प्रेयसी स्वाति संग प्रथम सहवास

प्रेयसी स्वाति संग प्रथम सहवास

प्रिय पाठको, मेरी कई कहानियाँ अब तक अन्तर्वासना पर प्रकाशित हो चुकी हैं, आप मेरी कहानियाँ यहाँ देख सकते हैं।

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मेरी कहानियों को पढ़कर आपने हमेशा अपनी प्रतिक्रिया दी, मैंने हरसंभव कोशिश की उनका जवाब देने की, लेकिन हो सकता है कि शायद किसी को जवाब नहीं दिया हो, तो मैं माफ़ी चाहता हूँ।

काफी वक्त से मैं सोच रहा था अपनी कहानी आपके सामने लाने के लिए, जब भी कुछ नया होता है तो मैं आपके सामने लेकर आता हूँ।

तो मैं अब घटना का विवरण शुरू करता हूँ, मैं अपने ऑफिस चार्टेड बस से जाता हूँ, जिसमें सारे सरकारी दफ्तर में काम करने वाले लोग होते हैं। मैं रोज एक निश्चित समय पर एक बस से ही जाता हूँ, मैं अक्सर देखता था कि एक खूबसूरत सी लड़की उसी बस में चढ़ती और जहाँ मैं उतरता था वहीं उतर कर सामने वाले ऑफिस में जाती थी।
उसे देख कर अजीब सा सुकून मिलता था मेरी आँखों को। उसके बूब्स बड़े बड़े और सेक्सी थे, बड़े बड़े सेक्सी देख कर हाथों में लेने का मन होने लगता था।
जब वो उतरती तो मैं उसके पीछे उतरता और उसके प्यारे से मस्त कूल्हे देखते रहता।
वो मेरे बाद वाले स्टैंड से चढ़ती थी।

एक दिन वो मेरे सीट पर मेरे बगल में बैठ गई, एक प्यारी सी खुशबू आ रही थी उससे। कोई अच्छा सा परफ्यूम लगाया था उसने।
बस में जब ब्रेक लगता तो मेरी बांह उसकी बांह से सट जाती, अजीब सी सनसनी महसूस हो रही थी।

इस तरह जब हमारा स्टैंड आने वाला था तो वो उठी और उसके पीछे मैं भी उठा और फिर वो उतर कर आगे आगे जा रही थी, क़यामत की चाल थी, घायल करने वाली।
फिर वो ऑफिस चली गई और मैं अपने ऑफिस।

एक दिन जब वो चढ़ी तो बस में सीट नहीं थी, तो मैंने उसे अपना सीट दे दी और मैं उसके पास खड़ा हो गया। उसने टी शर्ट पहनी थी, उसके नीचे काली ब्रा नजर आ रही थी और ब्रा के अंदर से बूब्स का ऊपर वाला हिस्सा नजर आ रहा था।
हमारी बात शुरू हुई, मैंने उसका नाम पूछा, उसने अपना नाम करिश्मा बताया। फिर हम उतर कर साथ चलने लगे, हमारी बात होने लगी, मैंने उसे बोला- आप खूबसूरत हो।
यह सुनकर वो शर्मा गई।

अब वो मेरे साथ सीट पर बैठने लगी थी और हम बातें करते रहते पूरे रास्ते, फिर हम लंच टाइम में मिलने लगे और बैठ कर बातें करते।

एक दिन मैं स्वाति को लंच कराने के लिए एक रेस्टोरेंट में ले गया, वहाँ हम दोनों आमने सामने बैठे थे। अचानक गलती से मेरा पैर उसके पैर पर चला गया, मैंने सॉरी बोला तो वो मुस्कुराने लगी।
इस पर मैं बोला कि कितनी प्यारी लगती हो मुस्कुराते हुए! इसके लिए तो मैं बार बार अपना पैर आपके पैर पर रखूँगा।
वो सर झुका कर मुस्कुरा दी।

इस बीच हमने आर्डर दिया और हमारा लंच आ गया था, हम लंच करने लगे और मैं उसे देखता रहा, जब हमारी नजरें मिलती तो वो मुस्कुरा देती।
हमने लंच ख़त्म किया और ऑटो से वापस ऑफिस जा रहे थे, मैंने उसका हाथ अपने हाथों में ले लिया। पूरे रास्ते मैं उसके हाथ को अपने दोनों हाथों के बीच में रखे रहा और हम बातें करते रहे।

मैं उसकी आँखों में देखकर बातें कर रहा था, उसके बाल उसके चेहरे पर बार बार आ रहे थे, लेकिन उसके हाथों को मैंने अपने हाथों में ले रखा था, तो वो बार बार चेहरा झटक कर बालों को पीछे कर रही थी, और बाल बार बार चेहरे पर आ रहे थे।
मैंने अपने हाथों से उसकी जुल्फ़ों को पकड़ा, और उसे उसके कान के पीछे कर दिया, इसमें मेरी उंगलियाँ उसके चेहरे को छूती गई, उसने अपनी आँखें बंद कर ली।
फिर हम ऑफिस पहुँच गए और अपने अपने ऑफिस चले गए।
इस तरह समय गुजरता जा रहा था, हम दोनों अक्सर मिलते।

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एक दिन सुबह उसने मुझे फ़ोन कर बोला कि शॉपिंग के लिए मेरे साथ चलो।
मैं घर से निकला, हम मिले और फिर पहले मैं उसे एक होटल में ले गया, हमने नाश्ता किया और फिर शॉपिंग के लिए चले गए। उसने काफी सारे कपडे ख़रीदे।
उसके बाद हम वापस आये तो मैंने उसे अपने घर चलने को बोला, फिर हम दोनों घर आ गए, रास्ते में मैंने आइसक्रीम ख़रीदी।

घर का दरवाजा खोलकर मैंने लाइट जलाई, उसे अंदर बुलाया और दरवाजा बंद कर लिया।
वो बेडरूम में रखी कुर्सी पर बैठ गई और मैं उसके सामने बेड पर बैठ गया।
चेयर रिवॉल्विंग थी, मैंने चेयर को बेड के तरफ खींचा और उसके हाथों को अपने हाथ में ले लिया। स्वाति गुलाबी टॉप और काली स्कर्ट पहने थी। मैं कुछ देर वैसे ही उसके हाथों को अपने हाथों में लिए बैठा रहा, उसकी आँखों में देखता रहा, कभी वो मुस्कुराती, कभी पलकें झुकाती, कभी अपने जुल्फों को हाथों से पीछे करती।

अब मैंने उसके दोनों हाथों को पकड़ा, उसे कुर्सी से उठाया और उसे करीब लाया, मैंने अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया, मेरे दोनों हाथ उसके कमर पर थे, मैं बेड पर बैठा था, और वो मेरे सामने खड़ी थी।
मैंने उसे अब बेड पर बिठाया और उसे बेड पर थोड़ा ऊपर होकर बैठने बोला, वो दीवार के सहारे तकिया लेकर बैठ गई।

मैं उसके करीब जाकर बैठ गया और उसके पैरों को सीधा किया, और मैंने अब उसके चेहरे को दोनों हाथों से थाम लिया और अपना चेहरा उसके चेहरे के करीब लाने लगा, उसकी गर्म सांसें मेरे चेहरे से टकराने लगी थी, मैं आहिस्ता आहिस्ता करीब आता जा रहा था, उसके परफ्यूम की खुशबू अब और मादक लगने लगी थी।

अब मेरे होंठ उसके होंठों के करीब पहुँच रहे थे, अब मेरे होंठ उसके होठों को छू रहे थे, मैं उसके होठों को चूम रहा था, हसीं एहसास था।
मैं अब उसके चेहरे को सहला रहा था, मैंने अपना एक हाथ, जो उसके गाल पर थ, उसे धीरे धीरे नीचे लाना शुरू किया, मैंने अपने हाथ को उसके कंधे पर रखा और उसे चूमता रहा।
फिर मैंने अपने हाथ को थोड़ा और नीचे किया और मेरे हाथ अब उसके मस्त बूब्स पर थे।
मैं अपने हाथ को कुछ देर वैसे ही रखे रहा और फिर मैंने धीरे धीरे दबाना शुरू किया।

स्वाति ने आँखें बंद कर ली और मैं अब उसके दोनों बूब्स को दबा रहा था।
उसकी ब्रा की लाइन बन रही थी उसके टॉप पर। उसकी फिगर कमाल की थी 34-28-34।
मैंने अब उसके टॉप को उठाना शुरू किया, लेकिन स्वाति बोली- नहीं प्लीज़, ये नहीं !
मैंने बोला- प्लीज़ बेबी अब तो मत रोको!

वो मना करती रही और मैं धीरे धीरे उसके टॉप को ऊपर करता गया, उसकी काली ब्रा अब मेरे सामने थी, और ब्रा के ऊपर से खूबसूरत बूब्स नुमाया हो रहे थे। मैंने उसके टॉप को निकाल दिया।

अब मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और अपने हाथों से उसके पीठ को सहलाने लगा। मेरे हाथ ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर हो रहे थे, फिर मैंने अपने दोनों हाथ उसकी ब्रा की हुक पर रखा और एक झटके में उसे खोल दिया।
स्वाति ने अपने दोनों हाथ अपने बूब्स पर रख दिए, मैंने उसे अपनी बाँहों में ले लिया और फिर धीरे धीरे उसके हाथों को हटाकर उसके बूब्स सहलाने लगा।

कुछ देर तक जब मैं उसकी बूब्स दबाता रहा तो वो भी उत्तेजित हुई और वो भी थोड़ा खुलने लगी, उसने मेरे होठों पर चूम लिया, मैं उसकी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और अपना एक हाथ उसकी पीठ पर और दूसरा उसकी जांघ पर रख दिया, हाथों को घुमाने लगा, मैंने अपना हाथ उसकी जांघों के बीच रख दिया और उसकी चूत को धीरे से दबा दिया।

उसने अपने पैरों से मेरे हाथ को जकड़ लिया।

अब मैं बैठ कर उसके पैरों को अपने में गोद में ले लिया और धीरे धीरे उसके स्कर्ट को ऊपर उठाने लगा।

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जैसे ही मैंने उसके स्कर्ट को थोड़ा ऊपर उठाया, स्वाति बोली- नहीं यह नहीं करना है मुझे, बाकी जो करना है कर लो, ये नहीं!
मैं बोला- मेरी जान मैं क्या कर रहा हूँ, और तुम्हें क्या नहीं करना है?

स्वाति मुस्कुराने लगी और बोली- तुम्हें भी पता है और मैं भी समझ रही हूँ, लेकिन मुझे पता है बहुत दर्द होगा।
मैं बोला- नहीं यार, आराम से डालूँगा, जब दर्द होगा तो निकाल लूँगा।
स्वाति बोली- मुझे पता है एक बार करने लगोगे, फिर कौन रुकता है?

मैं बोला- बेबी दर्द तो थोड़ा होगा ही लेकिन मजा बहुत आएगा।
ऐसे ही मैं उसे मनाता रहा और वो अपने स्कर्ट को पकड़े बैठी थी, मैं उसके बूब्स दबाता रहा, आखिर उसने अपने स्कर्ट को छोड़ दिया और अब मेरे हाथ उसके स्कर्ट को ऊपर उठा रहे थे।
जैसे जैसे स्कर्ट ऊपर जा रही थी, उसके खूबसूरत गोरे पैर मेरे सामने आ रहे थे, मैं उसके पैरों को दोनों हाथों से सहलाता जा रहा था और स्कर्ट ऊपर उठाता जा रहा था।

अब मैंने उसके स्कर्ट के हुक को खोल कर निकाल दिया, अब स्वाति सिर्फ पैंटी में थी।
मैंने उसे लिटा दिया और मैं उसके पैरों के बीच आ गया, मैंने उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से किस किया उसने अपनी आँखें बंद की हुई थी।
मैंने अपने दाँतों से उसकी पैंटी पकड़ ली और धीरे धीरे नीचे करने लगा, ऊपर से तो पैंटी नीचे आ गई, लेकिन हिप्स के नीचे से सरक नहीं रही थी, मैंने उसे करवट से किया और उसकी पैंटी को बाहर निकाल दिया, अब मेरी स्वाति की खूबसूरत जिस्म मेरे आँखों के सामने थी।
मेरे पैर फैले थे, मैंने स्वाति का हाथ पकड़ा और उसे अपनी गोद में बिठा लिया।

स्वाति के पैर मेरे कमर पर लिपटे थे और मेरे दोनों हाथ उसके पीठ से जाकर उसके कंधे पर थे, और मैं उसके निप्पल धीरे धीरे चूस रहा था, बारी बारी से मैं उसके निप्पल चूस रहा था।

अब मेरे हाथ धीरे धीरे नीचे आ रहे थे और अब स्वाति के चूतड़ों पर थे, मैं उन्हें मसल रहा था, स्वाति मेरे चेहरे को बेतहाशा चुम रही थी।

अब मैंने उसे लिटाया और अपने कपड़े उतार दिए, स्वाति मुझे कपड़े उतारते देख रही थी, जैसे ही उसने मेरा लंड देखा वो बोली- नहीं, मैं नहीं ले सकती, मेरी तो इतनी छोटी है, कैसे जायेगा, मेरी तो फट जाएगी।
मैं बोला- मेरी जान, कोई भी ऐसी चूत नहीं है जिसमें कोई भी लंड ना जाए।
मैंने अपना लंड उसके हाथों में दे दिया, स्वाति मेरे लंड को बहुत प्यार से छू रही थी और घुमा घुमा कर देख रही थी।

मैंने अपने लंड के स्किन को नीचे किया, यह देखकर वो बोली- कितना क्यूट है ये!
और उसने मेरे लंड को अपने गालों से सटा लिया और मैं उसके चूतड़ सहला रहा था।

थोड़ी देर तक वो मेरे लंड से खेलती रही, लंड की स्किन को ऊपर नीचे करती रही। अब स्वाति भी उत्तेजित हो रही थी, मैं आप चेयर पर बैठ गया और चेयर बेड से सटा दिया, स्वाति दीवार के साथ बैठी दी, मैंने उसके दोनों पैरों को पकड़ कर अपने तरफ खींचा और उसके पैरों को अपने कन्धों के ऊपर होते हुए चेयर के ऊपरी हिस्से पर रख दिया और उसकी मखमली गोरी, प्यारी सी चूत मेरे मुँह के सामने थी, मैंने उसके जांघों पर दोनों हाथ रखा और उसकी चूत को चूम लिया।

अब मैं अपना जीभ उसकी प्यारी सी छोटी चूत पर रख दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, जैसे जैसे मैं चूत चाट रहा था, वो अपनी गांड उठा रही थी, मेरे सर को अपनी जांघों से दबा रखा था।
मैंने अब एक हाथ से उसकी गांड पकड़ रखा था, और दूसरे से उसके बूब्स दबा रहा था। मैं उसकी चूत से अपना जीभ उसकी जांघों तक ला रहा था, और फिर जांघों से चूत तक।

अब वो भी गर्म हो गई थी, अधखुली आँखों से देख रही थी और मुस्कुरा रही थी, उसकी आँखें नशीली लग रही थी।
मैंने उसे बेड के किनारे लिटा दिया और उसके पैर मोड़ दिए, अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया, उँगलियों से मैंने उसकी चूत फैलाई और धीरे धीरे लंड पर दवाब देना शुरू किया लेकिन उसकी टाइट थी कि लंड अंदर नहीं जा रहा था।

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स्वाति ने अपना हाथ मेरे पेट पर रखा था, जैसे ही मैं थोड़ा जोर लगता उसे दर्द होता और हाथों से मुझे रोक देती।
वो बोली- नहीं राज, प्लीज़ आज छोड़ दो, फिर किसी दिन करेंगे, बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने उसे मनाया तब जाकर वो तैयार हुई, मैंने अपने लंड पर क्रीम लगाई और अपनी ऊँगली से उसकी चूत में क्रीम लगाई और फिर से लंड डालने लगा, अब लंड धीरे धीरे अंदर जा रहा था, स्वाति अपने नीचे वाले होंठ को दांतों दबाये थी।
अब मेरा लंड थोड़ा सा अंदर गया और मैं थोड़े से लंड को अंदर बाहर करने लगा।

स्वाति को बहुत दर्द हो रहा था जबकि मुश्किल से 2 इंच लंड अंदर गया होगा।
खैर मैं वैसे ही 2 इंच लंड अंदर बाहर कर रहा था, अचानक मैं रुका और स्वाति की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर एक जोर का शॉट मारा, लंड दनदनाता हुआ चूत में चला गया और स्वाति जोर से चीखी और उठने की कोशिश करने लगी, वो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी, आँखों से आँसू निकल रहे थे।

उसकी चूत से खून नहीं निकला, अब यह पता नहीं कि वो अक्षतयौवना थी या नहीं, अगर किया भी होगा तो शायद 1-2 बार।
खैर इससे मुझे क्या लेना, उसकी चूत मस्त थी, टाइट थी।
हाँ तो अब स्वाति धीरे धीरे सामान्य हो रही थी, मैं अब उसे बेड पर थोड़ा ऊपर खींच कर उसके ऊपर लेटा था। और मेरा लंड स्वाति की मस्त, चिकनी, टाइट चूत के अंदर थी। मैं दोनों हाथों से उसके गालों को सहला रहा था, उसे चूम रहा था और उसके बालों में हाथ घुमा रहा था।

करीब 5 मिनट के बाद जब वो थोड़ा शांत हुई तो मैंने अपना लंड थोड़ा सा निकाला और फिर जैसे ही दुबारा डालने लगा वो फिर से दर्द से चीखी, बोली- राज आज छोड़ दो।

मैंने उससे कहा- थोड़ी देर में दर्द कम जायेगा, बस थोड़ा बर्दाश्त करो।
अब मैं अपना लंड धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा, मेरे लंड पर टाइट चूत की जकड़न महसूस हो रही थी, अजीब सा उन्माद महसूस कर रहा था।
स्वाति किसी तरह दर्द सह रही थी, उसकी दोनों आँखों के कोनों से आँसू निकल रहे थे, अब मैंने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दिया था, स्वाति दर्द से कराह रही थी, मैंने उसकी यह हालत देख कर जल्दी जल्दी चुदाई करना शुरू कर दिया।

मुझे जल्दी वाली चुदाई पसंद नहीं, लेकिन उसकी हालत को देखकर मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और उसकी कमर को पकड़ कर जोर जोर से स्वाति की चुदाई करने लगा।
कुछ देर के बाद मेरा वीर्य उसकी चूत में गिर रहा था।
थोड़ी देर मैं उसके ऊपर लेटा रहा और फिर उसे अपनी बाँहों में लेकर पलट गया, मैं नीचे आ गया और वो ऊपर थी, उसके बूब्स मेरे सीने से दबे थे, मैं अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ पकड़े था। थोड़ी देर तक हम वैसे ही लेटे रहे, फिर स्वाति उठी तो मेरा वीर्य उसकी चूत से निकलकर लंड के आस पास फैला था।

मैं उसे लेकर बाथरूम में गया और डेटॉल हैंडवॉश से उसकी चूत अच्छे से धो दिया, उसे जलन हो रही थी।
इस तरह स्वाति की चूत मैंने पहली बार चोदी।
इसके बाद हम दोनों अक्सर मिलते हैं और सेक्स करते हैं।
कभी फिर मैं आगे की कहानी आपके सामने लाऊंगा।

मुझे आपकी प्रतिक्रियाओं का इन्तजार रहेगा।
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