डायन के साथ सम्भोग का सुख मेरे लिए मुसीबत बना

डायन के साथ सम्भोग का सुख मेरे लिए मुसीबत बना

दोस्तों आज मैं आप को एक डरावनी सेक्स कहानी सुना रहा हूँ, उम्मीद है आप लोगो को ये कहानी जरूर पसंद आएगी। मेरा नाम नकुल है, मैं मध्यप्रदेश के छोटे से गांव का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 38 साल है, मेरी कहानी उस समय की है जब मैं 18 साल का जवान और सरारती लड़का था। ठण्ड के समय हमारे गांव में रात को आग जला कर जवान और बुड्ढे दादा ताऊ सब साथ बैठते थे, वो लोग कभी कभी भूतों की कहानी सुनाते थे जिसे सुन कर हमारा डर से बुरा हाल होता था और पास अन्धेले में मूतने जाने से भी डर लगता था।  मुझे हमेसा से भूतों की कहानी सुन कर मजा आता था, एक बार बूढ़े दादा ने बताया डायन के हवस के बारे में। डायन किसी को भी अपनी सुंदरता से सम्मोहित कर लेती है और उसे सम्भोग का ऐसा आनंद देती है जिसके लिए आदमी उसका गुलाम बन जाने को तैयार रहता है। दादा बताये डायन के पैर उलटे होते है, उसकी चोटी लम्बी होती है। चोटी में उसका जादू छिपा होता है अगर किसी डायन की चोटी काट दी जाये तो उसकी पूरी सक्ती ख़तम हो जाती है।

मैं कहानी सुन का थोड़ा डर गया लेकिन मेरे अंदर सम्भोग का सबसे बड़ा सुख भोगने की प्यास जाग गयी थी। मैं अपने गांव की एक लड़की को पटा कर बहोत चुदाई किया हूँ, लेकिन डायन को चोदने का मजा मुझे लेना था, ऐसे कुछ साल निकल गए और मैं ये सब भूल गया। 3 साल बाद मैं पास के गांव में नौकरी करने लगा, मुझे एक मील में काम मिला जहा मुझे धान तेल और आटा चक्की चलाने का काम मिला था। गर्मी के दिन थे लोग देर रात तक धान ले कर आते थे, मालिक ने मुझे रात को काम करने के लिए बोला हुआ था। मैं धान की कुटाई करने के बाद मील बंद करके अपने गांव के लिए रवाना हुआ। आप ये स्टोरी इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। रात के 2 बज रहे थे, मैं साइकिल से आता जाता था इसलिए मुझे 40 -45 मिनट लगजाते थे। दोनों गांव के बीच घना जंगल है, हमेशा जंगली जानवरों का डर लगा रहता था। मैं साइकिल पर बैठा फुल स्पीड से गाना गुनगुनाते हुई चला जा रहा था। चांदनी रात थी आसमान के चाँद और तारों की रौशनी से सड़क दिखाई दे रहता मेरे पास टोर्च नहीं था और उस समय मोबाइल भी नहीं आया था।

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कुछ दूर जा कर मेरे साइकिल की चैन उतर गयी मैं साइकिल की चैन चढ़ा कर जैसे आगे बढ़ा मुझे एक औरत दिखाई दी, मैं उसके पास जा कर रुक गया। वो औरत चांदनी रात में हल्का घूँघट किये हुई थी, उसके पास से मन मोहने वाली खुसबू आ रही थी। ऐसे खुसबू जिसका कोई भी दीवाना हो जाये। मैं उस औरत से पूछा कहा जा रही हो ? वो चुप रही कुछ नहीं बोली। मैं दोबारा पूछा – कहा जा रही हो जी चलो मैं छोड़ देता हूँ ? वो धीरे से बोली मेरा घर यही पास में है, हमारी बकरी रस्सी तोड़ कर भाग गयी है उसको ढूंढ रही थी। मैं पूछा – लेकिन तुम औरत हो कर अकेले इतने रात को यहाँ ? घर में कोई आदमी नहीं है क्या ? वो बोली – नहीं मेरे पिता और भाई दूर गांव बैल खरीदने गए है अभी तक आये नहीं सायद सुबह आएंगे।

मैं उसकी बातों को सुन रहा था और उसके सरीर से आती मन मोहक खुसबू से मेरे अंदर उत्तेजना जाग गयी, मैं उस औरत को चोदने की सोच ने लगा। चांदनी रात में उस औरत का सरीर जितना दिख रहा था मैं उसमे ही उसका दीवाना हो गया था। ऐसी खूबसूरती मैंने कही नहीं देखी थी। टीवी की हेरोइन भी फ़ैल थी इस औरत के सामने। वो मुझे देख कर सरमा रही थी और हंस रही थी, मैं समझ गया लड़की पट गयी है। मैं उसको बोला ठीक है चलो मैं बकरी ढूंढ देता हूँ और मैं साइकिल वही खड़ा कर के उसके साथ जंगल में चला गया। वो मेरे आगे थी उसकी मटकती कमर और हिलते हुए गांड मेरे अंदर आग लगा रहे थे। मेरा लंड खड़ा हो गया था, वो औरत देखने से 26 – 27 साल की लग रही थी, उभरे हुए स्तन, पतली कमर और बड़े मटकते हुए गांड, उस औरत को देख कर मेरे मन में यही ख्याल आ रहा था इसकी तो पाद से भी खुसबू आती होगी।

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मैं उसको चोदने के लिए बेक़रार था, मैं पीछे से जाकर कमर पकड़ कर अपने लंड को उसकी गांड की छेद से लगा कर एक चक्कर घुमा दिया। उसकी बदन की खुसबू सूंघते हुए उसकी गर्दन चाटने लगा। वो बोली अरे बाबूजी क्या कर रहे है ? आओ मेरे घर चलो मैं उसको छोड दिया और उसके पीछे पीछे चला गया। वो थोड़ी दूर जा कर रुक गयी और बोली आओ बाबूजी घर आ गया। वहाँ एक छोटी सी झोपड़ी थी। मैं उसके साथ अंदर गया लालटेन की रौशनी थी मुझे उसका चेहरा ठीक से दिखाई दिया, उसको देख कर मेरे पैर के निचे से जमीं सरक गयी। वो औरत दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत थी। मैं इसी सोच में पड़ गया एक गरीब के घर ये किसी अप्सरा जैसे लड़की कैसे ?
लेकिन एक खूबसूरत कामुक औरत को चोदने के ख्याल से मेरा दिमाग सुन्न पड़ गया था। मैं जल्दी से उसको पकड़ कर पास पड़े बिस्तर पर लेटा दिया और उसे ऊपर चढ़ कर उसके ओंठ चूसने लगा। उसके ओंठ गुलाब की तरह गुलाबी और सहद की तरह रसीले थे, उसकी सांसों की खुसबू मुझे बेक़रार कर रही थी मैं उसके मुँह में अपना जीभ डाल कर चाटने लगा और पूरा रस चूसने लगा वो मुझे कंधे से पकड़ कर अपने ऊपर खींचे हुई थी। 
मेरा लंड मेरी देसी कच्छी फाड़ कर बाहर आने के लिए बेक़रार था। मैं उसका ब्लाउज खोल दिया और जैसे उसके दोनों चूचियाँ आजाद हुई, मेरे आँखों में चमक और मुँह से लार टपकने लगा, उसके दोनों बूब्स गोल कड़क जोश से फुले हुए और गुलाबी निप्पल थे, मैं झट से उसके आम जैसे सुन्दर निप्पल मुँह में भर कर चूसने लगा दोनों निप्पल चूस चूस कर मेरा सरीर जोश से कापने लगा। मैं उसके दोनों चूचियां मसल रहा था। उसकी चूचियां किसी मुलायम रुई की तरह थे, मैं जल्दी से अपना कपड़ा उतार कर नंगा हो गया वो मुझे देख कर शर्मा गयी और आँखे चुराने लगी।

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