सिमरन की टॉप-गियर में चुदाई

सिमरन की टॉप-गियर में चुदाई

राहुल
हैलो दोस्तो, मेरा नाम राहुल है। मैं नोयडा में रहता हूँ, पेशे से सॉफ्टवेयर इन्जीनियर हूँ। मेरी ऊँचाई 6 फ़ुट है। रंग गोरा और शरीर काफ़ी गठीला है। यह कहानी मैं अन्तर्वासना पर पढ़ी गई कहानियों से प्रेरित होकर लिख रहा हूँ।

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बात तब की है जब मैं एक बार बाहर हिल स्टेशन पर गया था। हिल स्टेशन से लौटते समय मेरी सीट रेल में कन्फ़र्म नहीं थी इसलिए मैं बस से जम्मू से वापस लौट रहा था। रात का सफ़र था तो मैं थोड़ा सुस्ताने के मूड में था। मैं थका हुआ था। इसलिए मेरी आँख लग गई। मेरी आँख सुबह खुली, बस जालन्धर पहुँचने वाली थी।

सुबह का समय था, लोग अपने-अपने ऑफिस के लिए निकल चुके थे। बस में काफ़ी भीड़ हो चुकी थी। मैं ट्रिपल सीट पर बैठा हुआ था। पास में एक जोड़ा बैठा था। कुछ देर बाद वो दोनों लोग बस से उतर गए।

मेरी सीट खाली हो चुकी थी। पास में ही एक लड़की बैठी थी, जिसकी उम्र लगभग 35 साल रही होगी। वो थोड़ी मोटी थी, पर उसका शरीर बहुत ही गदराया हुआ था। वो मेरे पास वाली सीट पर आकर बैठ गई। मैं खिड़की के पास वाली सीट पर बैठा हुआ था। वो मेरे पास वाली सीट पर बैठी थी।

कुछ देर बाद मेरे कानों में किसी के सिसकने की आवाज आई। मैंने देखा कि वो रो रही है। मैंने कुछ पूछ्ना ठीक नहीं समझा। शायद वो जालन्धर से लुधियाना जा रही थी। उसने लुधियाना का टिकट लिया था।

मैं अपनी मस्ती में खिड़की के बाहर देख रहा था, तो किसी ने मुझे आवाज लगाई, “सुनिए.. मुझे उल्टी आ रही है.. क्या आप मुझे खिड़की वाली सीट पर बैठने देंगे?
मैंने देखा कि वही लड़की मुझसे पूछ रही है।
मैंने अपना सर हिलाते हुए ‘हाँ’ बोल दी।

उसका नाम सिमरन था, वो जालन्धर में रहती थी और लुधियाना में जॉब करती थी। सीट के बहाने मेरी उससे बात होने लगी।
मैंने उससे झिझकते हुए पूछा- आप रो क्यों रही थी?
तो उसने बात टाल दी। मैं चुप रहा। इस बीच उसका फोन बज पड़ा। वो फोन पर बात करने लगी।

मेरा ध्यान गया तो वो फ़िर से रो रही थी। मैंने इशारे में उससे रोना बन्द करने के लिए बोला, तो वो कुछ देर में चुप हो गई। इस बीच हमारे बीच बहुत सारी नॉर्मल बातें हुईं। मैं चाहता था कि वो मुझसे मेरा मोबाईल नम्बर मांगे, पर उसने नहीं मांगा।
जब वो चलने लगी तो मैंने धीरे से उसकी गोदी में अपना विजिटिंग कार्ड डाल दिया। सिमरन ने मेरा कार्ड चुपके से अपनी ब्रा के अन्दर रख लिया।
तब पहली बार लगा कि मेरा इतने दिनों का इन्तजार शायद अब खत्म हो जाए।
वो लुधियाना में बस से उतर गई और मैं सीधा दिल्ली आया। मैं आपको बता दूँ कि मैं नोयडा में रह कर यहीं जॉब करता हूँ।

मैं छुट्टियाँ बिता कर आया था तो आते ही आते मेरे पास ऑफिस में काम बहुत ज्यादा था। एक हफ्ता ऐसे ही निकल गया। मैं अब सिमरन को भूल चुका था, पर उसे शायद मैं याद था।
एक दिन जब मैं आफ़िस से घर आया तो मैंने देखा कि किसी अनजान नम्बर से कोई काल आया था जो कि मिस्ड काल में पड़ा था। मुझे लगा किसी परिचित ने जरूरी काल तो नहीं किया, तो मैंने उस नम्बर पर काल किया।
वो सिमरन ही थी। उसने मेरा नम्बर सेव किया हुआ था।

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फोन उठाते ही उसने मुझे नाम से पुकारा, “राहुल.. कैसे हो? मैं सिमरन बोल रही हूँ.. भूल गए क्या मुझे?”
मैं समझ गया कि यह वही लड़की है जो मुझे बस में मिली थी, मैंने उससे ‘हैलो-हाय’ किया और पूछा- कैसी हो..!
वो बात बहुत ही औपचारिक रही।

उसने बोला- यह मेरा नम्बर है.. तुम सेव कर लेना।
मैंने ‘हाँ’ कर दी। सिमरन ने मुझसे फोन काटते-काटते कहा- अगर बिजी ना हो तो एक घण्टे बाद काल करना।
मैंने ठीक एक घण्टे बाद सिमरन को काल किया तो वो थोड़ी परेशान लग रही थी। नॉर्मल बातें होने लगीं।
फ़िर मौका पाकर मैंने उससे पूछा- उस दिन बस में रो क्यों रही थी?

उसने इस बार भी मुझे टालने की कोशिश की, पर मैं नहीं माना। तब उसने बताया कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया है और उसका एक पाँच साल का बेटा भी है। उसका पति रोज बस में किसी दूसरी लड़की की बांहों में हाथ डाले घूमता रहता है। इसलिए उस दिन अपने पति को ले कर वो रो रही थी।
फ़िर आगे मैंने उससे रिलेटेड कुछ नहीं पूछा। हमारी अब अक्सर बातें होने लगीं। कभी-कभी तो रात-रात भर वो मुझसे सभी तरह की बातें करती।

एक दिन मैंने उससे पूछा- पति से इतने दिन दूर रह कर भी तुम्हारा कभी सेक्स करने का मन नहीं करता..!
तो पहले तो वो थोड़ी देर चुप रही फ़िर बोली- हाँ ये बात तो है, जब वो अकेली रात को सोती है, तो उसके अन्दर की औरत उससे हमेशा बोलती है कि उसकी भी कुछ शारीरिक जरूरतें हैं।
मैंने ऐसे ही मजाक में बोल दिया- दिल्ली आ जाओ तुम्हारी जरुरतें मैं पूरी कर दूँगा। जैसे चाहोगी वैसे तुम्हारे शरीर और मन को खुश कर दूँगा।
पहले तो वो थोड़ी देर चुप रही उसके बाद हँसते हुए बोली- मैं कल दिल्ली आ रही हूँ।
पहले तो मुझे मजाक लगा, पर उसने इतने कॉन्फीडेन्स से बोला तो मुझे लगा कि सिमरन बहुत प्यासी है।

अगले दिन का प्रोग्राम तय हुआ। उसको अगली सुबह जालन्धर से चलना था। मैं रात को काफ़ी देर तक बात करके सो गया। सुबह का इन्तजाम करना था। मेरी सुबह आँख खुली तो देखा सिमरन की चार ‘मिस-काल’ पड़ी थीं। मैंने उसे फोन लगाया तो पता चला कि वो रास्ते में है।
वो अगले 3 घण्टे में पहुँचने वाली थी। मैंने उस दिन ऑफिस से छुट्टी ले ली। दिन का एक बजा और सिमरन का काल आया कि वो दिल्ली पहुँच चुकी है।

मैं उसे लेने मेट्रो स्टेशन के लिए निकल पड़ा। पंद्रह मिनट की ड्राईव के बाद मैं स्टेशन पहुँच चुका था।
मैं मेन गेट के सामने उसका इन्तजार करने लगा। उसी समय एक लाल टोप और नीली जीन्स में एक मस्त लड़की मुझे आती हुई दिखी। वो जब थोड़ा पास आई तो मुझे पता चला कि वो सिमरन ही है।
मैंने उसे गाड़ी में बिठाया और घर की तरफ़ चल दिया।

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घर पहुँच कर मैंने सबसे पहले सिमरन को पानी के लिए पूछा तो, उसने आँख मारते हुए कहा- मैं तुम्हारा पानी ही तो पीने आई हूँ।
इतना कहते-कहते उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी ओर खींच लिया। उसका बदन एकदम आग की भट्टी हो रहा था। उसने अपने होंठ मेरे लबों पर लगा दिए।

यह सब इतनी जल्दी होगा मुझे यकीन नहीं था, पर सिमरन का शरीर बहुत ही तेज नरमाया हुआ था। उसकी साँसें बहुत तेज चलने लगीं, उसने मुझे बेड पर धक्का दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई। ऐसा लग रहा था कि वो मेरा देह शोषण करने वाली है।
मैं कुछ समझ पाता उससे पहले ही उसने मेरी शर्ट के बटन खोलना शुरु कर दिए। मेरा सीना बहुत चौड़ा है, मेरे चौड़े सीने पर उसने चुम्बन करना शुरु किया।
मेरी छाती की घुंडियों को वो चूसने लगी, जैसे कोई बच्चा दूध पीता है।
मेरी मर्दानगी भी अब जोश मारने लगी। मेरा लंड अब एकदम फ़ड़फ़ड़ा रहा था और उसकी नाभि के आस-पास कुछ खोजने की कोशिश कर रहा था।

उसे मेरे लंड का आभास हो चुका था। मेरे होठों को चूसते हुए उसका एक हाथ मेरे लंड को सहला रहा था।
मुझे लगा कि आज मुझे कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आज सिमरन अपनी चूत की आग अपने आप बुझा लेगी।
चूमने चाटने में बीस मिनट कैसे निकल गए पता ही नहीं चला। अब मैं और सिमरन दोनों चुदाई की आग में जलने लगे, लग रहा था कि आज सिमरन अपनी भूखी चूत की आग पूरी तरह से बुझा कर रहेगी।

वो भी क्या करती, उसके दरवाजे ने लम्बे अरसे से कोई लंड नहीं लिया था।
वो मेरे लंड पर अपनी चूत ऐसे रगड़ रही थी, जैसे बर्मूडा के अन्दर से ही अपनी चूत की आग बुझा लेगी।
ये सब बहुत देर तक चलता रहा। अब मेरी बारी थी।

मैंने सिमरन को नीचे आने का इशारा किया, वो तुरन्त मेरे पास लेट गई और अपने निप्पल मसलने लगी। सिमरन अपने ऊपर काबू नहीं रख पा रही थी।
मैंने सिमरन का टोप उतारा और उसकी गुलाबी ब्रा के ऊपर से उसके चूचे चूसने लगा।
वो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी और एक हाथ से मेरा लौड़ा सहला रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूची दबा रही थी।
मैंने धीरे से उसकी जीन्स नीचे खींची, उसकी जाँघें एकदम दूध की तरह सफ़ेद थी और जाँघों के बीच पिन्क रंग की पैन्टी ऐसे लग रही थी, जैसे कोई चाँदनी रात में संगमरमर की अधनंगी मूरत हो।

मेरे सब्र का बान्ध टूटने लगा था, मेरा लंड बेकाबू हुआ जा रहा था।
उसने बहुत ही चालाकी से मेरा पैन्ट उतार दिया और मेरे अंडरवियर के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगी। सिमरन ने मेरा एक हाथ अपनी चूत पर रखवा दिया और इशारे से सहलाने को कहा।

उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। पैन्टी पूरी तरह भीग चुकी थी। मैंने एक झटके में उसकी चूत पैन्टी से आजाद कर दी।
मैंने ‘पोर्न-मूवी’ में भी ऐसी चूत नहीं देखी थी। सिमरन ने मेरा लंड मेरे अंडरवियर के साईड से निकाल लिया और मेरे लौड़े को चूसने लगी।
मैं मस्त हो गया और आनन्द लेने लगा। मुझे लगा कि अगर ऐसे ही लंड चुसाई होती रही तो मेरा काम बहुत जल्दी हो जाएगा।

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मैंने सिमरन को रोका और थोड़ा ऊपर उठाने को बोला।
जैसे ही वो ऊपर हुई, मैंने उसकी चूची पर अपने होंठ रख दिए और आम की तरह चूसने लगा।
वो मस्त होकर बहुत ही कामुक आवाजें निकालने लगी।

जल्दी ही उसका शरीर अकड़ने लगा और उसने मेरा सर अपनी चूत पर ऐसे दबा दिया, जैसे वो पूरा सर चूत में ले लेगी। वो झड़ चुकी थी।
मेरा लंड बुरी तरह से अकड़ रहा था। मैंने देर न करते हुए अपना ‘मस्त-कलन्दर’ सिमरन की चूत में डाल दिया। पर मेरा लंड अन्दर जाने की बजाय स्लिप हो गया और अन्दर नहीं गया।
वो तड़प उठी, फ़िर उसने देर न करते हुए मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत का रास्ता दिखाया और मुझसे धक्का मारने को इशारा किया।

मैंने थोड़ा दबाव बढ़ाया तो मेरा आधा लंड चूत के अन्दर चला गया। मुझे ऐसा लगा कि मेरा लंड किसी जलती हुई भट्टी में चला गया हो।
सिमरन की चूत इतनी ज्यादा कसी हुई नहीं थी, पर गर्म इस कदर थी कि किसी भी लंड को जल्दी ही पिंघला कर दे।
वो मस्त हो चुकी थी और अजीब-अजीब सी आवाजें निकाल रही थी।
थोड़ी देर तक मैंने अपनी चुदाई-गति सामान्य रखी, पर जैसे ही मुझे लगने लगा कि अब कम स्पीड से काम नहीं चलेगा, तो मैंने ‘टॉप-गेयर’ डाला और फ़ुल स्पीड से चोदना शुरु कर दिया।
वो अब ऐसे मस्त थी, जैसे उसे ज़न्नत का आनन्द मिल गया हो।
मैं कभी उसके चूचे चूस रहा था और कभी उसके होंठ।

मुझे लगने लगा कि मैं जाने वाला हूँ तो मैंने चालाकी से तुरन्त अपना आसन बदल लिया और वो अगले ही पल मेरे ऊपर मेरे लंड की घुड़सवारी कर रही थी।
वो अपने चूतड़ों को इस तरह हिला रही थी जैसे पोल-डान्सर हो।
एकदम से सिमरन की गति बढ़ गई और अगले ही पल उसके होंठों की थिरकन बढ़ने लगी और दो मिनट बाद अकड़ने लगी और झड़ गई।

वो मेरे ऊपर निढाल होकर लेट गई पर मेरा पारा अब बहुत ही ज्यादा चढ़ा हुआ था।
मैंने उसे फ़िर से नीचे लिया और अपना लंड फ़िर से चूत की गहराई में उतार दिया। पंद्रह-बीस तगड़े झटके देने के बाद मैं आने वाला था।
मैंने सिमरन से पूछा- मै आने वाला हूँ, कहाँ निकालूँ..!
उसने नशीली आवाज में बोला- चूत बहुत प्यासी है इसकी प्यास बुझा दो..!
मैंने अपना पूरा माल उसकी प्यारी सी चूत में उड़ेल दिया।

हम दोनों एसी में भी पसीने-पसीने हो चुके थे। मैं उसके ऊपर ऐसे ही दस मिनट तक पड़ा रहा। वो बहुत खुश लग रही थी।
मैंने सिमरन को लगातार दो दिन तक कपड़े नहीं पहनने दिए और ना ही मैं दो दिन तक ऑफिस गया।

मेरी चुदाई की कहानी यही खत्म नहीं होगी और आशा करता हूँ कि आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी।
अगर आपका प्यार और आपके मेल मुझे प्रोत्साहित करते रहे तो मैं लिखता रहूँगा। आपका राहुल।
[email protected]

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