तीन चुम्बन-2 – Antarvasna

तीन चुम्बन-2 – Antarvasna

लेखक : प्रेम गुरू

दूसरा चुम्बन :

बाथरूम के बाहर खड़ा मैं आज से कोई चार साल पहले घटी उस घटना के बारे में सोच ही रहा था कि मिक्की की आवाज मेरे कानों के बिलकुल पास में गूंजी।

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“फूफाजी कहाँ खोये हुए हो ?” मिक्की शरारत भरी मुस्कान के साथ मुझे देख रही थी।

मैंने उसके हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए कहा “क्यों आज पप्पी नहीं देनी ?”

वो शर्म से लाल हो गई और मैं रोमांच से लबालब भर गया। मैं उसके गालों पर एक चिकोटी काटी और उसे अपनी ओर खींचने लगा। वो कुनमुनाती हुई सी बोली, “हटो अब मैं बड़ी हो गई हूँ !”

“अरे ! कहाँ से बड़ी हो गई हो, हम भी तो देखे !” मैंने भी शरारत भरे लहजे में कहा।

“वो ! वो…. ओह ! मुझे नहीं पता !” अब तो उसके चेहरे की लाली देखने लायक थी। शर्म से पुरखुमार आँखें नीची झुकी हुई थी। मुझे पूरा यकीन हो गया वो चार साल पुरानी बात को भूली नहीं है।

“तो किसे पता होगा ?” मैंने पूछा।

“मम्मी ऐसा कहती हैं।”

“अरे मम्मी को क्या पता ! तुम तो मेरे लिए अभी भी वो ही छोटी सी मुनिया हो।” मैंने उसकी ठुड्डी को ऊपर उठते हुए कहा। उसकी आंखें बंद थी। मैंने बड़े प्यार से एक चुम्बन उसके गालों पर ले ही लिया।

मेरी आँखें उसकी छोटी छोटी गोलाईयों पर थी जो अब नींबू से बढ़कर अमरुद बन रहे थे। आगे से तीखे नुकीले, जैसे पेंसिल की टिप। उसके मोटे मोटे होंठ तो सुर्ख लाल थे। जीन में कसे हुए उसके नितम्ब ऐसे लग रहे थे मानो दो छोटे छोटे खरबूजे हो उनके बीच की गहरी दरार साफ़ नजर आ रही थी।

गुरूजी कहते हैं किसी जवान लड़की या औरत की बुर या चूत का अंदाजा उसके होंठो को देख कर लगाया जा सकता है। इस हिसाब से तो उसके निचले होंठ भी अब क़यामत बन गए होंगे। या अल्लाह…. !! क्या मैं कभी उनको देख पाऊंगा और…. और…. खैर ये तो अन्दर की नहीं बाद की बात है।

मिक्की हाल में चली गई और मैं बाथरूम में उसकी वोही पुरानी खुशबू लेने अन्दर चला गया। मेरे नथुनों में उसके जवान होते जिस्म की खुशबू भर गई। मैं कोई चार-पाँच मिनट तक आँखें बंद किये पुरानी यादों और नए चुम्बन के ख्यालों में खोया रहा। मैं सोच रहा था कि इस क़यामत को कैसे पटाया जाए। मुझे कुछ कुछ अंदाजा तो हो ही गया था कि वो हमारे पहले चुम्बन को नहीं भूली है। मैं भी कितना गाडूँ हूँ इतने दिनों तक मुझे यह ख़याल ही नहीं आया कि मोनिका डार्लिंग अब इतनी बड़ी और रस भरी हो गई है।

१८ साल में ही वो इतनी गदरा जायेगी मुझे अंदाजा नहीं था। मैं शर्त लगा सकता हूँ कि अगर वो अपने होंठों पर लाल रंग की लिपस्टिक लगा ले तो ऐसा लगेगा जैसे वो किसी का खून पीकर आई हो। उसके सुन्दर अमृत कलश हालांकि अभी छोटे ही है पर बिजलियाँ गिराने के लिए काफी हैं। अब ये नींबू की जगह अमरूदों के आकार के तो हो ही गए हैं। उसकी बिल्लौरी आँखें तो ऐसी हैं जैसे नशे में पुरखुमार मस्त हिरणी हो। आप अंदाजा लगा सकते हैं उसकी पिक्की बुर बनने के लिए तड़प रही होगी। अब तो उसने रस बनाना भी शुरू कर दिया होगा। जिस तरह से मेरे चुम्बन लेने के बाद वो शरमाई थी मुझे पूरा यकीन है की उसका किसी हम उम्र सहेली या मैडम के साथ जरूर कोई चक्कर होगा। और अगर ऐसा है तो मेरे लिए तो ये और भी ख़ुशी की बात होगी कि मेरा प्यार वो जल्दी ही स्वीकार कर लेगी।

आप सोच रहे होंगे क्या बकवास लगा रखी है। क्या सिर फिरी बातें कर रहा हूँ। भला इस उम्र में सेक्स की इतनी समझ आ जाती है। तो दोस्तों सुनो हमारे गुरूजी कहते हैं कि लड़की जब रजस्वला होने लग जाती है और उसकी पिक्की बुर बन जाती है यानि कि उसकी भोस पर बाल आने शुरू हो जाते हैं तो वो सम्भोग के लिए तैयार हो जाती है। ये दोनों चीजें ही उसके सम्भोग के लिए तैयार होने की निशानी हैं।

और मिक्की तो १८ साल की हो गई है। मिक्की के बारे में मुझे बाद में पता चला कि वो अपने मम्मी पापा को कई बार सेक्स करते और चूसा चुसाई करते देख चुकी है और सेक्स के बारे में उसने अपनी सहेलियों से भी बहुत कुछ जानकारियां ले रखी हैं। अकेले में कई बार उसने हस्त मैथुन तो नहीं किया पर अपनी पिक्की से छेड़खानी और छोटी मोटी चुहलबाजी जरूर की है। पर ये सब बातें अभी नहीं।

उस दिन रविवार था मुझे ऑफिस नहीं जाना था। बस मैं तो कोई न कोई बहाना बना कर अपनी मिक्की के पास बना रहना चाहता था। सभी ने चाय पी और नहाने की तैयारी करने लगे। रमेश और सुधा गेस्टरूम से लगे बाथरूम में चले गए। मैंने जानबूझकर मिक्की को अपने बेडरूम से लगे बाथरूम में जाने को कहा। वो अदा से अपने कूल्हे मटकाती हुई बाथरूम चली गई। मैं तो बस उसके ख्यालों में ही खोया रह गया। वो कैसे अपनी पेंटी उतारेगी ! उसकी कच्छी गुलाबी रंग की होगी या फिर काले रंग की? उसने ब्रा पहन रखी होगी या अभी शमीज से ही काम चला रही है !

अरे यार ! छोड़ो इन फजूल बातों को !

मैं तो बस यही सोच रहा था कि उसकी पिक्की (नहीं बुर नहीं भोस नहीं पुस्सी) कैसी होगी। काश मैं कोई भंवरा होता या कम से कम छिपकली ही होता तो बाथरूम में छुप कर बैठ जाता और अपनी इस नन्ही कली को जी भर कर नंगे नहाते और मूतते हुए देख सकता।

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बाथरूम के अन्दर से शावर चलने की आवाज और मिक्की के इंग्लिश गाने की मिलीजुली आवाज मुझे मदहोश कर रही थी। मेरा पप्पू तो छलांगें लगाने लगा था। कोई आधे घंटे के बाद मिक्की बाथरूम से निकली। उफ्फ्फ….!!!

भीगे बाल और उनसे टपकती हुई शबनम जैसी पानी की बूँदें, टांगों से चिपकी लाल सलेक्स और ऊपर ढीली सी शर्ट। पता नहीं उसने पेंटी और ब्रा जानबूझ कर नहीं डाली या कोई और बात थी। सलेक्स इतनी टाइट थी कि उसकी योनि का भूगोल और इतिहास साफ़ नजर आ रहा था। चूत का चीरा तीन इंच से कम तो क्या होगा। मेरा पप्पू तो मस्त हिरण की तरह कुलांचें भरने लगा। उसके बदन से आती मस्त खुश्बू से मैं तो मदहोश सा हो गया।

इस से पहले कि कोई मेरी हालत देख कर कोई अंदाजा लगाए, मैं बाथरूम में घुस गया। सबसे पहले मैंने उसकी पेंटी को ढूंढा। एक कोने में किसी मरी हुई चिड़िया की तरह मुझे उसकी नीली पेंटी और ब्रा मिल गए। मैंने उसकी पेंटी को उठाया और गौर से देखा। योनि-छिद्र वाली जगह कुछ गीली थी और उस पर सफ़ेद लार जैसा कुछ लगा हुआ था। शायद ये उसका योनि-रस था। मैंने उसे नाक के पास लगा कर सूंघा। ईईईइस्स्श….!! इतनी मादक, तीखी, खट्टी, कोरी पुस्सी की महक मेरे तन मन को अन्दर तक भिगो गई। मैंने उस पर अपनी जीभ लगा दी।

आईला….! क्या खट्टा, मीठा, नमकीन, कच्चे नारियल जैसा स्वाद था। मैंने उसकी पेंटी और ब्रा को एक बार और सूंघा और फिर उसकी पेंटी को अपने 7″ के पत्थर की तरह अकड़े पप्पू के चारों और लिपटा कर शीशे में देखा। पप्पू तो अड़ियल टट्टू ही बन गया था जैसे मार खाए बिना आज नहीं मानेगा। जी तो कर रहा था कि एक बार मुठ मार लूँ। पर मैं तो अपना प्रेम रस आज रात के लिए बचा कर रखना चाहता था। मैंने उसकी पेंटी को अपनी पेंट की जेब में रख लिया अपने प्यार की निशानी मानकर।

जब मैं फ्रेश होकर बाहर आया तो सभी मेरा खाने की मेज़ पर इंतजार कर रहे थे। नाश्ता करने के बाद रमेश मार्केट और मधु और सुधा हमारे बेडरूम में गप्प लगाने चली गई। मैं और मिक्की अब दोनों अकेले रह गए। जैसे ही मधु और सुधा गई मिक्की झट से उठ कर मेरे पास सोफे पर बैठ गई और मेरी आँखों में झांकते हुए बोली,”जिज्जू ! क्या आप मुझे कंप्यूटर सिखा सकते हो ?”

जिज्जू…….. ? आप चौंक गए ना !

ओह….!

मैं बताना ही भूल गया ! मिक्की जब मुझे फूफाजी बुलाती तो मुझे लगता कि मैं कुछ बूढ़ा हो गया हूँ। मैं अपने आप को बूढा नहीं कहलवाना चाहता था तो हमारे बीच ये तय हुआ घरवालों के सामने वो मुझे फूफाजी कह सकती है पर अकेले में या घर के बाहर जीजाजी कहकर बुलाएगी।

“ओह…. येस….येस….! हाँ हाँ ! क्यों नहीं !” मैं हकलाता हुआ सा बोला क्योंकि मेरी निगाहें तो उसके स्तनों पर थी। पतले शर्ट में उसके बूब्स की छोटी छोटी घुन्डियाँ चने के दाने की तरह साफ़ नजर आ रही थी।

“चलो स्टडी-रूम में चलते हैं !” मैं उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे स्टडी-रूम की ओर ले जाने लगा।

उसकी लम्बाई मेरे कन्धों से थोड़ी ही ऊपर थी। उसके नाजुक बदन की कुंवारी खुशबू और चिकना स्पर्श मुझे मदहोश किये जा रहा था। मैं तो उसके साथ चूमने चिपटने का कोई न कोई बहाना ढूंढ़ ही रहा था। उसे भी कोई परवाह नहीं थी। इस उम्र में इन बातों की परवाह वैसे भी नहीं की जाती। मैं तो बस किसी तरह उसे चोदना चाहता था। पर ये इतना जल्दी कहाँ संभव था। खैर मुझे भी कोई जल्दी नहीं थी।

मेरे मस्तिष्क में कई योजनाएँ घूम रही थी। एक प्लान तो मैं काफी देर से सोच रहा था। मिक्की को कोल्ड ड्रिंक्स और फ़्रूटी पीने का बहुत शौक है उसमें नींद की गोलियाँ डाल दी जाएँ और रात में ? पर घर में इतने सब मेहमानों के होते यह प्लान थोड़ा मुश्किल था। काश कुछ ऐसा हो कि मैं और सिर्फ मेरी प्यारी मिक्की डार्लिंग अकेले हों, हमें डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं हो। काश किसी टापू या महल में हम दोनों अकेले हों और नंगधड़ंग बिना रोकटोक घूमते रहें। काश इस शहर में कोई जलजला या तूफ़ान ही आ जाए सब कुछ उजड़ जाए और बस हम दोनों ही अकेले रह जाए…. ओह्ह्ह्ह्…. पर यह कहाँ संभव है ….!

खैर कोई न कोई रास्ता तो भगवान् जरूर निकालेगा।

मैं मिक्की को अपनी बाहों में लिए स्टडी रूम में आ गया जिसमे मैंने कंप्यूटर, प्रिंटर और अपनी बहुत सी फाइल्स और पुस्तकें रखी हुई हैं। स्टडी-रूम में सामने की दीवार पर एक सीनरी लगी है जिसमें एक तेरह-चौदह साल की बिल्लौरी आँखों वाली लड़की तितली पकड़ रही है, बिलकुल मिक्की जैसी।

मिक्की ने गौर से पेंटिंग को देखा पर कोई कमेन्ट नहीं किया। मैंने उसे कन्धों से पकड़ते हुए अपने साथ वाली कुर्सी पर इस तरीके से बैठाया कि मेरे हाथ उसके उरोजों को छू गए।

वाह ! क्या मस्त चिकना अहसास था !

स्टडी-रूम में आने के बाद मैंने उसे कंप्यूटर के बारे में बताना शुरू किया। वो थोड़ा-बहुत कंप्यूटर के बारे में पहले से जानती थी। सबसे पहले उसे कंप्यूटर चालू करने ओपरेट करने और बंद करने के बारे में बताया। जब स्क्रीन ऑन हुई तो पासवर्ड डालना बताया। मैंने उसे ये पासवर्ड याद रखने के लिए बोला ताकि जब वो इस पर प्रेक्टिस करे तो कोई परेशानी न हो। वो सारी बातें एक कागज़ पर लिखती जा रही थी। फिर मैंने उसे इन्टरनेट और ई-मेल आदि के बारे में भी बताया। फाइल्स खोलना और देखना भी उसे समझाया। हमें कोई एक घण्टा तो इस चक्कर में लग ही गया।

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ऐसा नहीं है कि मैं उसे सिर्फ कंप्यूटर ही समझा रहा था। मैंने तो उसके हाथ, गाल, कंधे, होंठ, सिर के बाल और बूब्स को छूने और दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। कई बार तो मैंने उसकी जाँघों पर भी हाथ साफ़ किया, वो कुछ नहीं बोली। एक दो बार तो मैंने उसके गालों पर प्यार भरी चपत भी लगा दी। मेरे लतीफों से तो वो हंसते हंसते उछल ही पड़ती थी।

एक बार जब उसने अपना एक हाथ ऊपर किया तो उसकी ढीले शर्ट के अन्दर कांख में उगे छोटे छोटे सुनहरे रेशम से रोएँ नजर आ ही गए। हे भगवान् ! उसकी बुर पर भी ऐसी ही सुनहरी केशर-क्यारी बन गई होगी। उसकी थोड़ी खुली और ढीली शर्ट में कैद छोटे छोटे चीकू ? अमरुद? संतरे ? मुझे नजर आ ही गए। उनके उपर मूंग के दाने जितने चूचुक और अट्ठन्नी के आकार का गुलाबी रंग का एरोला।

मेरी आँखें तो फटी की फटी ही रह गई।

मेरा पप्पू तो अब पैन्ट के अन्दर घमासान मचाने पर तुला हुआ था। मुझे लगा कि आज ये मार खाए बिना नहीं मानेगा। मैंने जल्दी से एक किताब अपनी गोद में रख ली। एक दो बार तो मैंने उसकी जांघों पर हाथ रखने के बहाने उसकी पुस्सी को भी टच कर दिया। पता नहीं वो मेरे मन के अन्दर की बात जानती होगी या नहीं ? हाँ मैंने देखा कि उसकी पिक्की के सामने वाला हिस्सा कुछ फूल सा गया है और पिक्की के छेद वाली जगह एक रुपये के सिक्के जितनी जगह गीली हो गई है।

हमें कंप्यूटर पर बैठे हुए डेढ़ दो घंटे तो हो ही गए थे। मैं भी निरा बेवकूफ हूँ इस डेढ़ दो घंटे में मतलब की बात तो भूल ही गया। अचानक मेरे दिमाग में एक प्लान घूम गया और मेरी आँखें तो नए प्लान के बारे में सोच कर चमक ही उठी।

आप जानते होंगे कि अगर किसी चीज को देखने या जानने के लिए मना किया जाए तो उस चीज के प्रति उत्सुकता ज्यादा बढ़ जाती है, ख़ास कर छोटे बच्चों में। और मिक्की भले ही मेरी नजरों में जवान मस्त प्रेमिका हो लेकिन थी तो अभी बच्ची ही। मैंने कुछ हिरोइनों की नंगी फोटो, पिक्चर, फिल्म्स और अन्तर्वासना की कहानियाँ एक फोल्डर में सेव कर रखी हैं। इस से अच्छा मौका और क्या हो सकता था मैंने बातो बातों में उस फोल्डर और फाइल्स का पासवर्ड हटा दिया। अब मैंने मिक्की से कहा- तुम इस फोल्डर को मत खोलना !

“क्यों ऐसा क्या है इसमें ?” मिक्की ने हैरानी से पूछा।

“अरे, इसमें डरावनी फोटो हैं, तुम डर जाओगी !”

“क्या जंगली छिपकलियाँ हैं ?”

मैं जानता था उसे छिपकलियों से बहुत डर लगता है।

मैंने कहा,”हाँ हाँ ! ना ! असली छिपकलियाँ नहीं, पर वैसी ही है !”

मैं अपने मकसद में कामयाब हो चुका था। मैंने कंप्यूटर ऑफ करते समय कनखियों से देखा था कि मिक्की ने पेंसिल से फोल्डर का नाम नोट कर लिया है। हे भगवान् ! तेरा लाख लाख शुक्र है। मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा अब मंजिल नजदीक आ गई है।

शाम के चार बज चुके थे। मधु ने कहा मिक्की को बाजार घुमा लाओ। मैं और मिक्की बाजार जाने की तैयारी करने लगे। मुझे तो क्या तैयारी करनी थी मिक्की ने जरूर अपने कपड़े बदल लिए। हलके पिस्ता रंग की टी-शर्ट और सफ़ेद जीन मेरे कत्ल का पूरा इंतजाम किया था उसने। आप तो जानते है जीन पहने गोल गोल कूल्हे मटकाती लड़कियां मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है।

हम लोग मोटरसाइकल पर बाजार के लिए निकल पड़े। मैंने उसे यहाँ का किला, गणेशस्थान मंदिर और लोहागढ़ फोर्ट आदि दिखाया। हमने एक रेस्तरां में पिज्जा और मटके वाली कुल्फी भी खाई। कुल्फी खाते हुए मैंने उसे मजाक में कहा कि इसे पूरा मुंह में लेकर चूसो बहुत मजा आएगा। मैं तो बस ये देखना चाहता था कि उसे अंगूठे के अलावा भी कुछ चूसना आता है या नहीं। एक स्टाल पर हमने गोलगप्पे भी खाए। गोलगप्पों का साइज़ थोड़ा बड़ा था। जिस अंदाज में पूरा मुंह खोलकर वो गोलगप्पे खा रही थी मैं तो बस यही अंदाजा लगा रहा था कि अगर मेरा डेढ़ इंच मोटा लण्ड ये मुंह में ले ले तो कोई परेशानी नहीं होगी।

आते समय हमने चॉकलेट के चार-पाँच पैकेट, चुइंगम के दो पैकेट, वीडियो गेम्स की सीडी, २ कॉमिक्स, एक रिस्ट वाच, नाइके की एक टोपी और न जाने क्या क्या अल्लम-गल्लम चीजें खरीदी। मैं तो आज उसे तोहफों से लाद देना और हर तरीके से खुश कर देना चाहता था।

हाँ ! एक खास बात- मिक्की के लिए मैंने दो फोम वाली पेंटीज, पैडेड ब्रा और एक झीनी सी नाइटी भी खरीदी। मैंने उसे समझाया कि इसके बारे में अपनी बुआजी या मम्मी से न बताये। उसने मेरी और प्रश्नवाचक निगाहों से देखा पर बोली कुछ नहीं और हाँ में सिर हिला दिया।

मैंने जब उससे कहा कि ये पहनकर भी मुझे दिखानी होगी तो उसने मेरी ओर भोलेपन से देखा पर जब बात का मतलब उसके समझ में आया तो वो शरमा गई। ईईश्श्श….ऽऽ

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हायऽऽ …. इस अदा पर कौन न मर जाये ए खुदा !

मैंने उस से कहा, “देखो मैंने तुम्हारे लिए कितने गिफ्ट खरीदे हैं तुम मुझे क्या गिफ्ट दोगी ?”

तो वो बड़े ही भोले अंदाज में बोली “मेरे पास क्या है गिफ्ट देने के लिए ?”

मैंने अपने मन में कहा, “अरे तुम्हारे पास तो कारूं का खजाना है मेरी बुलबुल !”

पर फिर मैंने कहा “अगर चाहो तो कोई न कोई गिफ्ट तो दे ही सकती हो !”

वो सोच में पड़ गई, फिर बोली “अच्छा एक गिफ्ट है मेरे पास, पर पता नहीं आपको पसंद आएगा या नहीं?”

“क्या है ? प्लीज बताओ न ?” उसने अपनी जेब से एक रेशमी रुमाल निकाला और बोली, “मेरे पास तो देने को बस यही है।”

“पता है यह रुमाल मैंने पिछले साल आगरा से खरीदा था ?”

“अरे कहीं इस से नाक तो नहीं साफ़ की है ?” मैंने हंसते हुए कहा “नहीं तो पर….! हाँ ! जब मैं मटके वाली कुल्फी चूस रही थी मैंने अपने होंठ जरूर साफ़ किये थे” उसने बड़ी मासूमियत से कहा। मैं तो इस अदा पर दिलो जान से फ़िदा हो गया, मर ही मिटा। मैंने उसके हाथ से रुमाल लेकर उसे चूम लिया। मिक्की जोर से शरमा गई पता नहीं क्यों ?

घर आते समय रास्ते में मैंने उसे बताया कि कल हम सभी लिंग महादेव का मंदिर देखने चलेंगे। शहर से १५-१६ किलोमीटर की दूरी पर एक छोटी सी पहाड़ी पर यह शिव मंदिर है जिसमे पाँच फुट का शिवलिंग बना हुआ है। यहाँ मान्यता है कि कोई पैदल नंगे पाँव आकर शिवलिंग पर सोलह सोमवार कच्चा दूध चढ़ाये तो उसकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। मैंने कभी इसे आजमाया नहीं था पर अब मेरा मन कर रहा था कि एक बार यह टोटका भी आजमा कर देख ही लूँ पर १६ सोमवार यानी ४-५ महीने….। यार थोड़ा कम नहीं हो सकता ?

इन बातों से दूर मिक्की तो मेरी बात सुनकर झूम ही उठी। उसकी आँखों की चमक तो देखने लायक थी। लेकिन फिर उसने थोड़ी मायूसी से पूछा,”क्या आप कल ऑफिस नहीं जाओगे?”

“अरे मेरी बिल्लो रानी तुम्हारे लिए छुट्टी ले लेंगे तुम क्यों चिंता करती हो” मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा। वो शरमा गई। उसके गाल अचानक लाल हो गए और उसने रस भरी आवाज और कातिलाना अंदाज में कहा,”थैंक यू मेरे प्यारे फ़ूऽऽफा…. अर्ररर जीऽऽ जा जीऽऽ ईईस्स्स्सश्श

आज अगर इसी क्षण मृत्यु भी आ जाये तो कोई गम नहीं।

जब हम घर पहुंचे तो वहाँ बम फूट चुका था। रमेश अपने मार्केटिंग के काम से वापस आ गया था। उसने बताया कि सुधा के चाचा का एक्सीडेंट हो गया है और उन्हें आज ही दिल्ली जाना होगा। खबर सुनकर मेरा तो दिल ही बैठ गया। हे भगवान्। मिक्की ने जब सुना तो वो भी उदास हो गई। उसके चेहरे से लगता था कि वो अभी रो पड़ेगी।

“प्रेम हमें आज रात ही निकलना होगा। क्या दिल्ली के लिए अभी कोई ट्रेन है ? रमेश ने पूछा।

“हाँ ट्रेन तो है रात दस बजे पर… रिज़र्वेशन?”

“कोई बात नहीं मैनेज कर लेंगे। अरे सुधा, जल्दी करो, सामान देख लो ! मिक्की कहाँ है ?” रमेश ने सुधा को आवाज दी।

“भाई साहब क्या सुबह नहीं जा सकते ?” मैंने पूछा।

“अरे यार सुधा और मेरा जाना बहुत जरूरी है !”

मुझे थोड़ी सी आशा बंधी मैंने कहा “पर मिक्की तो यहाँ रह सकती है ?”

“वो अकेली यहाँ क्या करेगी ?”

“बच्ची है पहली बार आई है थोड़ा घूम फिर लेगी वापस लौटते समय आप उसे भी साथ ले जाना !” मैंने कहा।

“चलो ठीक है !”

रमेश गेस्टरूम की ओर चला गया जहां सुधा और मधु बैठी थी। मैं भागता हुआ अपने बेडरूम में गया मैंने देखा मिक्की बेड पर ओंधे मुंह लेटी रो रही है। हे भगवान् क्या कयामत के गोल गोल नितम्ब थे। मैंने उसकी जाँघों और नितम्बों पर हाथ फेरा और उसे प्यार से आवाज दी,”अरे मिक्की माउस ! क्या हुआ ?”

“जिज्जू मैं मम्मी-पापा के साथ नहीं जाना चाहती ! प्लीज मम्मी पापा को मना लो ! प्लीज जिज्जू !” उसने लगभग रोते हुए कहा।

“अच्छा ! चलो, पहले अपने आंसू पौंछो ! शाबास ! गुड गर्ल ! अच्छे बच्चे रोते नहीं हैं !” मैंने उसके गालों पर हाथ फेरते हुए कहा। इतना बढ़िया मौका मैं भला कैसे छोड़ सकता था।

“क्या पापा मान जायेंगे ?”

“तुम चिंता मत करो मैंने उन्हें मना लिया है !”

“ओह मेरे अच्छे जिज्जू !”

मिक्की यकायक मुझसे लिपट गई और उसने मेरे गालों पर चूम लिया। मैं तो अवसर की तलाश में था !

मैंने झटसे मिक्की को अपनी बाहों मे जकड़ लिया और अपने लब उसके गुलाबी लबों से मिला दिए। मेरे दोनों हाथ उसकी पीठ पर थे और मेरी जीभ उसके होठों के बीच में अपना रास्ता तलाशते तलाशते उसकी जीभ से जा मिली।

कुछ पलों के लिए तो मैं अपनी सुधबुध ही खो बैठा और शायद वो भी !

लेकिन मिक्की होश में आई और अपने आप को मुझसे छुड़ा कर मेरे गाल पर एक चुम्बन ले कर बाथरूम में भाग गई अपना मुंह धोने। ये सब बहुत जल्दी और अप्रत्याशित हुआ था। मैंने अपने गालों को दो तीन बार उसी जगह सहलाया और फिर अपनी अंगुलियों को चूम लिया।

तो दोस्तो, यह था हमारा दूसरा चुम्बन !

जल्दी ही अगला भाग भी आपकी नज़र होगा।

इस कहानी का मूल्यांकन कहानी के अन्तिम भाग में करें !

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