औरतें सिर्फ सेक्स की भूखी नहीं होती-1

औरतें सिर्फ सेक्स की भूखी नहीं होती-1

प्रेषक : राकेश कुमार

सभी को नमस्कार, आप सभी का शुक्रिया और आभार। मेरी अगली कहानी बताने जा रहा हूँ।

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यह कहानी करीब 3 साल पहले की है, जब मैं मुम्बई में बैंक में काम करता था और मेरी जिंदगी मजे में चल रही थी। मैं जिगोलो नहीं था, मेरी कई लोगों से मुलाकातें होती थी और सभी के सेल नम्बर मेरे पास और मेरा नम्बर उनके पास होता था। उनके सेविंग अकाउंट, लॉकर और कोई बैंकिंग काम होता तो मुझे वो घर बुला लेते थे।

मेरी एक परिवार से अच्छी जान पहचान थी मिस्टर रमन और मिसेस सीमा ओबरॉय, जिनके घर कुछ काम से ही आना-जाना होता था। वो अपने 8 साल के बच्चे को हॉस्टल में रखे हुए थे। रमन हमेशा अपने काम के सिलसिले में देश से बाहर रहते थे और सीमा घर पर अकेली रहती थी।

सीमा कोई 32 साल की महिला गोरा रंग, खूबसूरती की मूरत, मानो अभी कुंवारी हों। उनके घर हमेशा आने-जाने से उनसे मेरा परिचय अच्छा था और कौन इंसान होगा जो किसी खूबसूरत औरत को नहीं देखता, सो मैं भी उन्हें चोरी-चोरी देखता रहता था, पर कभी मैंने यह नहीं सोचा था कि वो मेरी जिंदगी भर के लिए अच्छी दोस्त और कामचलाऊ बीवी बन जाएगी।

चलो मैं मुद्दे पर आता हूँ, कहानी शुरू होती है एक झगड़े से जहाँ मैं अचानक टपक पड़ा। दोनों मियां-बीवी में झगड़ा हो रहा था और मुझे रमन के बुलाने के कारण मैं वहाँ चला गया था।

उनके बीच कुछ झगड़ा था, सीमा कह रही थी- अब तुम्हारा बस हो गया, मैं हरकतों को बर्दाश्त नहीं करुँगी और मुझे जवाब देना ही पड़ेगा।
तब रमन ने कहा- मैंने तुम्हें रोका नहीं है, तुम मुझे मत रोको, मुझे जाना है।

उसके इतना कहते ही रमन ने मुझसे कहा- राकेश, मैडम से अमाउंट लेकर अकाउंट जमा कर देना और रसीद लाकर दे देना। हमें ‘एफडी’ करनी है, फॉर्म लाए हो?

मैंने कहा- जी हाँ, लाया हूँ।

उन्होंने फॉर्म पर हस्ताक्षर कर दिए और ‘बाय’ कह कर चले गए।

थोड़ी देर में सीमा 11 लाख की चेक और 5 लाख रुपये नगद लेकर आ गई और मुझे दे दिए।

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मैंने वो बैंक में जमा करवाये, ‘एफडी’ बनवाई और पावती देने वापस चला गया। उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा, पावती ठीक से देखी और कहा- रुको, आज खाना खाकर जाना।

मैंने कहा- ठीक है।

शाम के 7 बज चुके थे, सो मैं भी मान गया। उन्होंने खाना बनाया और मुझे खाना खाने के लिए बुलाया।

मैंने पूछा- रमन जी नहीं आयेंगे !

सीमा ने कहा- वो आज ही दस दिन के लिए चाइना गए हैं।

सो हम लोग खाना खाने लगे। हम दोनों ही थे और हम लोगों में बात चल रही थी।
मैंने थोड़ा सोच कर उनसे पूछा- आजकल आप दोनों में अनबन क्यूँ चल रही है?

हम लोगों में अच्छी जान-पहचान थी, सो उन्होंने थोड़ा सोच कर कहा- राकेश मैं औरत हूँ, हर औरत की एक चाहत होती है कि उसको भी कुछ मिले। उसकी कदर करने वाला कोई हो, उसकी ख्वाहिशें पूरी करने वाला कोई हो। सिर्फ पैसे के गद्दे पे नींद नहीं आती है। औरत चाहती है कि किसी मर्द के कंधे पर सर रखकर वो आराम से सोये। उसकी मजबूरी भरे समय में उसके साथ हो और रमन सिर्फ एक दिन का समय देते हैं। वो तो अपने दुनिया में खुश हैं, पर मेरे बारे में कभी नहीं सोचते। मेरी हालत क्या होगी, यह उनको पता नहीं ! उनको तो कई लड़कियाँ पैसों के बल पे मिल जाती हैं और मैंने उन्हें रंगेहाथ पकड़ा भी है, पर मैं कुछ नहीं कर सकती, मेरी मजबूरी है। मुझसे कहते हैं कि मैं करता हूँ, तो तुम भी करो। मैं कैसे से करूँ? मुझे व्याभिचार करना नहीं आता। रमन कहते हैं आज कल इसका ट्रेंड है, कोई फर्क नहीं पड़ता। कैसे कोई फर्क नहीं पड़ता?

मेरी जिंदगी में पहली बार कोई इस तरह की बात कर रहा था। मेरी उम्र भी 23 साल की थी और कसम से कहता हूँ, मुझे सेक्स के बारे में कोई अच्छा अनुभव नहीं था, सिर्फ कमाठीपुरा में रंडियों को चोदा था। वो भी आप लोगों को पता है कि रंडियों को चोदना पैसों की बर्बादी है, पांच मिनट के लिए एक हजार रूपए लेती थीं और खेल खत्म पैसा हजम ! है या नहीं !

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बातों-बातों में हमारा खाना हो गया और मैंने उनकी आज्ञा लेकर निकलना ठीक समझा। अब मेरे दिमाग में सिर्फ सीमा ही थी और उसके नाम से मुठ्ठ मार कर मैं शांत हो गया। दो दिन सीमा का कोई कॉल नहीं आया।

तीसरे दिन सवेरे 7 बजे मुझे सीमा का कॉल आया और उसने कहा- राकेश तुमसे कुछ काम है, ऑफिस जाने से पहले एक बार मुझसे मिल कर जाना।

मैं 9 बजे उनके पास गया। उन्होंने मुझे अंदर बुलाया, चाय लेकर आईं और मुझे पचास हजार रुपये देकर एक अकाउंट में जमा करवाने के लिए कहा और यह बोलना नहीं भूलीं कि इसके बारे में रमन को पता न चले।

मैं ऑफिस चला गया। वो अकाउंट हमारे ही बैंक का था, सो मैंने उसकी डिटेल निकाली तो देखा कि वो शायद किसी जिगोलो का है और उसके अकाउंट में अच्छे ट्रांजेक्शन हैं। मैंने उसके अकाउंट के नम्बर पर कॉल किया तो उसने बताया कि हम लोग मेल एस्कॉर्ट एजेंसी चलाते हैं। यह सुनते ही मुझमें कुछ करने की वासना जगी।

मैंने सीधे सीमा को कॉल किया और कहा- बैंक वाले इतनी अमाउंट नहीं ले रहे है।

उन्होंने कहा- ठीक है, तुम वो पैसे लाकर इधर ही आ जाओ।

मैं ऑफिस से छुट्टी लेकर निकला। सोचने लगा कि कुछ भी करके आज सीमा को भोगना है। ये सोच कर मैं ऑफिस से निकला सीमा के घर जैसे पहुँचा और वहाँ जो नजारा देखा तो क्या कहूँ ! वैसे सीमा को पहले भी कई बार इस रंग में देख चुका था, पर आज मेरा मन वासना से भरा था।

उसने बिना आस्तीन की टी-शर्ट और कैपरी पहनी हुई थी। सीमा ने बाल ऊपर बांधे हुए थे और मम्मे शर्ट को फाड़ कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। आज मेरे दिमाग में वासना का शैतान था, सो मुझे हर चीज भड़काऊ लग रही थी।

सीमा- क्या हुआ राकेश? आज इस तरह क्यूँ देख रहे हो?

मैं- कुछ नहीं मैडम… ऐसे ही, पर वो पैसे आपने क्यूँ दिए थे?

सीमा- रमन से बदला लेने के लिए, वो मौज कर सकते हैं तो मैं क्यूँ नहीं !

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मैं- मैडम, मैं आपका मतलब समझा नहीं?

सीमा- जाने दो ! राकेश अभी तुम नहीं समझोगे।

मैं- आप समझाओगी तो मैं समझूँगा न !

सीमा- सचमुच तुम समझना चाहते हो कि मुझे क्या चाहिये? तो मैं जैसा कहूँगी वो तुम्हें करना पड़ेगा और इसके बारे में रमन को या किसी और नहीं मालूम नहीं पड़ना चाहिए… यह वादा करो !

मैं- वादा करता हूँ।

“चलो ऑफिस कॉल करो और दो दिन की छुट्टी लो।”

मैंने वैसे ही किया और सीमा मुझे बाथरूम में ले गई और मूतने लगी। वो आवाज़ तो सुनाई पड़ रही थी, पर चूत दिखाई नहीं दी। हाँ उसके दोनों नितम्ब को तो मैं जी भर के देख रहा था और मज़ा ले रहा था। मेरा लण्ड अब खड़ा हो गया और पैन्ट के ऊपर से ही दिखाई देने लगा।

अब सीमा मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगी। मानो जन्नत नजर आ रही थी और मुझे उसको छूने के लिए भी इजाजत लेनी थी। सीमा ने एक मिनट में अपने कपड़े उतार दिए और मुझे इशारा करके मेरे कपड़े निकलने को कहा। मैंने झटके से कपड़े उतारे और मेरा 8 इंच वाला हथियार देख कर सीमा की आँखें फटी की फटी रह गईं। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

सीमा ने मुझे पास बुलाकर उससे पीछे से चिपक कर खड़ा होने के लिए कहा। मैंने वैसे ही किया। वो शावर में नग्न खड़ी थी और मैं भी, हम दोनों के शरीर से पानी बह रहा था और मुझे उसके चूत में लौड़ा घुसाने की जल्दी थी। सो मैंने लंड हाथ में पकड़ कर सीमा के नितम्बों के बीच में घुसाने की कोशिश की।

सीमा- अरे वाह राकेश… मैंने तुम्हें कहा भी नहीं और तुम अपनी मर्ज़ी से चालू हो गए। मैंने तुम्हें पहले ही कहा था न कि औरत कि चाहत जाने बगैर कुछ नहीं किया जा सकता। मैं सेक्स की भूखी नहीं हूँ।

कहानी जारी रहेगी।

मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।

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