Indian Aunty Sex Kahani – मेरी प्यारी चाची का बर्थडे गिफ्ट

Indian Aunty Sex Kahani – मेरी प्यारी चाची का बर्थडे गिफ्ट

इंडियन आंटी सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरी चाची ने योजना बनाकर मेरे लंड से अपनी चूत चुदवा ली. मुझे भी बहुत मजा आया. मैंने चाची को घोड़ी बनाकर भी चोदा.

इंडियन आंटी सेक्स कहानी के पिछले भाग
अपनी चाची को चोद ही दिया
में आपने पढ़ा कि

चाची उठी तो वीर्य बाहर आ कर उनके पटों पर फैलते हुए नीचे आने लगा.

चाची अपनी चौड़ी चौड़ी टाँगें करते हुए बाथरूम चली गई और बाहर आकर कपड़े पहनने लगी.

मैंने कहा- चाची, कपड़े नहीं, ऐसे ही रहेंगे.
चाची- चुन्नी तो लपेट लूँ?
यह कहकर चाची ने वही चुन्नी उसी तरह लपेट ली और रसोई में चली गई.
मैंने भी टॉवल लपेट लिया.

अब आगे की इंडियन आंटी सेक्स कहानी:

मैंने कहा- चाची, कपड़े नहीं, ऐसे ही रहेंगे.
चाची- चुन्नी तो लपेट लूँ?
यह कहकर चाची ने वही चुन्नी उसी तरह लपेट ली और रसोई में चली गई.
मैंने भी टॉवल लपेट लिया.

चाची ने गैस को सिम पर करके दूध उबलना रख दिया और एक थाली में खाना ले आई और डाइनिंग टेबल पर लगा दिया.

मुझसे चाची बोली- राज, तुमने खाना कम खाना है और खजूर वाला उबला हुआ दूध ज्यादा पीना है.
मैं- क्यों?
चाची- ताकत आएगी और जो वीर्य अभी निकला है वह फिर बन जायेगा.

मैंने एक रोटी और थोड़ी सब्जी खाई.
चाची ने भी खाना खाया और दूध को उबलता छोड़कर आ गई.

फिर चाची बाथरूम में जाकर फ्रेश हो आयी और आकर बेड पर लेट गई.
मैं भी चाची के साथ लेट गया.

अब मैं चाची की चूचियों पर हाथ फिराने लगा.
चाची- अभी मन नहीं भरा है क्या?
मैं- नहीं, अभी और करना है.

चाची ने लेटे लेटे मुझे अपने ऊपर खींच लिया.
मैं चाची के ऊपर चढ़ गया और उनके मम्मे चूसने लगा.

चाची- तुम तो दूध पीने में एक्सपर्ट हो गए हो.

दूध याद आते ही चाची बोली- मैंने गैस पर तुम्हारे लिए दूध कढ़ने के लिए रखा था, वह लाती हूँ, पहले पी लो.

चाची उठी तो मैं भी लण्ड को निकाले निकाले उनके पीछे किचन में चला गया.

जब तक चाची ने दूध ठंडा किया तबतक मैं उनके पीछे चूतड़ों में लण्ड अड़ा कर खड़ा रहा.

चाची- तुम तो बिना दूध पिये ही साँड की तरह पीछे लगे हो.
उन्होंने मुझे कढ़ा गर्म दूध दिया और बोली- पीओ इसे!
मैं- आप भी तो लो.

चाची मेरे लौड़े को पकड़कर बोली- कुछ देर में इसमें से ये मक्खन बनकर मेरे पास ही आना है, तुम पियो.

दूध पीते ही मेरे अन्दर नई एनर्जी आ गई.

चाची मुझे हाथ पकड़ कर अंदर बेडरूम में ले गई.
वहाँ जाते ही मैंने चाची को बांहों में ले लिया और उनकी चुन्नी को खोल कर नीचे गिरा दिया.

हमने खड़े खड़े बहुत देर तक एक दूसरे को चूमा.

मैं- चाची, लेटो, करते हैं.
चाची- कैसे करोगे?
मैं- जैसे पहले किया था.
चाची- अब तुम्हें एक दूसरा तरीका बताती हूँ.

यह कह कर चाची बेड पर घोड़ी बन गई और बोली- पीछे से चूत में अपना लण्ड डालो.
मैं चाची का यह नया पोज़ देखकर दंग रह गया.

पीछे से चाची के चिकने गोल चूतड़ और पीछे से बाहर की ओर निकली हुई, आपस में चिपकी हुई दो मोटी फांकें, सुडौल पट और चिकनी कमर बहुत ही सुंदर लग रही थी.

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मैं बेड से नीचे खड़ा हो गया और चाची के गोरे और चिकने चूतड़ों पर हाथ फिराना शुरू किया.
बहुत ही गजब का सेक्सी नजारा था.

चाची कहने लगी- चल अब पीछे से चूत में अपने लंड को डाल दे; और मेरी कमर पकड़ कर चुदाई शुरू कर!

मैंने चाची के बताए अनुसार अपने एक हाथ की उंगली और अंगूठे से चूत की फाँकों को अलग किया और अपने लंड के तपते हुए सुपारे को रख दिया.

थोड़ा सा जोर लगाने से ही पक् की आवाज से लौड़ा चूत में अंदर चला गया.
चाची का शरीर इकट्ठा होने लगा.

धीरे धीरे करके मैंने पूरा लंड पीछे से चाची की चूत में बैठा दिया.

चाची कहने लगी- आगे से अपने दोनों हाथ बढ़ाकर मेरी चूचियों को मसलता रह और पीछे से लोड़े को चूत में चलाता रह!
मैं चाची के बताए अनुसार करता रहा और धीरे-धीरे अपना लंड चलाता रहा.

कभी मैं अपने दोनों हाथों से चाची की कमर को कस लेता था तो कभी उनके चूतड़ों पर हाथ रख लेता.

चाची भी कभी अपना सिर ऊपर उठाती थी तो कभी दाएं बाएं झूला कर मारती रहती.
ऐसा करने से चाची के बाल बिखर गए.

तभी चाची बोली- थोड़ा जोर जोर से करो.
मैंने अपनी पूरी स्पीड पकड़ ली और धकाधक पूरा लंड पीछे खींच खींच कर अंदर चाची की बच्चेदानी तक घुसाने लगा.
चाची- धीरे, लगता है अंदर!

जिस बैड पर चाची घोड़ी बनी हुई थी वह थोड़ा सा ऊंचा था.
अतः मेरा लंड चाची की चूत में अधिक आराम से नहीं जा रहा था, मुझे एड़ियां उठानी पड़ रही थीं.

मैं बेड के ऊपर चढ़ गया और चाची के पीछे खड़ा होकर अपने घुटनों को थोड़ा चौड़ा करते हुए नीचा किया.
फिर चूतड़ों के पास उनकी कमर पर अपने हाथ रखे और जोर-जोर से पीछे से चाची की चूत की ठुकाई करने लगा.

सारा बेड चरमराने लगा था और मेरी जांघों की थाप चाची के चूतड़ों पर बहुत तेज आवाज कर रही थी.

मेरी सांसें बहुत तेज तेज चल रही थी और मैं पूरा जोर लगा लगा कर चाची के ऊपर आधा झुका हुआ ठुकाई कर रहा था.

चाची कहने लगी- राज, ऐसे तो मुझे बहुत दिक्कत हो रही है, तुम बेड के नीचे ही खड़े हो, मैं थोड़ा झुक जाती हूँ; फिर करना.
वैसे इस पोज़ में मुझे भी दिक्कत हो रही थी.

चाची ने मेरे लिए एक नया पोज़ बनाया.
घोड़ी की पोजीशन की बजाए चाची मेंढक की पोजीशन में आ गई अर्थात घुटने तो मोड़े रखे लेकिन अपने चूतड़ों को अपनी एड़ियों पर टिका लिया.
इस प्रकार से उन्होंने अपनी ऊंचाई कम कर ली और बिल्कुल बेड के किनारे पर आ गई.

अब चाची ठीक उसी पोजीशन में आ गई जैसे घोड़ी बैठती है.

चाची की चूत और चूतड़ मेरे खड़े होने से थोड़ा नीचे हो गए और मैंने अपनी टांगें फैलाकर अपनी ऊंचाई को बड़े आराम से चूत में सेट किया.

अब चाची की सुंदर गोल चिकनी गांड मेरे सामने थी. उभरी हुई चूत का मुँह नीचे चाची की एड़ियों की ओर हो गया जिससे मेरे पेट की तरफ खड़ा मेरा लौड़ा चूत को उसी पोजीशन में अच्छी तरह ठोक सकता था.

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मैंने चाची की कमर को पकड़ कर गच्च से लौड़ा अन्दर डाल दिया और चूत की धुनाई शुरू कर दी.

चुदाई इतनी जोर से हो रही थी कि लंड के घर्षण से चाची की चूत सुलगने लगी और चाची तरह-तरह की आवाजें निकालने लगी.
मेरे हर शॉट पर चाची आगे से अपना सिर उठाती और कमर को नीचे की तरफ झुकाने लगती.

मैंने आगे से चाची की चूचियों को पकड़ लिया जिससे चाची बिल्कुल गठरी की तरह मेरी बांहों में आ गई.

मेरा लंड उनकी बच्चेदानी तक ठोक लगाने लगा.

कुछ ही देर में चाची चरमसीमा पर पहुंच गई. उनकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया और चाची बस बस करने लगी.
लेकिन मैं लगा रहा.

चाची बोली- राज, एक बार रुक जाओ.
मैंने पूछा- क्या बात हुई?
चाची कहने लगी- बस मेरा हो चुका है और मेरे घुटने दुखने लगे हैं.
मैं रुक गया.

चाची बेड पर लेट गई और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी और हाँफती हुई बोली- चोदू महाराज थोड़ा आराम कर लो. तुमने तो मेरी बस करवा दी है. मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी बुरी तरह से चोद दोगे मुझे, लेकिन अच्छा लगा, बहुत मज़ा आया.

मैंने कहा- लेकिन मेरा तो हुआ नहीं है.
चाची- अभी कुछ देर रुको, कुछ नया करके दिखाती हूँ.

अब चाची मेरे ऊपर चढ़ गई. उन्होंने अपने हिप्स को थोड़ा उठाया. मेरे लंड को मेरे पेट की तरफ अपनी चूत के नीचे दबाया और मेरे लण्ड के उल्टे भाग पर चूत के छेद और क्लिटोरियस को आगे पीछे होकर बड़े प्यार से रगड़ने लगी.

चाची अपनी चूत की नर्म छोटी कोमल पत्तियों को रगड़ते हुए मेरे टोपे पर आगे पीछे होने लगी.

ऐसा करने से मुझे बहुत मजा आ रहा था और मुझे लगने लगा कि मेरा वीर्य ऐसे ही निकल जाएगा.

मैं धीरे से अपना हाथ नीचे ले गया और जैसे ही चाची अपने छेद को मेरे टोपे के पास लाई, मैंने मेरे फूले हुए टोपे को चाची की चूत में फँसा दिया.

चाची एकदम चिहुंक गई और बोली- बड़े शरारती हो.

तभी चाची ने बड़े प्यार से मेरे लण्ड के ऊपर नीचे होना शुरू किया.

मैं आराम से बारी बारी से चाची की चूचियों को पीता, काटता रहा और उनके कमर और चूतड़ों पर हाथ फिराता रहा.

कुछ ही देर में चाची कहने लगी- राज, यह लाइट बंद कर दो और वहीं गद्दे पर दरवाजे के पास चलो. वहाँ बारिश की फुहारें लग रहीं थीं, बहुत मजा आया था.

बारिश अभी भी जारी थी, बादल गरज रहे थे, बिजली चमक रही थी.

हम लाइट बंद करके उसी गद्दे पर आ गए और आपस में लिपट कर लेट गए.

मैंने चाची की कमर और चूतड़ों पर हाथ फिराना जारी रखा.

लगभग 10 मिनट के फोरप्ले के बाद चाची कहने लगी- जैसे पहले चोदा था, वैसे ही चोदो!

मैं चाची के पाँव की तरफ गया. चाची ने उसी प्रकार अपने घुटने मोड़कर चूत और चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया.
मैंने फूला हुआ सुपारा चाची की चूत के छेद पर लगाया और पूरा अंदर ठोक दिया.

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चाची ने मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया.
मैं चाची के पेट के ऊपर लेटता हुआ उनके होंठों तक पहुंच गया.

चाची ने अपनी टांगें सीधी की और उन्हें थोड़ा मोड़ कर चौड़ा कर लिया और कहने लगी- अब बड़े प्यार से मुझे प्यार करते हुए चोदते रहो.
मैंने धीरे धीरे ऊपर हो कर लण्ड चलाना जारी रखा.

अपने दोनों हाथों को मैंने चाची की कमर के नीचे से कर लिया और अपनी बाजुओं में जकड़ कर थोड़ा सा ऊपर को उठाया और नीचे से उनकी चूत की चुदाई करता रहा.

मेरे कमर में हाथ डालने से चाची का सिर और छाती थोड़ी सी ऊंची हो गई थी, चाची मेरी गर्दन और छाती पर किस करती.

एकदम चाची बोली- राज, मेरा बस अब छूटने वाला है, दोनों साथ ही डिस्चार्ज होंगे.

मैंने चाची की दोनों चूचियों को अपनी हथेलियों में दबाकर जोर-जोर से 10-12 शॉट लगाए और मेरे लण्ड से चाची की चूत में वीर्य की पिचकारियाँ लगनी शुरू हो गईं.

मैं और चाची दोनों पसीना पसीना हो गए थे.

उसी वक्त चाची ने अपनी दोनों टांगों की कैंची बनाकर मेरी कमर पर लपेट ली और बेहताशा मेरे गालों, होंठों और मेरी आंखों को चूमती रही.

चाची ने अपनी टांगें ढीली छोड़ दी, उनका शरीर भी ढीला पड़ गया.

वे मुझसे कहने लगी- राज, 2 बज गए हैं, अब बस ऐसे ही सो जाओ, मैं पूरी तरह से रज(तृप्त) गई हूँ.

मैंने भी चाची को किस किया और लंड अंदर डाले डाले उनके ऊपर ही सो गया.

सुबह जब आँख खुली तो 9 बज गए थे. मैं उसी गद्दे पर सो रहा था और चाची बिल्कुल नंगी मोंटू के पास सो रही थी.

चाची ने सुबह ही मुझसे केमिस्ट से कुछ दवाई मँगवा ली जिससे कि वो प्रेग्नेंट न हो.

तीन रात और तीन दिन में मैंने और चाची ने लगभग 10-12 चुदाई के सेशन पूरे किए. जिनमें किचन में, बाथरूम में इकट्ठे नहाते हुए, कुर्सी पर बैठकर, सोफे पर, दीवार के साथ लगाकर, एक टाँग उठाकर!

लेकिन मैंने उन तीन दिनों में चाची की गांड नहीं मारी क्योंकि वह काम न मुझे पसन्द था, न चाची को.

घर आ कर जब भी हम दोनों को मौका मिलता, मैं चाची को गिरा लेता था और चोद देता था.

चाची अधिकतर लॉन्ग स्कर्ट और साड़ी पहनने लगी थी और उन्होंने नीचे पैंटी पहननी छोड़ दी थी ताकि जल्दी में भी चुदाई की जा सके.

सरिता आँटी ने मेरी कहानी बहुत ध्यान से सुनी और मेरी हेल्प करने के लिए रश्मि चाची को दो-तीन दिन के लिए कोटा बुला लिया और ऊपर मेरे कमरे में ही उन्हें सुला दिया.

उसके बाद क्या हुआ होगा, आप खुद सोच सकते हैं.

इंडियन आंटी सेक्स कहानी पर आने विचार अवश्य लिखें कमेंट्स में!
लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दी जा रही है.

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