पर ये मखमली बाल और लंड को तो पूछो मत … मैं तो जन्नत में चली गयी हूँ यार.

मैं- हाईय शशि … तुम्हारा बदन भी तो मस्त है जानेमन … कितनी गोरी हो तुम, मस्त चुचे है तुम्हारे और चूतड़ों की तो पूछो ही मत … तुम्हारी चूत में लंड जा रहा है, ऐसा तो लग रहा है, जैसे बस यही जिंदगी है. जानती हो, तुम्हारे बिस्तर पर तुम्हें पूरी नंगी करके तुम्हारी चूत को चोदना ही मेरा सपना था शशि. मैंने सोचा था कि तुम शायद कभी नहीं मानोगी … लेकिन कोशिश करने में क्या हर्ज है, यही सोचकर मैंने तुमसे बात की थी.

भाभी- तुमने सही किया संजय … जिस दिन तुमने मुझे गर्लफ्रेंड बनने के लिए ऑफर किया था, तो मैं डर गयी थी. लेकिन तुमने जब कहा कि तुम मेरी फैमिली लाइफ को डिस्टर्ब नहीं होने दोगे, तो मैं तुम्हारी दीवानी हो गयी थी यार. उस दिन मैंने जानबूझ कर साड़ी पहनी थी ताकि तुम कुछ कहो. तुम तो उसके बाद गायब ही हो गए थे. और जानते हो, जब आज तुमने मुझे पीछे से पकड़ा था न … मैंने तुम्हारे लंड के साइज़ को फील किया था, मैं खुश हो गयी थी कि तुम्हारा लंड बड़ा मस्त है. मैं उसी दिन से सपने लेने लगी थी कि कब तुम मेरी चूत में इसे उतारोगे और मुझे शांति दोगे. आह संजय, बस ऐसे ही मुझे संभाल कर रखना … मैं तुम्हें जिंदगी भर खुश रखूंगी … सारी उम्र तुम्हारे लंड को अपनी चूत का रस पिलाऊंगी.

मैं भाभी को बड़े आराम से चोदे जा रहा था. थोड़ी देर बाद हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए. भाभी ने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया और मैंने उनकी चूत.

क्या गजब लंड चूस रही थीं वो … रुकना मुश्किल हो रहा था. आधे से ज़्यादा लंड भाभी के मुँह में चला गया था. भाभी का पूरा मुँह थूक से भर गया था, लेकिन उन्होंने लंड चूसना कम नहीं किया था.

मैंने सोचा कि हाय रे किस्मत, कभी ये चाय के कप को भी साफ़ करने को कह रही थी … और आज देखो, मेरे लंड के रस को भी कैसे मज़े से चूस रही है.

उन्होंने मेरे आंड भी चूस डाले, सच में बहुत आग थी शशि भाभी में.

थोड़ी देर बाद मैंने भाभी को उल्टा लिटाया और उनके चूतड़ों के नीचे तकिया लगा दिया. उनकी मस्त गांड उभर कर बाहर आ गयी. कमाल के चूतड़ थे उनके … एकदम गोल गोल.

मैंने बड़े प्यार से भाभी के चूतड़ों के बीच के किशमिशी छेद पर होंठ लगा दिए. वो एकदम से उछल पड़ीं- आह संजय … मार ही डालोगे क्या आज … आह कितना सुख दे रहे हो यार … तुम तो आज मेरे शरीर के एक एक अंग को चूस ही जाओगे.

मैं- जानेमन, मुझे तुम्हारा शरीर का हर हिस्सा प्यारा लगता है और चूतड़ों का इलाका तो सबसे ज़्यादा मजा देता है. तुम बस लेटी रहो … और मज़ा लो. सच बताओ … तुम्हें रजत के साथ मज़ा आता है या मेरे साथ?

भाभी- अरे, मज़ा तो आज ही लिया है यार, वरना अब तक तो मैं बस सेक्स कर रही थी. आंह असली मज़ा तो आज तुमने दिया है संजय … बस फिर से पेल दो मेरी चूत में अपना लंड यार … आह चोद डालो मुझे अच्छे से … मेरी जान … आज के बाद जब भी तुम कहोगे, मैं उसी टाइम तुम्हारे लिए अपनी सलवार का नाड़ा खोल दूंगी … तुम्हारा जब मन करे, तब मेरी चूत का भोग लगा लेना. आज से तुम अपने लंड को समझा देना कि अपना पानी बाथरूम में ना बहाए, उसका जब मन करे मेरी चूत की नाली में छोड़ दे. हाईईईई संजय … कहां थे अभी तक यार …
मैं- जानेमन, अब तो मैं सारी उम्र तुम्हारी चूत को भोगूंगा … तुम्हारे चिकने बदन को खा जाया करूंगा जानेमन.

फिर मैंने पीछे से आकर भाभी की चूत में अपना लंड डाल दिया और दोनों हाथों से उनके चुचे पकड़ लिए. मैं उनकी गर्दन को चूमने लगा.

भाभी- आह संजय … तुम तो गजब हो यार … सच में जन्नत दिखा रहे हो.

थोड़ी देर बाद भाभी ने मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और मेरे ऊपर आकर बैठ गईं. भाभी ने अपनी चूत में मेरा लंड सैट किया और धीरे से पूरा लंड चुत के अन्दर घुसा लिया. पूरा लंड अन्दर लेने के बाद भाभी धीरे धीरे गांड हिलाने लगीं. मैंने भी उनके उछलते हुए चुचों को पकड़ लिया और मसलने लगा.

भाभी- आंह उफ़ … संजय … कितना मज़ा आ रहा है यार … तुम्हारा लंड तो मेरी बच्चेदानी तक पहुंच रहा है … आह अब तो जब जब मेरा मन करेगा, मैं तुम्हारी पैंट की ज़िप को खोल लूंगी, तुम्हारा लंड निकाल लूंगी और अपनी चूत में ले लूंगी. आह चोदो मेरी जान … मैं बस जाने वाली हूँ..

मैं- हां शशि … बस मेरा भी निकलने वाला है … क्या करूं?
भाभी- अन्दर मत निकालना प्लीज़, गड़बड़ हो सकती है.

फिर भाभी ने झटके से मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाला और गॅप से अपने मुँह में ले लिया. इतनी सफाई पसंद लड़की मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी.

हाय रे सेक्स … यही तो कामवासना है, जो सब साफ़ सफाई भुला देती है.

थोड़ी देर में मेरे लंड ने पिचकारी मारी और मैंने भाभी के मुँह में पूरा वीर्य भर दिया. वो उठ कर बाथरूम में गईं और मुँह साफ़ करके मेरे पास आकर लेट गईं.

भाभी- संजय, वैसे मैं दो बार झड़ चुकी थी. पर प्लीज़ एक बार मुझे चूस कर झाड़ो ना!

मैं समझ गया और मैंने उनकी टांगों को फैलाकर अपनी जीभ से पड़ोसन को चोदा. दो मिनट बाद ही भाभी ने अपना पानी छोड़ दिया और सुस्त होकर लेट गईं.

भाभी- आह असली मज़ा आज आया संजय … सच में तुम बहुत प्यारे हो मेरे सनम … प्लीज़ मेरा साथ देते रहना.
मैं- हां शशि … मैं हमेशा तुम्हें प्यार करूंगा और साथ दूंगा.

हम दोनों एक दूसरे की बांहों में सिमट गए. फिर पता नहीं, कब नींद आ गयी.

कुछ देर बाद जब आंख खुली तो फिर से चुदाई शुरू हो गई. उस दिन मैंने भाभी को बहुत देर तक कई सारे तरीकों से पड़ोसन को चोदा. भाभी ने भी मेरा पूरा साथ दिया. सुबह 5 बजे तक हमने 3 बार सेक्स किया और पूरा मज़ा लिया.

सुबह मैं ऊपर आ गया.

उसके बाद जब भी हम दोनों को मौका मिलता, हम सेक्स कर लेते. मैंने कभी भी उनको परेशान या नाराज़ नहीं किया.

आज भाभी का बड़ा लड़का 14 साल का हो गया है और छोटा 10 साल का है. रजत भैया कम्पनी में सीईओ हो गए हैं और शशि भाभी एक मैनेजमेंट कॉलेज में लेक्चरर हो गई हैं. मेरी भी शादी हो गई है और मेरे दो बच्चे भी हो गए हैं. मेरी वाइफ पोस्टल डिपार्टमेंट में है और मैं दिल्ली में जॉब करता हूँ.

आज भी मैं और शशि एक दूसरे से प्यार करते हैं और जब मौका मिला, मैंने पड़ोसन को चोदा.
एक बार मैंने दिन में ही भाभी को खुली छत पर चोदा. इस विडियो में देखें.


दोस्तो, जब किसी से प्यार करो … ख़ासकर शादीशुदा से तो उसकी इज़्ज़त का हमेशा ध्यान रखो … कभी भी उसको परेशान ना करो. यकीन करो दोस्ती और प्यार बहुत लंबे समय तक चलता है.

इस तरह से मैंने पड़ोसन को चोदा. मेरी सेक्स कहानी पर कमेंट करने के लिए मुझे मेल लिखें.
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