मेरी कमसिन दोस्त- 2

मेरी कमसिन दोस्त- 2

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देसी लड़की हॉट कहानी में पढ़ें कि एक कमसिन कॉलेज गर्ल से दोस्ती होने के बाद मैंने उसे सहारा दिया. एक दिन वो मेरे घर में थी तो गलती से मैंने उसे नंगी देख लिया.

दोस्तो,
आपने मेरी देसी लड़की की हॉट कहानी के पिछले भाग
मेरी कमसिन दोस्त- 1
में अभी तक पढ़ा कि कैसे मैंने देसी लड़की मोनिका की पढ़ाई में मदद की कैसे हमारी दोस्ती हुई और हम दोनों एक दूसरे के इतने करीब आ गए।

इस भाग में आप पढ़ेंगे कि हमारी दोस्ती आगे बढ़ते हुए एक ऐसे मुकाम पर जा पहुँची जहाँ तक मैंने सोचा भी नहीं था।

मगर ऐसा हुआ और इस हद तक हुआ कि मोनिका मेरे जिंदगी की सबसे हसीन लड़की बन गई; उसने मुझे वो सारे सुख दिए जो मुझे मेरी पत्नी से कभी नहीं मिला।
तो आगे बढ़ते हैं।

अभी तक मेरी और मोनिका की दोस्ती पहले की तरह ही चल रही थी।
मैं उसका पढ़ाई के साथ साथ और कुछ अन्य कामों में मदद कर देता था।
हम दोनों के बीच पैसों की कोई बात ही नहीं थी।

तो उसके कॉलेज का पहला साल गुजर चुका था परीक्षा का परिणाम आ गया था।
उसकी गर्मियों की छुट्टियां चल रही थी।

वैसे तो छुट्टियों में उसे अपने गाँव जाना था मगर किसी कारण से वो नहीं गई।

मई का महीना चल रहा था. मेरी पत्नी मेरे बेटे को लेकर मायके गई हुई थी क्योंकि मेरे बेटे की भी छुट्टियाँ चल रही थी.
वो जुलाई तक वहीं रहने वाली थी।

रोज की तरह मैं और मोनिका रात में फोन पर चैट कर रहे थे।
वो दिन था 13 मई 2016

अचानक मुझे याद आया कि 2 दिन बाद मोनिका का जन्मदिन आने वाला था. क्योंकि कुछ दिन पहले ही आये उसके कालेज के रिजल्ट में मैंने उसकी जन्म की तारीख देखी थी।

मैंने इस बात को मोनिका को बताया तो उसने कहा- पता है मुझे! मगर मैंने कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाया।

इस बात पर मैंने कहा- इस बार तुम्हारा जन्मदिन मैं मनाऊँगा और तुम इसके लिए बिल्कुल भी मना नहीं करोगी।
उसने पहले तो थोड़ा न नुकुर किया मगर मेरे बार बार कहने पर तैयार हो गई।

पहले तो मैंने बाहर कहीं जन्मदिन मनाने के लिए कहा.
पर वो तैयार नहीं हुई।

फिर मैंने उसे कहा कि अगर वो आ सकती हैं तो मेरे घर आ जाये वैसे भी मेरा घर खाली है।

इस बात पर वो राजी हो गई और मुझसे बोली- क्या मैं कुछ दिन आपके यहाँ आपके साथ रह भी सकती हूं?
पर मैंने कहा- अगर तुमको कोई परेशानी न हो तो क्यों नहीं रुक सकती। मगर तुम अपने चाचा जी को क्या बताओगी?

इस पर उसने कहा- मैं अपनी एक सहेली की मदद लूंगी और उसके घर रुकने के बहाने से मैं आपके यहाँ रुक जाऊँगी।
मैंने उससे बोल दिया- मुझे कोई दिक्कत नहीं … तुम जैसा ठीक समझो।

अगली रात मतलब 14 मई 2016 को उसने बताया कि उसने घर पर बात कर ली है और उसके चाचा जी ने हाँ कह दिया है।

अब अगली सुबह मतलब 15 मई को उसे मेरे यहाँ आना था।

सुबह हुई और मैंने घर की साफ सफाई करने के बाद बाजार में एक अच्छा सा केक मोनिका के लिए आर्डर कर दिया।

बाजार से लौटते वक्त मोनिका के लिए एक अच्छी सी लाल रंग की ड्रेस भी ले आया।

दोपहर एक बजे मोनिका ने मुझे फोन किया और उसके बताए हुए जगह पर जाकर मैं उसे कार से अपने घर ले आया।

घर पर आकर उसे अपना पूरा घर दिखाया.
हम दोनों ने बाहर से खाना मंगाया और साथ में खाना खाया।

उसका मेरे घर पर होना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि वो मेरे लिए बहुत ही खास बन चुकी थी; मैं उसे अपनी सबसे अच्छी दोस्त मानता था।

वो अपने साथ एक बैग लायी थी जिसमें उसके कपड़े थे. वो मेरे यहाँ चार पाँच दिन तक रुकने वाली थी।

दोस्तो, आप लोग सोच रहे होंगे कि एक जवान लड़की को घर बुलाया था तो मेरे मन में जरूर कुछ गलत रहा होगा या मोनिका के मन में कुछ गलत रहा होगा.
मगर मैं कसम खा कर कहता हूँ हम दोनों के मन में ऐसा कुछ भी नहीं था।
बस हम दोनों को एक दूसरे का साथ बहुत अच्छा लगता था और दोनों ही एक दूसरे को अच्छा दोस्त मानते थे।

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किसी तरह शाम हुई और मैं 7 बजे बाजार जाकर आर्डर किया हुआ केक लेकर आ गया।

आने के बाद मैंने मोनिका को वो लाल ड्रेस दी जो मैंने उसके लिए लाई थी और उसे तैयार होने के लिए कह दिया।
मोनिका बोली- मैं नहा लेती हूँ; फिर इसे पहनूंगी।
मैंने कहा- जैसी तुम्हारी इच्छा।
और वो नहाने चली गई।

मुझे सिगरेट पीने की आदत है तो मैं सिगरेट का पैकेट लेकर घर की छत पर चला गया।
छत पर काफी अंधेरा था रात के साढ़े आठ बजे रहे थे।

मेरे घर की बनावट ऐसी है कि तीन तरफ कमरे और एक तरफ बाथरूम और टॉयलेट, बीच में आंगन है।
मैं छत पर जहाँ खड़ा हुआ था वहाँ से बाथरूम का साफ साफ दिख रहा था।

मैंने सोचा कि जैसे ही मोनिका बाहर आएगी, मैं भी नीचे आ जाऊँगा।
मैं काफी समय तक सिगरेट पीता रहा।

और जब मोनिका बाहर निकली तो उसे देखता रह गया।
वो निकली तो उसने एक छोटा सा तौलिया अपने बदन पर लपेट रखा था जो उसके सीने और सामने के गुप्तांग को बस छुपा रहा था।

उसे देखते ही मैं दो कदम पीछे हटा और अंधेरे में हो गया।

उस वक्त मोनिका ने अंदर कुछ भी नहीं पहना हुआ था क्योंकि उसकी शमीज और चड्डी बाहर तार पर टंगी हुई थी।
उसने सोचा होगा कि मैं अंदर कमरे में हूँ.

और एक बार चारों तरफ देखने के बाद उसने जल्दी से अपना तौलिया हटा दिया।
उस देसी लड़की को नंगी देखकर तो मेरा लंड फड़फड़ा गया।

जितनी वो ऊपर से गोरी थी उससे दुगनी गोरी वो अंदर से थी।
उसकी उभरी हुई चूची और उन पर छोटे छोटे गुलाबी रंग के निप्पल।
बिल्कुल चिकनी जांघें और जाँघों के बीच में छोटी सी उसकी पुद्दी कयामत से कम नहीं लग रही थी।

उसने जल्दी से अपनी चड्डी पहनी और फिर समीज पहनी और फिर तौलिया लपेट कर कमरे में चली गई।
ये सब देखकर तो किसी भी ब्रह्मचारी का मन डोल जाता।

उस वक्त से मोनिका के प्रति मेरी सोच ही बदल गई थी.
अब वो मेरे लिए एक ऐसी लड़की थी जिसे पाना किसी के लिए भी सौभाग्य की बात होती।

उसका ये रूप देख मेरा लंड काबू में ही नहीं था।
किसी तरह से मैंने अपने लंड को अपनी चड्डी में दबाया और नीचे चला गया।

नीचे कमरे में जाकर देखा तो उस वक्त तक मोनिका ने मेरी लाई ड्रेस पहन ली थी।

अब मैं उसे कुछ अलग तरह से ही देख रहा था।
उसकी गोरी गोरी बांह और नीचे से दिख रहे गोरे पैर मेरी उत्तेजना को और बढ़ाने लगे थे।

पहली बार मैं मोनिका को इतनी गंदी निगाह से देख रहा था।
मैंने उस दिन से पहले तक कभी भी उसकी चूचियों के उभार को इतने गौर से नहीं देखा था।

बार बार उसे ऊपर से नीचे तक निहार रहा था।
कसम से कमाल का फिगर था उसका!
30 की चूची 26 की कमर और 34 की गांड कयामत थी वो!

कसम से दोस्तो … उस वक्त मैं उसे सिर्फ एक लड़की नहीं बल्कि चोदने लायक लड़की की तरह देख रहा था।

अचानक से वो बोली- मैं तैयार हूं; बताइए अंकल कैसी लग रही हूं मैं?
“बहुत ही सुंदर दिख रही हो मोना तुम … तुमसे सुंदर आज तक किसी को नहीं देखा।”

“इतनी भी सुंदर नहीं हूँ अंकल!”
“सच में बहुत ही अच्छी लग रही हो. तुम्हारे जैसी कोई दूसरी हो भी नहीं सकती।”

“ज्यादा तारीफ मत करिए; नहीं तो मेरा भाव बढ़ जाएगा।”
“ऐसा नहीं है. तुम इतनी सुंदर लग रही हो कि अगर मैं तुम्हारी उम्र का होता तो शादी कर लेता तुमसे!”

“अच्छा ???”
“हाँ तो क्या!!!”

“अब कोई फायदा नहीं; आप अपनी पत्नी के पति हैं और मैं आपकी दोस्त! अब ये मजाक छोड़िए और चलिए केक काटते हैं।”
“हाँ हाँ चलो!”

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फिर मैंने एक तश्तरी में केक सजाया और अपने कमरे में लाकर मेज पर रखा।

केक के सामने मोनिका खड़ी थी और उसके बगल में मैं!

मैंने चाकू उठाया और मोनिका के हाथ में पकड़ा कर उसके हाथों को पकड़ते हुए बोला- चलो अब काटो!

उसने प्यार से केक काटा.
और मैंने तुरंत ताली बजा कर उसे जन्मदिन की बधाई दी।

केक का एक टुकड़ा उसने अपने हाथों में लिया और अपने हाथों से मुझे खिलाया।
मैंने भी उसे अपने हाथों से केक खिलाया।

उस वक्त उसकी आँखों में आँसू आ गए और बहते आंसुओ के साथ उसने मुझसे कहा- अंकल, आप कितने अच्छे हैं. आज तक मुझे ऐसा दोस्त नहीं मिला जो मेरी इतनी परवाह करता हो। आज पहली बार मैंने अपना जन्मदिन मनाया है नहीं तो गांव में तो ये सब कहाँ होता था।

मैं उसके आँखों से आंसुओ को पौंछते हुए बोला- ऐसा कभी नहीं सोचना, तुम्हारे लिए मैं जितना करू उतना कम है। तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो. और दोस्ती में इतना कर दिया तो कोई भी ज्यादा नहीं है।

“आपने मेरे लिए इतना कुछ किया है. पता नहीं आपका ये कर्ज कभी चुका भी पाऊँगी या नहीं!”
“कोई कर्ज नहीं है. ये सब हमारी दोस्ती है. तुम खुश रहो; इतना मेरे लिए बहुत है. कर्ज की बात दुबारा मत बोलना।” ऐसा कहते हुए मैंने उसे गले से लगा लिया।

पहली बार उसे अपने गले से लगाया था उसके जिस्म की खुशबू पाकर मेरा लंड एक बार फिर से फड़फड़ा गया।
एक जवान कमशिन लडक़ी की खुशबू ही किसी को उत्तेजित करने के लिए काफी होती है।

उसने भी अपने दोनों हाथों को मेरी पीठ पर लगा कर मुझे गले लगाया था उसके तने हुए कड़ी कड़ी चूची मेरे सीने से लगकर दब रहे थे।

पहले अगर ऐसा होता तो मेरे अंदर कुछ नहीं होता मगर उसे नंगी देखने के बाद उसके प्रति मेरा नजरिया ही बदल गया था।

मैं भी उसकी पीठ पर अपना हाथ फिरा रहा था और उत्तेजना में उसे अपने सीने पर दबा रहा था।

मेरा लंड उसके पेट से टकरा रहा था और जरूर इसका उसको भी पता चल रहा होगा क्योंकि मेरा लंड कोई छोटा मोटा लंड नहीं है। सात इंच लम्बा और काफी मोटा लंड उस वक्त अपने पूरी लंबाई में खड़ा था।

मगर मोनिका का बर्ताव सामान्य ही था जैसे उसे मेरे लंड का स्पर्श ही न हो रहा हो।

कुछ समय तक हम ऐसे ही गले लगे रहे फिर हम अलग हुए।

हम दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा और मैंने मोनिका का चेहरा हाथ में लिया.
मन तो कर रहा था कि उसके होंठ चूम लूं.
लेकिन ऐसा करना सही नहीं था।

मैंने उसके माथे पर एक प्यार भरा चुम्बन किया और फिर हम दोनों ने खाना खाया।

खाना खाने के बाद हम दोनों काफी देर तक बात करते रहे।
फिर मोनिका ने कहा कि उसे नींद आ रही हैं।

मैंने उसे कपड़े बदल कर सोने के लिए कह दिया और मैं अपनी सिगरेट का पैकेट लेकर छत पर चला गया।

करीब आधे घंटे बाद जब मैं कमरे में आया तो मोनिका बिस्तर पर लेटी हुई थी, उसकी आंख लग गई थी।
मैं कमरे के दरवाजे से ही उसे देख रहा था।

मैंने कभी सोचा नहीं था कि वो इस तरह कपड़े पहन कर सोयेगी।
उसने नीचे एक पतली सी लेगी और ऊपर बस ही समीज पहनी हुई थी।

जो नहीं जानते उनको बता दूँ कि समीज छोटी लड़कियाँ पहनती हैं जो ब्रा नहीं पहनती।
हालांकि मोनिका इतनी छोटी भी नहीं थी. मगर अभी तक समीज ही पहनती थी।

उस वक्त मोनिका का एक हाथ ऊपर की तरफ था जिससे उसके गोरे गोरे अंडरआर्म मस्त लग रहे थे।
समीज से उसके उभरे हुए चूची के निप्पल तने हुए झलक रहे थे।

उसकी लेगी पतली सी थी और उसमें से उसकी चड्डी साफ झलक रही थी।
नाभि के नीचे देखने पर उभरी हुई उसकी बुर का साफ साफ पता चल रहा था।

मैंने भी अपने कपड़े बदले और लोवर बनियान पहन कर उसके बगल में लेट गया।
अपना चेहरा मैंने उसकी तरफ ही कर रखा था और उसे देखे जा रहा था।

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सच मानिए दोस्तो … उस वक्त मेरे लंड की हालत बहुत खराब हो रही थी। मैं बिल्कुल भी सहन नहीं कर पा रहा था।

मैं उठा और बाथरुम जाकर पहली बार मोनिका को याद करते हुए मुठ मारी।

जब मैं वापस आया तो पसीने से भीग चुका था. मैंने एयरकंडीशन को तेज कर दिया और उसके बगल में सो गया।

अचानक से रात में मेरी आँख खुली और मैंने देखा तो रात के 2 बज रहे थे।
मोनिका मुझसे बिल्कुल सटी हुई थी और उसका एक पैर मेरे ऊपर था।

मैं जान गया कि उसको ठंड लग रही हैं क्योंकि कमरा काफी ठंडा हो गया था।

मैंने एक कंबल लिया और मोनिका के साथ ओढ़ लिया।
इस तरह वो मेरे और करीब आ गई और मुझसे चिपक कर सो गई।

उसके चिपकने से मुझे अब कहाँ नींद आने वाली थी।
मैंने भी इस मौके का फायदा लिया और अपना एक पैर उनके ऊपर रख कर उसे अपने सीने से लगा लिया।

मेरा एक हाथ उसके पीठ पर था।
मैं धीरे धीरे उसकी पीठ सहला रहा था।

पता नहीं क्यों पर मेरी हिम्मत अब बढ़ गई थी और मैंने समीज के नीचे से अपना हाथ डाल कर उसकी कमर और पीठ सहलानी शुरू कर दी।

कहते भी हैं न दोस्तो … वासना अंधी होती है ये जब हावी होती है तो कोई रिश्ता, छोटा बड़ा कुछ भी नहीं देखती।

मेरा लंड फिर से फनफना गया।

मुझे विश्वास था कि वो गहरी नींद में सोई हुई है.
मेरी हिम्मत बढ़ती ही जा रही थी.

मैंने उसकी समीज को काफी ऊपर तक उठा दिया था मगर उसकी चूचियाँ अभी समीज के अंदर ही थी।
उसकी पीठ और कमर पूरी तरह से खुल गई थी।

मैं अपने हाथों से उसकी पीठ को सहलाता जा रहा था।

अब मेरे हाथ उसके उभरे हुए चूतड़ों तक जा पहुँचा था और लेगी के ऊपर से ही उसकी गांड पर हाथ फिरा रहा था।

मैं गर्म होता जा रहा था; अब मुझे अच्छे बुरे का ख्याल नहीं आ रहा था।
मोनिका सोई हुई थी इसलिए उसके विरोध का कोई भी डर नहीं लग रहा था।

कुछ समय तक उसकी गांड सहलाने के बाद मैंने अपना हाथ पीछे से उसकी लेगी के अंदर डाल दिया। उसके गद्देदार चूतड़ों को छू कर मैं मस्त हो चुका था।
हल्के हल्के उसके चूतड़ों को दबा रहा था।

अब मैंने अपनी उंगली उसके गांड की दरार पर चलानी शुरू कर दी। पहले उसकी गांड के छेद को अपनी उंगली से हल्के हल्के कुरेदना शुरू किया।

फिर उंगली नीचे लेजाकर उसकी पुद्दी पर चलना शुरू कर दिया।

अब मोनिका के बदन पर कुछ हलचल मची और मैं रुक गया।
मैं डर गया था कि वो नींद से जाग गई है अब ये पता नहीं क्या बोलेगी।

मगर कुछ ही समय में वो शांत हो गई।
मेरी हरकत फिर से शुरू हो गई और मैं उसकी पुद्दी को सहलाने लगा।

मगर इस बार मैंने देखा कि उसकी पुद्दी पानी छोड़ने लगी थी।
मैं जान गया कि उसका बदन भी गर्म हो रहा था.
मतलब वो अब सोई हुई नहीं थी और बस लेटी हुई थी।

मैं बिल्कुल शांत हो गया।
मेरे अंदर एक डर सा आ गया था कि पता नहीं अब वो क्या सोचेगी मेरे बारे में क्योंकि वो मुझे बहुत मानती थी।

मेरा हाथ अभी भी उसकी चड्डी के अंदर ही था। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ क्या नहीं।
मैं बस शांत लेटा रहा और सोने का नाटक करने लगा जैसे कि मुझे कुछ पता ही न हो!

दोस्तो, आगे आप पढ़ेंगे कि उसके बाद कुछ हुआ? या हम दोनों शांत हो गए।

अगर कुछ हुआ तो कैसे मोनिका तैयार हुई और हम दोनों के बीच क्या क्या हुआ कि उस रात से हम दोनों की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई।
देसी लड़की की हॉट कहानी का अगला भाग आप जरूर पढ़ें.

[email protected]

देसी लड़की की हॉट कहानी जारी रहेगी.

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