जब पहली बार मुझे सेक्स के बारे में पता चला-2

जब पहली बार मुझे सेक्स के बारे में पता चला-2

पिछले भाग में आपको मैंने बताया था कि मेरे दोस्त अशोक के बताने पर मुझे एक लड़की को हासिल करने की चाह हो उठी थी और जब कोई लड़की नहीं मिली तो मैंने मौका देख कर अपनी बहन सोनिया से ही उसको नंगा देखने की चाहत से कहा कि सोनिया मैं तुम्हें देखना चाहता हूँ।

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सोनिया- क्या मतलब.. तुम तो मुझे रोज देखते ही हो और अभी भी देख रहे हो।
मैं कुछ देर चुप रहा.. फिर वो बोली- क्या हुआ?

सोनू- नहीं ऐसे नहीं..
सोनिया- फिर कैसे?
सोनू- मेरा मतलब है कि मैं तुम्हें..
सोनिया- बोलो भी..
सोनू- सब कुछ.. पूरा..
सोनिया समझ गई और गुस्से से बोली- तेरा दिमाग ठिकाने है या नहीं?

मैं गिड़गिड़ाने, रोने लगा तो वो बोली- यह है तो ग़लत.. पर तुम्हारी कंडीशन भी खराब है.. मुझे सोचने का मौका दो।

वो बाहर चली गई.. और मैं फिर मायूस हो गया। लेकिन कोई दस मिनट के बाद वो फिर वापिस आई.. और धीरे से बोली- ठीक है.. सब सो रहे हैं।

मैंने आशा भरी नजरों से उसकी तरफ देखा।

सोनिया- लेकिन मैं यहाँ नहीं करूँगी.. मैं बाथरूम में करूँगी.. अगर कोई आ जाएगा तो टॉयलेट का बहाना बना दूँगी। लेकिन तुम यहीं बिस्तर पर ही बैठे रहोगे। तुम मेरे नज़दीक नहीं आओगे.. मंजूर?

सोनू- ठीक है.. पर बहुत दूर हो गया।
सोनिया- देख लो तुम्हारी मर्ज़ी है.. और ये सब भी मैं तुम्हारे इतना फोर्स करने पर कर रही हूँ.. अगर ये मंजूर नहीं.. तो रहने दो।
सोनू- ओके.. ठीक है.. मैं यहीं बैठा रहूँगा।

वो बाथरूम में चली गई और वहाँ की लाइट ऑन कर दी। फिर दरवाजा आधा बन्द कर दिया.. इतना खोल दिया कि मैं उसे देख पाऊँ.. वो सीधी खड़ी हो गई।

फिर खड़ी रही.. मैंने कहा- क्या हुआ?
वो बोली- नहीं हो रहा.. मुझसे नहीं होगा।

मैंने उससे फिर कहा.. तो उसने कहा- ठीक है ट्राई करती हूँ।

उसने नीचे से अपना टी-शर्ट पकड़ी और ऊपर उठाने लगी।

सबसे पहले मुझको उसकी नाभि दिखाई दी.. और फिर उसका गोरा पेट.. ऊऊऊ माय गॉड.. उसके चेहरे से भी गोरा.. वो धीरे-धीरे अपना टी-शर्ट ऊपर उठा रही थी.. इधर मेरा लण्ड खड़ा हो रहा था। फिर मुझे उसकी ब्रा नज़र आई.. सफेद ब्रा और उसमें से झांकती उसकी चूचियाँ.. जिन्हें देखते ही मेरी हालत थी कि बस.. आह्ह..

तभी उसने अपनी टी-शर्ट ऊपर तक उठा दी.. जिससे मैं उसकी ब्रा को पूरा देख पा रहा था।

तभी जाने उसे क्या हुआ.. और उसने टी-शर्ट वापिस नीचे गिरा दी.. और बाथरूम से बाहर आकर जाने लगी।

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मैंने उससे कहा- क्या हुआ?
वो बोली- हो तो गया.. ये ही तो देखना था.. दिखा दिया.. बस!

अब तक मैं इतना उत्तेजित हो चुका था कि अपने को रोक नहीं सका और अपना लण्ड निकाल कर मैंने रस निकाल दिया।

अगले रोज़ मैं उठा और नीचे जाकर उसे देखा.. उसने मुझसे ऐसा व्यवहार किया कि जैसे रात को कुछ हुआ ही नहीं।

उस रात वो मेरे कमरे में नहीं आई और उसकी अगली रात को आई, उस दिन मोना पहले ही सो गई थी, वो आकर मेरे पास बैठ गई।

मैंने उसे देखा.. फिर बोला- ये तो चीटिंग है।
सोनिया- क्या चीटिंग है?
सोनू- तुमने पूरे का प्रॉमिस किया था।
सोनिया- मैंने कोई प्रॉमिस नहीं किया था।

कुछ देर बहस के बाद वो थोड़ी हल्की शान्त हुई.. तो मैंने उससे फिर रिक्वेस्ट की- प्लीज़ आज पूरा कर दो।
वो बोली- ठीक है.. जितना मुझसे होगा.. कर दूँगी.. ज्यादा नहीं होगा।
मैंने ‘ओके’ कहा.. तो वो बोली- जाओ पहले बाहर की स्थिति देखो.. क्या है?

मैं बाहर गया.. देखा सब ठीक है.. सब सो रहे थे। मैं वापिस आया.. तो देखा वो बाथरूम में थी और दीवार के सहारे खड़ी थी, उसने मुझे देखा और मुस्कराई।

मैं अन्दर आने लगा.. तो बोली- नहीं.. वहीं बिस्तर पर बैठो।
मैंने कहा- नहीं.. यहाँ दरवाजे पर खड़ा हो जाता हूँ.. प्लीज़।
उसने कहा- ठीक.. पर अन्दर नहीं आओगे.. प्रॉमिस करो।
मैंने कहा- ठीक है.. प्रॉमिस..

उसने अपना टी-शर्ट उठाना शुरू किया।
मैं गौर से देखने लगा.. उसकी पतली गोरी चिकनी कमर.. बिल्कुल मस्त।

मैं आँखें फाड़े उसे देख रहा था। उसने टी-शर्ट ऊपर तक उठा दी.. फिर रुक गई।

मैंने कहा- इसे पूरा निकाल दो।

उसने वो पूरा निकाल कर अलग रख दिया।
फिर मैंने पजामे की तरफ इशारा किया.. तो उसने ‘ना’ करके सिर हिला दिया।

मैंने ‘प्लीज़’ कहा.. दो-चार बार कहने पर उसने पजामे को पकड़ कर नीचे करना शुरू किया, मुझे उसकी पैन्टी दिखनी शुरू हो गई। उसने सफ़ेद रंग की पैन्टी पहन रखी थी।

फिर मुझे उसकी जांघें दिखाई दीं, एकदम गोरी.. उन पर एक भी बाल नहीं था।
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मैं हैरानी से उसको देख रहा था। उसने अपना पजामा घुटनों तक गिरा दिया और मुझे देखने लगी।
मैंने कहा- इसको भी निकाल दो..

उसने थोड़ा झिझक कर उसको भी निकाल दिया। अब वो ब्रा और पैन्टी में मेरे सामने खड़ी थी। मैं उसे कामुक नजरों से देख रहा था। उसकी हर चीज़ कमाल थी। मैं धीरे-धीरे उसके करीब जाने लगा।
उसने कहा- नहीं.. अन्दर मत आओ।

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अब मैं नहीं माना..
वो पीछे हटने लगी, वो दीवार से सट गई और मैं उसके पास आ गया।

मैं उसकी आँखों में झाँक रहा था।
उसने कहा- नहीं सोनू.. हम भाई-बहन हैं।

मैंने उसके होंठों पर उंगली रख दी और कहा- अब कोई भाई-बहन नहीं.. मैं तुम्हें छूना चाहता हूँ और देखना चाहता हूँ।

मैंने सबसे पहले उसके चेहरे को हाथों में लिया और उसकी आँखों को चूम लिया।
वो एकदम हिल सी गई।
मैंने कहा- आई लव यू सोनिया..

मैं थोड़ा पीछे हुआ और मैंने अपनी टी-शर्ट और पजामा उतार दिया।
वो डर कर बोली- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं..

मैं अंडरवियर में था.. और मेरे अंडरवियर में मेरा लण्ड खड़ा था, वो बिल्कुल डरी हुई थी।

मैं फिर उसके पास आया.. उसने अपने दोनों हाथों को मेरी छाती पर रख कर मुझे रोकना चाहा.. लेकिन मैंने उसके हाथ हटा दिए और उसके और पास चला गया।

अब हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में झाँक रहे थे। मैंने उसके पूरे शरीर पर नज़र डाली.. मैं उसकी सुन्दरता को बयान नहीं कर सकता.. वो इतनी मारू लग रही थी।
एकदम गोरा शरीर और जिस्म पर कहीं कोई बाल नहीं.. उसकी एकदम गोल और भरी हुई चूचियाँ और पैन्टी में से नज़र आती उभरी हुई चूत।

मैं पागल हुए जा रहा था.. मैं उसके ये दो कपड़े भी उतरना चाह रहा था.. पर मुझे डर था कि कहीं ये बुरा ना मान जाए। मुझे उसको और आगे के लिए भी तैयार करना था.. इसलिए मैंने कोई जल्दी नहीं की।

वो बोली- सोनू.. अब तुमने देख लिया.. अब पीछे हटो.. मुझे सर्दी लग रही है।
सोनू- नहीं.. मुझे पूरा देखना है..
सोनिया- पूरा मतलब?
सोनू- पूरा मतलब पूरा.. ये सब भी..
सोनिया- नहीं सोनू.. कोई देख लगा.. मोना भी जाग सकती है।
सोनू- कुछ नहीं होगा..

मैं समझ गया कि ये चाहती तो है.. पर इसे डर लग रहा है.. इस थोड़ा गर्म करना होगा।

मैं थोड़ा और करीब गया और धीरे से उसकी कमर में हाथ डाल दिया और थोड़ा अपनी ओर खींच लिया।

दोस्तों जब मैंने उसे हाथ लगाया.. वो इतनी सॉफ्ट थी कि बस.. कांप तो मैं भी रहा था।

वो बिल्कुल ठंडी थी.. वो मेरी आँखों में झाँके जा रही थी।
मैंने उसे थोड़ा और खींचा.. अब उसका पेट मेरे बदन से टच हो गया।
जैसे ही हमारे शरीर थोड़े टच हुए.. हम दोनों हिल से गए।

मेरी छाती उसकी छाती से छू रही थी, उसकी चूचियों का दबाव मैं अपनी छाती पर महसूस कर रहा था।

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चूंकि मैं उससे लंबा था.. तो मेरा लण्ड उसके पेट से टच हो रहा था। अब मैं नहीं रुक सका.. मैंने उस थोड़ा और खींचा.. वो अब भी मुझे देखे जा रही थी, उसकी पूरी खुली आँखों मैं मासूमियत थी।

मैं उस पर झुका और धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। फिर धीरे-धीरे उन्हें चूसना शुरू कर दिया.. साथ ही मैंने उसे अपने से बिल्कुल चिपका लिया था।

मैं उसके पूरे शरीर को महसूस कर रहा था। उसमें भी अब थोड़ी गर्मी आने लगी और उसने भी अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रख दिए। मैं समझ गया कि काम हो गया।

मैंने भी अपने दोनों हाथ को उसकी नंगी कमर पर लपेट दिए और उसे पूरा अपनी ओर खींच लिया।

अब तो उसने भी मुझे अपनी ओर खींच लिया.. हम दोनों बिल्कुल एक हो गए। उसकी चूचियाँ बिल्कुल मेरी छाती से चिपकी हुई थीं।

मुझे उसकी चूत भी अब महसूस होने लगी थी.. और हम दोनों एक-दूसरे को चूसे जा रहे थे। मैंने अपने एक हाथ से उसके सिर को पीछे से पकड़ा और अपनी ओर खींच लिया, साथ ही मैंने अपने दूसरे हाथ को धीरे से उसके चूतड़ों पर लगाया।

जैसे ही मेरा हाथ उसके चूतड़ों पर पहुँचा.. वो नीचे से थोड़ा ऊपर को उचकी और मेरे और नजदीक आ गई।

मैं उसकी चूत को महसूस कर रहा था, उसकी चूत मुझे गर्म लगी।

थोड़ी देर बाद हम दोनों के मुँह एक-दूसरे से अलग हुए और हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा तो दोनों मुस्कराए.. फिर हंस दिए।

मुझे उसकी इस हँसी में मंज़ूरी मिल गई और हम दोनों फिर एक-दूसरे को चूसने लगे।
हम दोनों ने एक-दूसरे को कई बार चूसा, उसने भी अपने एक हाथ से मेरे सिर को पकड़ रखा था।

अब सोनिया मुझसे पूर तरह खुल चुकी थी और उसकी चुदास भी जागृत हो चुकी थी..

अब इस आपबीती के अगले भाग में मैं आपको बताऊँगा कि सोनिया मेरे साथ ‘वो’ सब कुछ करने को कैसे राजी हुई।

मेरे साथ अन्तर्वासना से जुड़े रहिए.. बस कल फिर हाजिर होता हूँ। मुझे उम्मीद है कि आपको भी इस चुदाई की कहानी में रस मिल रहा होगा.. प्लीज़ मुझे अपने ईमेल जरूर कीजिएगा ताकि मेरा उत्साह बना रहे।
कहानी जारी है।
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