मॉल में मिला चुदाई का माल

मॉल में मिला चुदाई का माल

प्रेम लवर बॉय
हाय दोस्तो, मेरा नाम प्रेम है। आपकी तरह मैं भी अन्तर्वासना का पाठक हूँ और ढेर सारी कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे भी ऐसा लगा कि मैं भी अपने साथ घटी कामुक घटना को आपके साथ साझा करूँ।
पहले मैं आपको अपने बारे में बताता हूँ, मैं पुणे का रहने वाला हूँ। मेरा कद 5 फुट 5 इंच लम्बा है, डिप्लोमा के तीसरे वर्ष में पढ़ रहा हूँ। मेरा रंग गोरा है और दिखने में आकर्षक हूँ।
यह बात उन दिनों की है, जब मैं अपनी पढ़ाई के दूसरे वर्ष में था और बारिश का मौसम था, आसमान में बादल छाये हुए थे, मम्मी-पापा दूसरे शहर गए हुए थे, तो मैं अपने दोस्तों के साथ एक मॉल में गया था।
मॉल के अन्दर हमने खूब मस्ती की। उस वक़्त एक लड़की मुझे बार-बार देख रही थी। मैं उसे नजर-अंदाज करते हुए वहाँ से चला गया और घर जाने के लिए निकल आया।
मैं रात के 11.30 बजे घर को लौट रहा था। बारिश का मौसम था और बारिश भी शुरू हो गई थी तो ऑटो का मिलना मुश्किल था। इतने में एक ऑटो आई, मैंने उसे रोका और अपने घर का पता बता दिया। हम जा ही रहे थे तो किसी ने ऑटो को रोका, एक लड़की थी उसने अपने घर का पता बताया और अन्दर आ गई। गौर से देखने पर पता चला कि वो वही मॉल वाली लड़की है।
मैंने उससे पूछा- तुम अभी मॉल में थी ना?
उसने कहा- हाँ।
‘तुम्हारा नाम क्या है?’
तो उसने कहा- दीक्षा…
बातों-बातो में मैं उसके बारे में बताना भूल गया, वो एकदम गोरे रंग की थी दिखने में खूबसूरत थी और उसके गुलाबी होंठ जिनको देख कर कोई भी मदहोश हो जाए।
फिर मैंने उससे पूछा- इतनी रात को अकेली घूम रही हो? मम्मी-पापा कुछ नहीं कहते?
उसने कहा- मैं यहाँ पर अपनी सहेली के साथ रहती हूँ, सहेली मम्मी से मिलने अपने घर गई है और एक हफ्ते में लौट आएगी, फ्लैट में अकेले बोर हो रही थी, तो घूमने चली आई।
ऐसे ही बातें करते-करते जा रहे थे।
अचानक ऑटो का पेट्रोल ख़त्म हुआ तो ऑटो रुक गई। हम उतर गए और उसके पैसे दे कर अपने मंजिल की तरफ पैदल ही चल पड़े। तभी अचानक बिजली चमकी और बारिश शुरू हुई, हम लोग सड़क के किनारे आ गए।
जोरदार बिजली चमक रही थी वो डर गई और मुझसे लिपट गई। बाद में उसने ‘सॉरी’ कहा।
मैंने कहा- कोई बात नहीं घबराओ मत, मैं तुम्हें घर छोड़ दूँगा।
मैंने अपना जैकेट उसको दिया और उसके कमरे की तरफ चले गए। हम उसके कमरे में पहुँचे उसने दरवाजा खोला और हम अन्दर गए।
क्या घर था उसका… एकदम मस्त था। उसने मुझे तौलिया दिया और कपड़े बदलने चली गई। थोड़ी देर में वो एक बहुत ही झीना सा गाउन पहन कर आ गई।
क्या माल दिख रही थी। मेरा तो लौड़ा ही खड़ा हो गया। जैसे-तैसे मैंने उसको छुपाया।
उसने कहा- रात बहुत हो गई है और बारिश भी जोर से चल रही है, तुम चाहो तो यहाँ रुक सकते हो मुझे भी कंपनी मिल जाएगी।
मैंने कहा- ठीक है।
उसने कहा- खाना खाया तुमने?
‘नहीं।’
‘मैं बना रही हूँ, हम दोनों साथ में खायेंगे।’
उसने चाय का प्याला मुझे दिया और खाना बनाने चली गई। मैंने चाय पी और किचन में चला गया।
क्या मस्त पटाखा दिख रही थी वो..!
मैंने कप रख दिया और उसके पीछे से उसके कानों में कहा- तुम बहुत खूबसूरत दिख रही हो।
वो शरमाई और कहा- अभी नहीं.. खाने के बाद।
फिर हमने खाना खाया। वो अन्दर किचन साफ़ कर रही थी। मैंने मौका न गँवाते उसको पीछे से पकड़ लिया, उसके हाथों पर हाथ फेर दिया और उसके बाल पीठ पर से हटा कर आगे डाल दिए और उसके पीठ पर चुम्बन किया।
वो अचानक घूम गई, मैं थोड़ा डर गया। इससे पहले कि वो कुछ कहे मैंने उसको चूमना चालू कर दिया, वो भी मेरा साथ देने लगी। करीब 5 मिनट के दीर्घ चुम्बन के बाद उसने मुझे धकेला और कहा- बहुत नॉटी हो तुम।
मैंने कहा- अच्छा..!
वो अन्दर कमरे में चली गई और मैं उसके पीछे-पीछे… कमरे के अन्दर जाते ही मैंने उसको धक्का मारा और वो बिस्तर पर गिर गई। मैंने अपनी शर्ट उतारी और उसके ऊपर आकर धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने लगा।
वो अब गुलाबी ब्रा और पैंटी में थी। मैंने उसकी ब्रा खोल दी, एकदम से उसके गुलाबी निप्पल वाले मम्मे बाहर आ गए।
मैंने उसके मम्मों को स्पर्श किया बहुत ही मुलायम थे।
थोड़ी देर हौले-हौले मसलने के बाद उसके एक मम्मे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगा। उसकी सिसकारियाँ निकलने लगी और उसके मुँह से ‘आह..’ की आवाजें आने लगी।
उसने मेरे गले में हाथ डाल दिए और मुझसे अपने संतरों को दबवाने लगी थी।
बाद में मैं उसके पेट की ओर बढ़ा और उसके पेट पर अपनी जीभ फेरने लगा। वो मदहोश हो गई थी।
मैंने उसकी पैन्टी खिसका दी। उसके गुलाबी चूत को अपनी जीभ से स्पर्श किया, उसके मुँह से एक लम्बी ‘आह’ निकल गई।
मैंने उसकी चूत को जी भर कर चूसा, वो 5 मिनट से ज्यादा रुक न सकी और झड़ गई।
क्या नमकीन स्वाद था उसके जूस का..!
उसने मुझे एक तरफ धकेला और मेरे ऊपर आ गई। मेरी अंडरवियर निकाली और 7 इंच का लौड़ा हाथों में लेकर चूसने लगी।
मैं उस वक़्त पता नहीं किस नशे में था… शायद जन्नत की सैर कर रहा था।
मैं भी 5 मिनट में ही झड़ गया।
थोड़ा रुकने के बाद मैंने उसको चुम्बन किया और उसने मेरा लौड़ा फिर से कड़क कर दिया और मैंने अपने लौड़े को उसकी चूत के ऊपर रख कर धक्का मारा।
वो चिल्लाई और निकालने को कहा।
मैंने उसकी न सुनते हुए थोड़ी देर बाद एक और प्रहार किया.. और फिर एक और.. इस तरह से कुछ ही धक्कों में अपना पूरा लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया।
कुछ देर बाद मैंने अन्दर-बाहर करना शुरू किया, वो भी नीचे से कमर उठा कर साथ देने लगी।
पूरे 20 मिनट तक मैंने उसे चोदा और बाद में उसके अन्दर ही झड़ गया।
उसने कहा- मैं गोली ले लूँगी।
हम दोनों पहले से ही चलने की वजह से थक गए थे सो वैसे ही नंगे एक-दूसरे से चिपक कर सो गए।
सुबह उठने के बाद हमने फिर से दो बार चुदाई की और नहाते हुए भी सम्भोग किया।
हम दोनों का इतना मन लगा कि अगले 6 दिन तक एक साथ रहे और मैंने उसको खूब चोदा। अब वो अपने घर चली गई है क्योंकि उसकी पढ़ाई ख़त्म हो चुकी है।
मैं उसको कभी नहीं भूल सकता।
मुझे आज तक चुदाई में उतना मजा नहीं आया, जितना उसके साथ आया था।
जब तक है जान… जब तक है जान.. मैं उसको कभी नहीं भूलूँगा।
दोस्तों मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल कीजिएगा मेरा आईडी है।
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