दोस्त की चुदक्कड माँ के बूब्स को पकड़ा और दबाने लगा

दोस्त की चुदक्कड माँ के बूब्स को पकड़ा और दबाने लगा

हेलो दोस्तों मे राज गुजरात से हूं. यह मेरी दूसरी हिंदी सेक्स कहानी है जो मैं आपको बताने जा रहा हूं. मेरी कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार मुझे जरूर मेल कर के भेजें. मुझे आशा हे की यह कहानी आप लोगो को बहुत पसंद आएगी.

यह कहानी आज से एक साल पहले की है, यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त विकास   की मां पूर्वी आंटी की है, पूर्वी आंटी का फिगर ३८-३२-३६ है, उनको देखते ही चोदने का मन करता है, कई बार मैंने उन के नाम की मुठ्ठ मारी हे और मुझे उससे बहुत मजा आता हे. में हमेशा से उनको चोदने का ख्वाब देखता रहता था, उन के पति एक  ऑफिसर थे और मेरा दोस्त एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है.

मैं जब भी उन के घर पर जाता हूं तो मेरा ध्यान आंटी पर ही रहता है, यह बात अब आंटी को भी पता चल गई थी, शायद वह भी मुझसे यही चाहती थी और वह भी मुझ से  चुदवाना चाहती थी क्योंकि उनके पति महीने में एक बार ही घर पर आते थे.

एक दिन विकास ने मुझे कॉल कर के बोला कि आज शाम को घर पर आना पार्टी करेंगे, मैंने सोचा चलो इसी बहाने आंटी को भी देख लूंगा, शाम को ७:३० बजे मैं रेडी हो के उनके घर पर चला गया.

जैसे ही मैंने दरवाजे की बेल बजाई तो आंटी ने ही दरवाजा खोला, में तो आंटी को देखते ही चौंक गया आंटी उस टाइम नाइट गाउन में थी और आंटी का फिगर साफ नजर आ रहा था, मैं उनको देखते ही खुश हो गया, आंटी ने मुझे अंदर बुलाया और मैंने पूछा विकास कहां है? तो आंटी ने बोला उन के नाना की तबीयत खराब थी तो वह मेरे मायके गया हुआ है ,कल शाम तक आ जाएगा.

तो मैंने बोला उसने मुझे सुबह फोन कर के यही यहां पर बुलाया था, तो आंटी ने बोला उस को वहा से ५ बजे फोन आया था तो वह ६ बजे यह से निकल गया हे, तो मैंने आंटी को बोला ठीक है आंटी मैं अब निकलता हूं.

तो आंटी ने बोला की अब आय है तो चाय पी कर जा, तो मैं फिर वहीं पर बैठ गया और आंटी चाय बनाने अंदर किचन में चली गई, तो मैं अपने मोबाइल से गेम खेलने लगा. थोड़ी देर के बाद आंटी आई और वह मुझे चाय देने के लिए नीचे झुकी तो मेरी नजर उन के बूब्स पर पड़ी और मेरी आंखें चोडी हो गई, उन के बूब्स को देखते ही मेरे लंड में खलबली मच ने लगी, मैं वहां से अपनी नजर नहीं हटा पाया तो आंटी ने मुझे कहा अरे राज क्या देख रहा है? यह तेरी चाय रेडी है.

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तो मेने चाय अपने हाथ में ली और उसे पीने लगा और मन में घबराहट भी होने लगी कहीं आंटी मेरी बात किसी को बता ना दे. फिर आंटी भी उन की चाय लेकर मेरे पास आकर पीने लगी. थोड़ी देर पीने के बाद आंटी ने बोला कोई गर्लफ्रेंड है क्या तुम्हारी? तो मैंने कहा क्या?

आंटी ने कहा : तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?

मैंने कहा : नहीं तो, क्यों?

आंटी ने कहा : तुम जैसे मेरे बूब्स को देख रहे थे लगता है पहली बार देख रहे हो.

मैंने कहा : जी ऐसा कुछ नहीं है वह तो बस ऐसे ही नजर पड़ गई थी.

तो आंटी ने कहा : वहां से नजर हट नहीं रही थी क्या?

मैंने कहा : पता नहीं मुझे क्या हो गया था?

आंटी ने कहा : सेक्स किया है कभी?

मैंने कहा : कि एक बार किया है यह सब सुन कर मुझ में थोड़ी हिम्मत आने लगी और मैं भी समझ गया कि आंटी को भी मजा आता है यह सब करने में.

आंटी ने कहा : तुम मुझ से सेक्स करना चाहोगे?

यह सुनते ही मैंने आंटी को पकड़ा और उनके होठों पर किस करने लगा आंटी भी मुझे साथ देने लगी, धीरे धीरे किस करने के बाद मैंने आंटी के बूब्स को पकड़ा और दबाने लगा, अब  आंटी आह्ह औऊ ओह अहह औउह अहह इही हहह येस्स सिसकिया देने लगी.

फिर मेने आंटी को अपनी गोद में उठाया और बेड रूम में जाकर पटक दिया, आंटी के गाउन को निकाला, अब आंटी सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी, तो आंटी के पूरे बदन को चूमने लगा, धीरे धीरे आंटी की ब्रा खोली तो उन के दो कैद पंछी आजाद हो गए.

मैंने आंटी के बूब्स को पकड़ा और दबाने लगा, एक बूब्स को दबा रहा था और एक को चूस रहा था, अब तो आंटी की सिसकिया बढ़ गयी थी और आंटी भी मेरे लंड  को पेंट के ऊपर से सहलाना स्टार्ट कर दिया था.

में आंटी की चूची को मसल रहा था, आंटी के बूब्स को जब मैं बाईट लेता था तो आंटी उछल जाती थी और चिल्लाने लगती थी, थोड़ी देर के बाद मैंने आंटी की पैंटी निकाली और आंटी की चूत पर अपनी उंगली रख कर रगड़ने लगा, आंटी मचलने लगी.

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आंटी अब नहीं रह पा रही थी, आंटी ने मेरे पेंट को निकाला और मेरा अंडरवीयर निकाल कर मेरे लंड से खेलने लगी. मैंने आंटी को 69 में आने के लिए बोला तो आंटी मेरे ऊपर आ गई और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी, मेने भी आंटी की चूत को चाटने लगा, उन की चूत का टेस्ट मुझे स्वर्ग में ले जा रहा था.

मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा, आंटी भी अपनी गांड उछाल कर मेरे मुंह पर फेरने लगी, उन के चुतड भी इतने बड़े बड़े थे कि उनकी गांड देखने में मजा आता था, आंटी ने भी मेरे लंड को जोर जोर से चूसना शुरु कर दिया और मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी, फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने साथ में पानी छोड़ दिया. आंटी की चूत के पानी का टेस्ट बहुत ही टेस्टी था, उसने भी मेरा सारा पानी पी लिया और  वह मेरे लंड से खेलने लगी.

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर से टाइट हुआ तो आंटी के ऊपर चढ़ गया और आंटी की चूत के ऊपर रगड़ने लगा, आंटी तड़प रही थी पर मुझे उनको तडपता देख के बहुत मजा आ रहा था, आंटी बोली और मत तड़पाओ और मैंने अपने लंड  को चूत के होल पर रखा और जैसे धक्का दिया मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया.

आंटी चीखने लगी और मुझ से बोली थोड़ा धीरे करो बहुत दर्द हो रहा है, काफी दिनों से प्यासी हूं, मैं समझ गया कि अंकल आंटी को ठीक से नहीं करता था और मैंने धीरे धीरे धक्का देना शुरु किया और आंटी भी शांत हो गई.

तो मेने फिर से धक्का दिया तो मेरा ७ इंच का पूरा लोडा अंदर चला गया और आंटी ने जोर से खींचना शुरु किया, तो में थोडा रुका और आंटी को धीरे धीरे चोदने लगा. में उन के बूब्स को  भी अपने हाथो से मसल देता था ताकि उनका ध्यान हटे और उन को दर्द थोड़ा कम हो जाए, आंटी के बूब्स को भी कभी कभी बाईट भी करता था. फिर थोड़ी देर बाद आंटी को मजा आने लगा तो वह चिल्लाने लगी तो मैं समझ गया कि अब आंटी का दर्द कम हो गया है तो मैंने भी अपनि चुदाई की स्पीड बढ़ा दी, अब तो आंटी को और भी मजा आने लगा था. आंटी अब अहह ओह हां इईह ह औउह हां ओह हजाह अम्मॉ ज झः ओ ह्जह्ह हो अह्होह हहह कर रही थी, आंटी की आवाज पूरे रूम में गूंज रही थी.

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थोड़ी देर बाद आंटी मेरे उपर आ गयी और मेरे लंड  को अपनी चूत में लेकर उछल उछलकर चुदवाने लगी, आंटी अब रुकने वाली नहीं थी हम दोनों को और भी मजा आ रहा था. आंटी अपनी फीलिंग को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी, तो कभी कभी मुझे किस भी किया करती थी, और मेरे दोनों हाथों को पकड़कर उनके बूब्स पर जोर जोर से दबा रही थी, उनके बूब्स इतने सॉफ्ट थे की खाने का मन करता था.

तो मैं बीच बीच में बाईट भी  करता था, फिर आंटी उछल उछल कर थक गई और मेरे ऊपर लेट गई, तो मैंने आंटी को नीचे उतारा और उनको डौगी होने को बोला तो आंटी डौगी बन गई, मैंने उसकी चूत में उंगली डाली और थोड़ी देर खेलने लगा और फिर मेरे लंड को उनकी चूत में डाल कर धक्के मारने लगा. उन के दोनों हाथों को पकड़कर मैं उनको पीछे खींचता था और वो जोर जोर से आहह  अहह ऐऊ औऊ अह्ह्ह एस हहह इह हह के अजीब सी आवाजें निकाल रही थी, हम दोनों का मजा दुगना हो गया था.

करीब १० मिनट के बाद मेंने आंटी को सीधा किया और उन की गांड के नीचे तकिया रखा, उनकी चूत के ऊपर लंड रखकर धक्के मारना शुरू किया, थोड़ी देर ऐसे करने के बाद मैंने उनके पैर को अपने कंधे पर रख दिए और धक्का मारना शुरू किया, फिर मेरा निकलने वाला था तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से धक्के मारने लगा.

फिर हम दोनों ने एक साथ पानी छोड़ दिया और मैं आंटी के ऊपर ही लेटा रहा, फिर आंटी ने मुझे नीचे उतारा  और मेरे लंड को चूसा और मेरे लंड को साफ कर दिया. उस रात में उनके घर पर ही रुका और उन को करीब तीन बार चोदा. फिर जब भी मौका मिलता है तो हम चुदाई करते हैं.

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