वो हसीन पल-4

वो हसीन पल-4

उन्होंने कहा- प्लीज ये कॉन्डोम निकाल देता हूँ बिल्कुल मजा नहीं आ रहा है।
मैंने मना किया, पर कुछ देर के सम्भोग में लगने लगा कि वो पूरे मन से नहीं कर रहे हैं।
फिर उन्होंने मुझसे कहा- कॉन्डोम निकाल देता हूँ जब स्खलन होने लगूंगा तो लिंग बाहर निकाल लूँगा।
मैंने उनसे पूछा- क्या खुद पर इतना नियंत्रण कर सकते हो?
तो उन्होंने मुझसे कहा- भरोसा करो.. मैं तुम्हें कभी कोई परेशानी में नहीं डालूँगा।

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मैंने उन पर भरोसा किया और उन्होंने अपना लिंग बाहर निकाल कर कॉन्डोम हटा दिया फिर दुबारा अन्दर डाल कर सम्भोग करने लगे।
अब ऐसा लग रहा था जैसे वो खुश हैं और धक्के भी जोर-जोर से लगा रहे थे। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। हम करीब 2-3 बार आसन बदल कर सम्भोग करते रहे, इस बीच मैं झड़ गई।

फिर जब अमर झड़ने वाले थे, तो मुझसे कहा- मैं झड़ने को हूँ, तुम हाथ से हिला कर मेरी मदद करो।
फिर उन्होंने लिंग को बाहर खींच लिया, मैं हाथ से उनके लिंग को आगे-पीछे करने लगी और वो झड़ गए। उनके लिंग से वीर्य तेज़ी से निकला और मेरे पेट पर गिर गया कुछ बूँदें मेरे स्तनों और गले में लग गईं। वो मेरे बगल में लेट गए।

मैंने खुद को साफ़ किया। फिर बगल में उनकी तरफ चेहरे को कर लेट गई। उन्होंने मेरी एक टांग को अपने ऊपर रख कर, मेरे कूल्हों पर हाथ फेरते हुए कहा- तुम्हें मजा आया या नहीं?
मैंने जवाब दिया, “बहुत मजा आया, पर मुझे डर लगा रहा था कहीं आप मेरे अन्दर झड़ गए तो मुसीबत हो सकती थी।”

तब अमर ने कहा- मैं इतना नादान नहीं हूँ जो तुम्हें इस तरह की मुसीबत में डाल दूँ और मेरे माथे को चूम लिया। तब मुझे बड़ा सुकून सा महसूस हुआ और मैंने पूछा- आज ऐसे कपड़े मुझे पहनाने की क्या सूझी..?
तब उन्होंने मुझे बताया, “मैंने तुम्हें हमेशा साड़ी या फिर सलवार कमीज में देखा था, मेरे दिल में ख़याल आया कि तुम जब 20-21 की होगी और नए ज़माने के कपड़े पहनती होगी तो कैसी लगती होगी, जैसे कि जीन्स, शर्ट आदि। फिर मैंने सोचा कि तुम उस वक़्त कैसी दिखती होगी जब तुम 15-16 साल की होगी और स्कूल जाया करती होगी। स्कर्ट और शर्ट में, तो मैंने तुम्हें उस लिबास में देखने की सोची इसलिए ये कपड़े लाया।

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फिर मैंने पूछा- तो पैन्टी और ब्रा क्यों लाए साथ में?
उन्होंने कहा- तुम अभी भी पुराने वाले पहन रही हो, तो सोचा नया खरीद दूँ, मुझे लगा कि तुम इस टाइप के ब्रा और पैंटी में और भी सुन्दर और सेक्सी लगोगी और सच बताऊँ तो तुम इतनी सुन्दर और सेक्सी लग रही थी कि अगर कोई तुम्हें देख लेता ऐसे तो, देह शोषण कर देता तुम्हारा…!
और हँसने लगा।

मैंने तब पूछा- तुम्हें भी मेरा देह शोषण करने की मन हो रहा था क्या…?
उसने हँसते हुए कहा- हाँ.. एक बार तो ख्याल आया, पर तुम तो वैसे ही मेरे लिए ही आई हो, मुझे देह शोषण करने जरूरत क्या है।
फिर मैंने ब्लू-फिल्म के बारे में पूछा।
उसने कहा- तुम ज्यादातर सामने शर्माती हो सोचा शायद फिल्म देख कर पूरी तरह खुल जाओ इसलिए दिखाया।
फिर उसने मुझसे पूछा- तुम्हें कौन सा दृश्य सबसे उत्तेजक लगा?
मैंने कहा- मेरे लिए तो सभी उत्तेजक ही थे मैंने पहली बार ऐसी फिल्म देखी है।

बातें करते-करते हमने एक-दूसरे को फिर से सहलाना और प्यार करना शुरू कर दिया, हमारे जिस्म फिर से गर्म होने लगे। उसने मुझसे कहा- फिल्म में जैसे दृश्य हैं वैसे कोशिश करते हैं..!
मैंने भी जोश में ‘हाँ’ कह दिया।
हालांकि कुछ पोजीशन तो ठीक थे, पर ज्यादातर मुमकिन नहीं था फिर भी अमर के कहने पर मैंने कोशिश की। हमने एक-दूसरे को अंगों को प्यार करना शुरू कर दिया, मैंने उसनके लिंग को प्यार किया और वो सख्त हो गया और मेरी योनि से मिलने को तड़पने लगा। मैं भी अपनी अधूरी प्यास लिए थी सो मैं अमर के ऊपर चढ़ गई। अमर ने लिंग को मेरी योनि के मुख पर लगा दिया और मैंने नीचे की और दबाव दिया लिंग मेरी योनि में ‘चप’ से घुस गया।
मेरी योनि में पहले से अमर की पूर्व की चुदाई का रस भरा था और मैं खुद भी गर्म हो गई थी सो योनि पूरी तरह गीली हो गई थी, सो मुझे धक्के लगाने में बहुत मजा आ रहा था।
अमर ने मेरी कमर पकड़े हुए था। मैंने झुक कर एक स्तन को उसके मुँह में लगा दिया और वो उसे चूसने लगा। मैं जोरों से धक्के लगाने लगी। अमर भी बीच-बीच में नीचे से झटके देता, और तब उनका लिंग मेरे बच्चेदानी तक चला जाता और मैं जोश में अपने कमर को नचाने लगती। हम काफी गर्म जोशी से सम्भोग करते रहे फिर उसने मुझे नीचे लिटा दिया और कमर के नीचे तकिया रखा और धक्के लगाने लगा। उनके धक्कों से मैं कुहक जाती हर बार मेरे मुँह से मादक सिसकियां निकलने लगीं और मैं झड़ गई। पर अमर अभी भी धक्के पे धक्के लगा रहा था।

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मेर झड़ने के करीब 4-6 मिनट बाद वो भी झड़ गए और मेरे ऊपर निढाल हो गए। वो हाँफते हुए मेरे ऊपर लेटे रहे, मैंने उनके सर को सहलाना शुरू कर दिया वो चुपचाप थे। कुछ देर बाद मैंने उनको आवाज दी, पर उन्होंने नहीं सुना, मैंने देखा कि वो सो गए थे। मैंने थका हुआ सोच कर उनको अपने ऊपर ही सोने दिया। ये सोच कर खुद जब करवट लेंगे मुझसे अलग हो जायेंगे।
मैं उनके सर के बालों को सहलाती हुई सोचने लगी कि मैं इनके साथ क्या-क्या कर रही हूँ जो मैंने कभी सोचा नहीं था। सम्भोग अब खेल सा बन गया था, एक-दूसरे को तड़पाने और फिर मिलने का मजा। यही सोचते-सोचते पता नहीं मैं कब सो गई पता ही नहीं चला। जब मेरी आँख खुली तो देखा 2.30 बज रहे थे और अमर अभी भी मेरे ऊपर सोया हुआ है।

मैंने सोचा कि सुबह होने वाली है इसलिए इसे उठा कर जाने के लिए बोलूँ, सो मैंने उसे आवाज दी और वो उठ गया पर उसके उठने पर मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ, उसका लिंग अभी तक मेरी योनि के अन्दर ही था। मैं मन ही मन हँस दी और फिर बाथरूम चली गई। वापस आई तो हमने दुबारा सम्भोग किया फिर अमर को चले जाने को कहा।
इसी तरह 15 दिन बीत गए हमें, रोज सम्भोग करते हुए, इन 15 दिनों में हमने कोई कोई दिन 7 बार तक सम्भोग किया।
इन दिनों में मैंने पाया कि मर्द शुरू में जल्दी झड़ जाते हैं पर उसके बाद हर बार काफी समय लगता है फिर से झड़ने में और औरतों का ठीक उल्टा होता है उन्हें शुरू में थोड़ा समय लगता है गर्म होने और झड़ने में पर अगली बार जल्दी झड़ जाती हैं।
मुझे शुरू में लगा कि शायद ऐसा मेरे साथ ही होता है पर कई किताबों से और फिर मेरी सहेलियाँ सुधा और हेमलता से पता चला कि सभी औरतों के साथ ऐसा होता है।
मेरी कहानियाँ मेरे जीवन के अनुभव पर आधारित हैं, आप सभी पाठकों को कैसा लगा मुझे जरुर बताइए..!
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