रीना का हनीमून – Sex Stories

रीना का हनीमून – Sex Stories

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बात कुछ साल पहले की है जब मैं एक आश्रम जा रहा था. अकसर लोगो के दिमाग में आश्रम को लेकर कई दुर्विचार होते है जैसे वो मौजमस्ती का अड्डा होता है परन्तु ऐसा कुछ भी नही है, आश्रम एक पवित्र और मन को शान्ति देने वाली जगह होती है.

मेरी नई नई शादी हुई थी. मेरी पत्नी का नाम रीना था. रीना की उम्र 22, पतली दुबली, रंग गोरा, गोल चेहरा, गुलाबी होंठ, लम्बे बाल, स्तन न तो ज्यादा बडे न ही ज्यादा छोटे, पतली कमर, सामान्य कद की आकर्षक व्यक्तित्व की मालिक थी.

मेरी शादी घर वालो की मर्जी से हुई थी. शादी से पहले मैने रीना को कभी नही देखा था, शादी वाले दिन ही पहली बार रीना को देख कर अपनी किस्मत पर फक्र हो रहा था. सुहागरात के रात काम की वजह से कमरे में जाने मे देर हो गया और मैने रीना से बात की और ये निर्णय लिया की सुहागरात हम अपने हनीमून मे ही मनाऐंगे. दो दिन के कार्यक्रम के बाद हम हनीमून के लिए निकल गये. वैसे हनीमून 5 दिन बाद का था पर मैने सोचा की 3 दिन आश्रम मे रुक जायेंगे.

आश्रम पहुंचे तो पता चला कि वहां बहुत भीड़ चल रही थी. न होटल मिल रहा था न आश्रम में जगह थी. बुरे फसे की स्थिति थी, तभी किसी ने पिछे से आवाज लगाई. मैने पिछे मुड़ कर देखा, आर्यन था. आर्यन एक 36 वर्ष का सन्यासी था और इस आश्रम मे मेरे खास परिचित मे से था, हमारे विचार काफी हद तक मिलते थे तो अच्छी दोस्ती थी. पहले जब आश्रम आता था तो अक्सर आर्यन के पास ही रुक जाता था. आश्रम के बाहर उसका एक कमरा था जिसमे अक्सर लोगो को ठहरा लेता था, इससे कुछ आमदनी हो जाती थी उसकी.

मेरे साथ रीना को देख कर उसने मुझे घुर कर देखा. मैने मुस्कुरा कर बताया कि मेरी पत्नी है तो मुझे काफी खरी खोटी सुनाई, ये पुछा कि शादी मे क्यो नही बुलाया आदि आदि. गुस्सा कम शिकायत ज्यादा थी, मैने प्यार से माफी मांगी तो मुस्कुराने लगा. फिर उसने आने का कारण पुछा तो मैने बताया कि हनीमून पर जाना था पर सोचा की रीना को कुछ दिन आश्रम घुमा कर जाऊं.

आर्यन ने मुझ से कहा कि होटल या कुछ भी मिलना मुश्किल है, मै खुद भी ये जानता था तो उसने ये सुझाव दिया कि उसके घर पर रुक जाऊं. वैसे अपनी नई नवेली दुल्हन के साथ एक मर्द के यहां रुकना ठीक तो नही लग रहा था पर हालात के हिसाब से मजबूरी थी. हम आर्यन के साथ उसके घर चल दियेम घर कुछ ज्यादा दुरी पर था पर सन्यासियों के लिये तो इतना चलना रो़ज़ की बात थी. लगभग 15 मिनट मे हम उसके घर पहुंचे.

घर पूरा कबाड़खाना था, सिर्फ मर्द रहेगे तो वैसे भी बेतर्तीब तो रहता है. एक रस्सी से कपडे़ सूख रहे थे पर कुछ कपडे़ आर्यन के नही लग रहे थे. मैने आर्यन से पुछा तो उसने बताया की गांव से उसका भतीजा अजय आया हुआ है. अजय 18 साल का लड़का था, हिष्ट पुश्ट, लम्बा. मै उस्से एक दो बार मिल चुका था और मुझे उसका नेचर बहुत अच्छा लगा था तो मैने कुछ नही कहा इस बारे में. थोडा़ अजीब लग रहा था कि हम दोनो दो मर्दो के साथ एक ही कमरे के घर में तीन दिन रहेंगे.

आर्यन ने सुझाव दिया कि हम लोग नहा कर नाश्ता कर ले, वो 2 बजे तक आश्रम से वापस आयेगा, तब तक अजय भी आ जायेगा. मैने सहमति दे दी और वो चला गया. मैने पहले खुद नहाया फिर रीना को नहाने के लिये बोला. रीना ने कपडे़ बदले और नहाने को चली, रीना ने नाईटी पहन रखी थी. जब पानी की आवाज आने लगी तो मैने जा कर दरवाजे का मुआएना किया. लकडी़ के दरवाजे मे ऊपर की तरफ एक झीर्री थी. मैने अंदर देखा तो रीना बिना कपडो़ के बदन पर साबुन लगा रही थी. पुरा बाथरूम साफ दिख रहा था.

मैने निर्णय लिया कि जब आर्यन या अजय घर पर होंगे तब हम नही नहाएंगे. होने के लिए दोनो सन्यासी है पर कोई रिस्क नही लेना चाहिए. नहाने के बाद रीना नाईटी पहन कर बाहर आ गई. उसके निप्पल नाईटी पर साफ झलक रहे थे. मैने उससे पुछा कि वो ब्रा नही पहनी है क्या? उसने शरमाते हुए बताया कि वो जब साडी़ पहनेगी तब ब्रा पहन लेगी. मैने कुछ नही कहा बस मुस्कुरा दिया.

नहाने के बाद मैने खाने के बारे मे पुछा तो उसने सहमति जताई. मैने उसे बताया कि खाना लेने कुछ दूर जाना पडे़गा और क्या वो अकेले रह लेगी. वैसे तो वो इतनी हिम्मत वाली नही थी फिर भी उसने बडे़ आराम से कहा कि वो रह लेगी. मैने उसे बताया कि मुझे 30 मिनट लग जायेंगे. उसे दरवाजा अंदर से बंद करने को कह कर मै खाना लेने निकल पडा़. आस पास की दुकाने बंद थी तो वापस आते आते 40 मिनट हो गये.

जैसे ही घर के दरवाजे पर पहुंचा तो अंदर से किसी मर्द की आवाज सुनाई दे रही थी. मैने सोचा की इस वक्त अंदर कौन हो सकता है इसलिए दरवाजे के एक झिर्री से अंदर झांक कर देखा. अंदर अजय था और वो रीना से बात कर रहा था,उसने रीना को बताया कि आश्रम मे कुछ जरूरी काम है इसलिए वो जल्दी आ गया, बस नहा कर निकल जायेगा. फिर वो मेरे बारे में पुछने लगा, रीना ने उसे बताया की मै खाना लेने गया हूं. इतनी बात के बाद वो अंदर घुस गया

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मुझे किसी ने पीछे से आवाज दी. आटो वाला था, हड़बडी़ मे उसको किराया देना भूल गया था. मैने उसको किराया दिया और दरवाजा खटखटाने के लिए हाथ बढा़या तो फिर अजय की आवाज सुनाई दी. वो रीना को आवाज लगा रहा था कि वो टावेल ले जाना भूल गया है और वो उसे टावेल दे दे. उत्सुक्तावश मैने झिर्री से अंदर झांक कर देखा तो रीना टावेल लिये बाथरूम के गेट पर खडी़ थी उसने अजय को आवाज लगाई कि वो टावेल ले ले.

अचानक अजय ने बाथरूम का पूरा दरवाजा खोल दिया, वो एक दम नंगा खडा़ था. मैं और रीना दोनो भौचक्के रह गये. अजय ने टावेल के साथ रीना का हाथ पकड़ कर रीना को बाथरूम के अंदर खींच लिया. ये सब इतना अचानक हुआ कि कुछ रिस्पांस करने का समय ही नही मिला. मुझे लगा की 2 मिनट मे रीना चिल्लाते हुए बाहर आ जायेगी पर वो काफी देर बाहर नही आई तो मुझे डर सताने लगा.

मैने दरवाजे पर दस्तक दी, कोई आवाज नही आई तो मैने फिर दस्तक दी. इस बार अजय ने पुछा की कौन है. मैने अपना नाम लेकर बताया और दरवाजा खोलने को कहा. उसने कहा दो मिनट तो मैने फिर झिर्री से झांका. अजय ने दरवाजा खोला और रीना की नाईटी लेकर बाहर निकला और एक तरफ मुड़ गया.

दरवाजा पुरा खुला हुआ था और रीना बिना कपडो़ के एक कोने में उकडु़ बैठी थी. उसने अपने स्तन अपने जाघो मे छुपा रखा था. थोडी़ देर में अजय दिखा वो नाईटी सुखा रहा था और रीना की साडी़ ब्लाऊज लेकर बाथरूम मे चला गया. फिर उसने जल्दी जल्दी बदन पर साबुन लगाया और टावेल लपेट कर बाथरूम से निकला, निकलते हुए उसने बाथरूम का दरवाजा टिका दिया. कुछ रुक कर उसने दरवाजा खोला. मै अंदर गया और बिस्तर पर बैठ गया.

मैने रीना के बारे मे पुछा तो उसने बताया की क्योकि मुझे देर हो रही थी इसलिए वो घबरा गई थी और मुझे बाहर धुंधने गई है. मै जानता था कि वो झुठ बोल रहा था पर क्या करूं कुछ समझ नही आ रहा था. अजय ने मुझसे कहा कि मै बैठ कर रीना का इंतजार करू और वो नहा कर आ रहा है. मेरे कुछ बोलने से पहले ही वो बाथरूम मे घुस चुका था और बाथरूम का दरवाजा बंद कर चुका था.

मै अपने होशोहवास खो चुका था, मेरी नई नवेली दुल्हन बिना कपडो़ के अपने से काफी कम उमर के लड़के के साथ बाथरूम मे बंद थी और ये जानते हुए कि मै कमरे मे हूं चिल्ला नही रही थी. शायद एक लड़के के साथ इस स्थिति मे पकडे़ जाने का डर और शर्म ने उसे चुप रहने पर मजबूर कर दिया था,या शायद अजय ने डराया धमकाया होगा.

मैं बहुत उत्सुक था ये जानने के लिए कि अंदर हो क्या रहा है. इसलिए दबे पांव मै बाथरूम के दरवाजे तक गया और झिर्री से अंदर झांक कर देखने लगा. अजय ने रीना को बाजू से पकड़ कर उठाया और चुप रहने का इशारा किया. रीना की नजरे निचे कि ओर थी और वो धीरे धीरे खडी़ हो गई. रीना का पुरा बदन थर थर कांप रहा था और पुरे बदन पर पसीना आ रहा था. अजय ने उसे दीवार से सटाया और उसके ऊपर उसका सीना रीना के स्तनो को दबा रहा था. उसने रीना की पीठ पर हाथ ले जाकर उसे बांहो मे जकडा़ और उसके गालो को चुमने लगा.

रीना उससे बचने के लिए अपना सर इधर उधर करने लगी पर नाकाम रही. कुछ देर के बाद उसने रीना के होंठो को चुमने की कोशिश करने लगा. रीना आवाज तो नहीं कर रही थी पर अपना सर इधर उधर कर रही थी जिसके कारण वो उसके होंठो को चुम नही पा रहा था. उसने एक हाथ से रीना का चेहरा पकडा़ और उसके होंठो से अपने होंठ चिपका दिये. पुरी तन्मयता से वो रीना के होंठो का स्वाद लेने लगा. क्योकि रीना दरवाजे से 90 अंश के कोण पर खडी़ थी इसलिए रीना का बांया और अजय का दांया तरफ झिर्री की तरफ था.

मैं अंदर से जल रहा था, जलन, गुस्सा, चिढ़, दुख और कुछ न कर पाने की मजबूरी मुझे अंदर से अजीब सा एहसास दे रही थी. दिमाग में यही चल रहा था कि कैसे अपनी पत्नी कि कौमार्य कि रक्षा करूं. मैने दरवाजा खटखटा कर कहा “अजय, जल्दी बाहर निकलो, मुझे भी अन्दर जाना है!” अजय ने रीना के होंठो को छोडा़ और गालो को चुम कर कहा, “पांच मिनट मेरे भाई, मुझे बस पांच मिनट लगेगा.” अब पांच मिनट कुछ बोल ही नही सकता था.

अजय ने रीना के होंठो को छोड़ कर थोडा़ नीचे झुका, और रीना के निप्पल को चुसने लगा. बीच बीच में वो रीना के स्तनो को मसल भी रहा था. 2–3 मिनट तक रीना के स्तनो को मसलने के बाद वो खडा़ हुआ तो रीना ने हाथ जोड़ कर उसे कहा, “प्लीज, मुझे छोड़ दो, मुझे बरबाद मत करो.” वैसे रीना ने इतने धीरे कहा था कि आवाज सिर्फ अजय को सुनाई दे पर होंठो के हिलने के अंदाज से पता चल रहा था कि वो क्या बोल रही है.

अजय ने आंखे निकाल कर कहा, “साली कुतिया! मुंह बंद कर, वर्ना इतने बेरहमी से चोदुंगा कि चीखने लगोगी, तेरे मियां के पता चल जायेगा वो अलग, कुछ नहीं बोला तो ठीक वरना तेरे मियां को यही काट कर गाड़ दुंगा, और तेरे को तब तक अपनी रखेल बना कर रखुंगा जब तक तेरे जिस्म से मेरा दिल नही भर जाता, फिर तुझे किसी कोठे पर बेच दुंगा. इसलिए अपना मुंह बंद रख और ज्यादा नौटंकी मत कर.” डर रीना के चेहरे पर साफ झलक रहा था,

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डर तो अजय के शब्दो से मुझे भी लग रहा था. अजय कसरती बदन का था, मुझसे उंचा भी था, मै किसी भी तरीके से उससे नही लड़ सकता था और अगर वो सच बोल रहा था ये सोच कर भी मेरी सांस रुकने लग रही थी. पर फिर भी रीना को किसी न किसी तरीके से बचाना ही था तो कोशिश तो करना ही था.

मैने फिर से दरवाजा खटखटाया, “अजय पांच मिनट हो गये!” अजय ने फिर चिल्ला कर कहा, “पांच मिनट और भाई.” मुझे फिर पांच मिनट के लिये खामोश होना पडा़. अजय ने हाथ फिराते हुए हाथ रीना के योनि तक ले गया और एक उंगली रीना कि योनि मे डाल दिया. रीना ने चुहंक कर अपना सर पिछे कि तरफ फेंका और कुछ उपर की तरफ उछली. थोडा़ विराम देने के बाद अजय ने फिर उंगली रीना कि योनि मे अंदर की तरफ घुसाया. रीना चुहंकी तो नही पर अपना सर पिछे कि तरफ फेंका और कुछ उपर की तरफ उछली. थोडा़ थोडा़ विराम दे कर अजय यही हरकत दुहराता रहा.

रीना की शरीर में एंठन साफ दिख रहा था. लगभग तीन मिनट में रीना ने योनि रस छोड़ दिया. कुछ पल का विराम देने के बाद अजय ने रीना के सारे शरीर पर हाथ फेरा और उसे कंधो से दबा कर घुटनो के बल बैठा दिया. उसने अपना लॅंड का छोर रीना के होंठो पर रख कर दबाव डाला. लॅंड रीना के मुंह मे चला गया और रीना की सांसे रुकने लगी. उसका लॅंड बहुत मोटा और लम्बा था. वो रीना को मुख मैथुन करने को कह रहा था पर रीना इससे अंजान थी तो उसने खुद ही लॅंड अंदर बाहर करने लगा.

अपने हाथो से उसने रीना के स्तन पकड़ रखे थे और वो उसे जोर जोर से मसल रहा था. मैने फिर से दरवाजा खटखटाया पर अजय ने कोई जवाब नही दिया. चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो जवाब देने कि स्थिति मे नही था. उसे बहुत मजा आ रहा था और ये चेहरे पर साफ झलक रहा था. मैने दो तीन बार और दरवाजा खटखटाया पर अजय ने कोई जवाब नही दिया. कुछ ही देर में अजय ने रीना का सर बालो से पकड़ लिया और अचानक ही उसके शरीर की एंठन शांत हो गई. उसने अपने बीज रीना के मुंह मे ही छोड़ दिया था. उसके अलग हटते ही रीना ने सारा वीर्य एक तरफ उगल दिया.

मैने फिर से दरवाजा खटखटाया, वो अपना लॅंड सहलाने मे व्यस्त था. लॅंड फिर से आकार लेने लगा. वो रीना के साथ जो कर चुका था वो तो कुछ नही था उसके सामने जो वो करने कि तैयारी कर रहा था. मैने इस बार जोर से कई बार दरवाजा खटखटाया. अजय ने एक झटके से दरवाजा खोला और गुर्राते हुए मेरा कॉलर पकड़ लिया.

मुझे लगभग झंझोड़ते हुए कहने लगा, “सुनो मियां, मुझे और 30 मिनट या ज्यादा अंदर लग सकता है, क्योकि मै अपने हिसाब से नहाता हूं, कोई मुझे नहाते हुए डिस्टर्ब करता है तो मै उसका मुंह तोड़ देता हूं. तो अगर तुमको बाथरूम मे काम है तो गली के मोड़ पर सार्वजनिक शौचालय में चले जाओ. खबरदार जो मुझे डिस्टर्ब किया वरना बाहर आकर तुम्हारा मुंह तोड़ दुंगा. समझा!” मैने सहमति मे सर हिला दिया और उसने धर से दरवाजा बंद कर दिया. अब दरवाजा खटखटाने का तो प्रशन ही नही उठता था तो मैने झिर्री में आंख गडा़ दी.

अजय ने रीना के कंधे को दबाते हुए उसे ज़मीन पर चित लिटा दिया और उसकी टांगे चौडी़ कर दी. उसकी योनि द्वार से गुलाबी फांक साफ दिख रही थी. और गीलापन भी झलक रहा था. अजय रीना के ऊपर लेट गया और कुछ देर तक उसके होंठो और गले को चुमता रहा. फिर उसने अपने लॅंड को उसके योनि पर रखा और रीना के मुंह पर अपने हाथ का ढक्कन फिट कर दिया. अगले ही पल मेरी दुख का बांध फूट गया, एक झटके से उसने अपना लॅंड रीना के योनि मे प्रविष्ट कर दिया.

रीना की आंखे कटोरो से बाहर आने लगी और वो अपना पैर फेंकने लगी. अगर रीना के मुंह पर अपने हाथ का ढक्कन फिट न किया होता तो रीना चीख पडी़ होती. रीना का कौमार्य भंग हो गया था. अजय कुछ देर तक स्थिर रहा जब तक रीना ने अपने हाथ पैर झटकने बंड नही किये. फिर उसने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किया. जब रीना पुरी तरह से स्थिर हो गई तो उसने रीना के मुंह पर अपने हाथ हटा लिया. धीरे धीरे धक्के होने लगे. जब धक्के लगा कर थक जाता था तो थोडी़ देर रुक कर रीना के होंठ चुमता था और स्तनो को मसलता था. आराम करके फिर धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर देता था. लगभग १५ मिनट बाद उसका शरीर एंठ गया और चेहरे के भाव से पता चल रहा था की वो अपना बीज अंदर ही छोड़ रहा था. फिर उसने अपना लॅंड बाहर खींचा. लॅंड वीर्य से और खून से सना हुआ था. थोडा़ अलग हट कर अजय नहाने लगा और रीना उकडू़ होकर बैठ गई.

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तभी पिछे से दरवाजा खुलने कि आवाज आई तो मैं झट से बिस्तर पर बैठ गया. दरवाजे पर आर्यन था और वो अंदर आ गया. उसने रीना कि बारे में पुछा तो मैने कहा ही वो पास ही घुमने गई है. उसने बताया कि उसे वापस आश्रम जाना है और वो नहाने आया था. उसने अजय के बारे मे पुछा आउर बाथरूम की तरफ जाकर अजय को आवाज दी. फिर वो दोनो पंजाबी में बात करने लगे. दो मिनट मे आर्यन टावेल लपेट कर बाथरूम के सामने खडा़ था. मै उसे बाथरूम में घुसने से कैसे रोकुं यही सोच रहा था कि अजय गेट खोल कर बाहर आ गया. वो पुरी तरह तैयार था इसलिए सीधे बाहर चला गया और मेरे कुछ बोलने से पहले ही आर्यन अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर लिया.

मैं अपनी उत्सुक्ता दबा नही पाया और झिर्री से अंदर झांकने लगा. आर्यन ने जैसे ही पलट कर देखा तो रीना को बिना कपडो़ के उक्कडू़ बैठे पाया. उसने इशारे से उसे उठने को कहा और उसी दीवार से उसे टिका कर खडा़ कर दिया जिस दीवार से अजय ने रीना को टिका कर खडा़ किया था. हालाकि दोनो इतने धीरे बोल रहे थे कि बाहर आवाज़ न आये पर होंठो के हिलने से पता चल रहा था कि दोनो क्या बात कर रहे हैं!

आर्यन ने कहा, “अभी तो अजय बाहर निकला है, तुम क्या कर रही थी अजय से साथ अंदर?” रीना ने नजरे झुका कर कहा, “अजय ने मुझे जबरदस्ती अंदर खींच लिया था.” आर्यन ने पुछा, “तुम्हारा पति कहा था उस टाईम?” रीना ने कहा, “वो बाहर गये थे खाना लेने, अजय नहाने आया था, नहाने के लिए अंदर घुसा और मुझसे टावेल मांगा, मै टावेल देने आई तो मुझे अंदर खींच लिया.”

आर्यन ने कहा, “बहुत कमीना है, है मेरा रिश्तेदार पर बहुत कमीना.” आर्यन ने फिर पुछा, “तुम्हारे पति को पता है कि तुम अंदर हो?”

रीना ने न मे सर हिलाया. आर्यन ने फिर पुछा, “क्या क्या किया अजय ने, सिर्फ ऊपर ऊपर मज़ा लिया या सब कुछ कर लिया?”

रीना की नजरे झुकी हुई थी, वो थोडी़ देर रुक कर बोली, “सब कुछ कर लिया.”

आर्यन थोडी़ देर रुक कर बोला, “तुम चिल्लाई क्यो नही.”

रीना ने कहा, “उसने मुझे धमकी दी थी, मैं डर गई थी.”

आर्यन ने पुछा, “तुम्हे मालूम है कि तुम्हारा पति बाहर ही बैठा है.”

रीना ने सहमति में सर हिलाया. आर्यन ने आगे कहा, “अब जो हो गया सो हो गया, तुम अपने पति को कुछ मत बताना, मै उसे बाहर ले जाऊंगा और कह दुंगा कि तुम मेरे साथ आश्रम गई थी.”

रीना ने कहा, “आपका बहुत बहुत धन्यवाद, आपने मेरी परेशानी आसान कर दी, पता नही मैं आपका कर्ज़ कैसे चुकाऊंगी.”

मेरे खुद के नजर मे आर्यन की इज्जत बढ़ गई थी पर अगले ही पल उतर भी गई. आर्यन ने अपने दोनो हाथो से रीना के दोनो स्तन थाम लिया और उन्हे सहलाने और मसलने लगा. उसने कहा, “एहसान का बदला तो अभी ही वसूल लुंगा, जो अजय करके निकला है मै भी वही कर लेता हूं.”

रीना कुछ कहना चाहती थी उससे पहले ही आर्यन ने कहा, “एक बार तो अजय सब कर चुका है, मै भी कर लुंगा तो तुम्हारा कुछ नही जाएगा.”

रीना ने उसे स्तनो से खेलने से रोका तो नही पर एक सवाल पुछा, “अभी तो आप अजय को गालियां दे रहे थे, आप भी तो वही कर रहे हैं.”

आर्यन ने रीना के होंठो को चुमा और मुस्कुरा कर कहा, “अजय तुम्हे मुसीबत में डाल कर गया है और मै तुम्हे मुसीबत से निकाल रहा हूं, इतना तो अंतर है ही. पर अगर तुम्हे परेशानी है तो चलो बाहर चलते है और मैं तुम्हारी तुम्हारे पति से आमना सामना करवा देता हूं.”

एक डर की लहर रीना के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी, उसने थोडा़ रुक कर कहा, “नही! मुझे कोई परेशानी नही है, आप कुछ भी कर सकते है, मुझे सब शर्ते मजूंर है, पर अजय तो कोई नहीं लगता उनका पर आप तो उनके दोस्त हैं आपको भी तो दिक्कत होगी अगर उनको पता चल जाए.”

आर्यन ने कहा, “मानता हूं अजय कमीना है, पर मैं भी कम नही हूं, अगर तेरे पति मुझसे उलझेगा तो मै भी वही करूंगा जो अजय कर सकता है. तुझे जी भर के नोचुंगा और फिर कोठे पर नुचवाने के लिए छोड़ दुंगा.”

मैने चुप रहने में ही भलाई समझी, आर्यन जोर जोर से रीना के स्तनो को मसलने लगा. दर्द की लहर रीना के चेहरे पर दिख रही थी पर आवाज मुंह से नही निकल रहा था. संतुष्ट होने के बाद आर्यन रीना के निप्पल चुसने लगा, बारी बारी से एक एक निप्पल को आराम से चुसता रहा पर बीच बीच मे रीना के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो निप्पल को चबा भी रहा था. संतुष्ट होने के बाद उसने रीना के होंठो को चुमना शुरू किया और साथ ही रीना के योनि में भी उंगली डाल दी.

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