सजा के बाद बुर की चुदाई का मजा-1

सजा के बाद बुर की चुदाई का मजा-1

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अन्तर्वासना के पाठक पाठिकाओं को नमस्कार!
मैं रसिया बालम आप पाठकों के लिये अपनी नई कहानी लाया हूँ. मेरे बारे में आप मेरी पहली कहानी में जान चुके हैं. मैं उत्तरप्रदेश के मथुरा के छोटे गाँव से सम्बन्ध रखता हूँ.

इससे पहले मैंने अपनी पहली कहानी
दोस्त की बहन की सेक्सी स्टोरी : समर्पण
लिखी थी जिसे अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज के पाठकों ने बहुत सराहा. आपसे निवेदन है कि अपने कमेंट जारी रखें.

मेरी आज की कहानी उस वक्त की है जब मेरे दिल और दिमाग़ में वासना पूरी तरह से छाई हुई थी, नीलू की चूत चोदने के बाद मैं हर एक लड़की को हवस भरी निगाहों से देखने लगा था और उसको अपनी वासना के चंगुल में लाने की ताक में रहने लगा था.

मेरी दीदी के विवाह के दौरान मैंने अपने पापा के खास मित्र की बेटी स्मृति को चोदा. मुझे कोरी कुंवारी बुर मिली चोदने को और मैंने मन भर के उसकी चुदाई भी की लेकिन बुर चोदने से पहले एक डर के मारे मेरी बुरी तरह से फटी पड़ी रही… मैं इतना घबरा गया था कि आप सोच भी नहीं सकते.

मेरी दीदी का विवाह दिसम्बर के माह में था, उन दिनों जोरों की ठंड थी. घर में विवाह से सम्बंधित बहुत सारे कार्य थे तो माँ पापा से कह कर स्मृति को विवाह के कुछ दिन पूर्व ही बुला लिया था.

स्मृति के बारे में आपको बताना चाहता हूँ, स्मृति मेरे पापा के गहरे दोस्त वर्मा जी की पुत्री है. वर्मा जी और मेरे पापा इकट्ठे जॉब करते हैं. स्मृति बहुत सुन्दर लड़की है, वह भगवान की बहुत खूबसूरत कृति है.
स्मृति की आयु तब साढ़े उन्नीस साल की थी, उसका कद 5’5″ रंग गोरा, वक्ष 32, कमर पतली 26″ के करीब, देखने में श्रद्धा कपूर जैसी है. उसकी आँखें हिरणी जैसी चंचल हैं… और सधी हुई लेकिन साथ ही मदमस्त चाल जैसे माधुरी दीक्षित ‘हम आपके हैं कौन’ में चलती है.

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स्मृति और मैं एक दूसरे को पहले से ही जानते थे, मैं उनके घर यदा कदा जाया करता था तो स्मृति से हैलो होती ही थी परन्तु कभी ख़ास वार्तालाप नहीं हुआ.

अब जब वो हमारे घर आई तो मैं उसको अपने बिस्तर पर लाने की सोचने लगा.

हम दोनों पूरा दिन ही घर में साथ रहते और काफी बातें करते. वो भी मुझ से काफी हद तक खुल गई थी लेकिन वो मुझे अपने दोस्त से ज्यादा कुछ नहीं मानती थी. हाँ, मेरे साथ छेड़छाड़ करती रहती थी और विवाह के व्यस्त माहौल में मेरा ख्याल भी रखती थी, मुझे वक्त पर खाने पीने को पूछती थी तो इस से मुझे कुछ ग़लत फ़हमी हो गई कि शायद वो मुझे पसन्द करने लगी है पर मेरी नजर तो उसके कोमल बदन पर थी, उसकी चुदाई के सपने देख कर मैं खुश होता रहता.

दीदी की विदाई के बाद के बाद करीब करीब सभी सगे सम्बन्धी अपने अपने घर लौट गए थे, हमारे घर में मौसी, उन की बेटी, मेरी बुआ और उन की लड़की ही थे.
स्मृति भी आज कल में अपने घर जाने को थी.

विवाह के सभी कार्य सम्पन्न हो चुके थे पर सभी जने बुरी तरह से थके हुए थे इसलिए एक रूम साफ करके जमीन पर ही बिस्तर लगा कर मैं, मेरी मौसी की बेटी, बुआ की बेटी और स्मृति सोने लगे, मम्मी, मौसी, बुआ सब बाहर चारपाइयों पर सो गई थी.

कमरे में हम जमीन पर बिस्तर बिछा कर लेते, सबसे पहले बुआ की बेटी, उसके साथ मैं, मेरे साथ में मौसी की बेटी, उसके बाद मधु, पड़ोस की एक लड़की, वह बढ़िया मस्त चीज थी, वह स्मृति की दोस्त बन गई थी तो उसको स्मृति ने अपने साथ रोक रखा था, और आखिर में स्मृति लेटी हुई थी.

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मधु, बुआ और मौसी की बेटियाँ थकन के कारण लेटते ही सो गई. स्मृति को शायद नींद नहीं आ रही थी तो उसने मुझे अपने पास बुला लिया- नींद नहीं आ, रही मेरे पास आओ, बातें करेंगे.
मैंने एकदम अपनी रजाई उठाई और जा कर उसके पास लेट गया.

हम काफी देर तक बात करते रहे. मैं बारम्बार उसके बदन को छूने का यत्न करता रहा… कभी उसके हाथ को तो कभी उसके कंधे को पकड़ता… उसने एक बार भी मुझे छूने से नहीं रोका तो मुझे लगा कि उसकी मूक सहमति है जो मैं कर रहा हूँ.

कुछ देर बाद उसको नींद आने लगी तो वो सो गई लेकिन मेरी नींद उड़ चुकी थी, मैं उस की रजाई में घुसने का तरीका सोचने लगा कि तभी नींद में उसका हाथ मेरे बदन पर आ गया, मुझे लगा कि स्मृति ने जानबूझ कर मेरे ऊपर हाथ डाला है.
हवस मेरे दिमाग में बुरी तरह से छाई हुई थी तो मैं बिना कुछ सोचे विचारे उस की रजाई में सरक गया.

उस के बिस्तर में घुस कर मैंने अपनी हरकत करनी शुरु की, मैं उस की कमर पर हाथ रखा कर सहलाने लगा, वो नींद में थी पर तब भी उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से हटा दिया. लेकिन मैं भी ढीठ था, उसकी पीठ मेरी ओर थी, मैं अनवरत उसके बदन को छूता रहा कभी उसकी पीठ को, तो कभी उसके चूतड़ों को… कभी उसके गाल पर हाथ छुआता… तो कभी उसके गले को सहलाता, कान को छूता.
लेकिन वो भी हर बार मेरे हाथ को अपने शरीर से दूर हटा देती.

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थोड़ी देर के बाद उस ने करवट ली और अपना चेहरा मेरी ओर कर लिया.. अब मैं उसके पेट और चूचियों को सहलाने लगा… बीच बीच में मैं उसकी जाँघों के बीच में उस की योनि पर हाथ लगा रहा था.
मेरी शरारतों से उस की नींद खुल गई, वो वहां से उठ कर जाने लगी तो मुझे ऐसा लगा कि वो शर्म के मारे जा रही है… मैंने उसको अपन बाहों में पकड़ लिया और धीमे से उस के कान में कहा- मज़ा नहीं आ रहा क्या?
उसने मेरे गाल के पर एक थप्पड़ मार कर कहा- मुझको मालूम नहीं था कि तुम ऐसे नीच ख्याल रखते हो मेरे बारे में… तुम से तो मैं सवेरे सब लोगों के सामने बात करूंगी.

इतनी बात सुन कर तो मेरी हवा सरक गई, मेरी गांड फट गई… दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. मेरी अन्तर्वासना जाने कहाँ गायब हो गई. मैं बदहवास सा अपने आप को गालियाँ देने लगा. मैं बुरी तरह से डर गया था कि वह सुबह को जरूर कोई ना कोई नौटंकी करेगी और मेरी गांड छितवायेगी.

कहानी जारी रहेगी.
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